लेसकैश को लेकर व्यापारियों के सवाल पर सरकार का सिर चकराया
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ग्वालियर से आए आरबी गुप्ता जानना चाहते हैं कि वह लेस कैश व्यवस्था में आएंगे तो उनपर आने वाला अतिरिक्त खर्च कौन वहन करेगा। हैदराबाद से आए प्रकाश का भी सवाल यही रहा। कांस्टीट्यूशन क्लब में केन्द्र सरकार की लेस कैश योजना के समर्थन में द कांफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसियेशन(सीएआईटी) ने सम्मेलन करा रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के डीआईपीपी सचिव रमेश अभिषेक ने इसमें हिस्सा लिया और दूर-दराज से आए लोगों के सवाल का अभी सरकार कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी है।
प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक 26 राज्यों से आए 300 लोग शनिवार को भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसमें मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल, नीति आयोग के सीईओ अभिताभ कांत हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के पहले दिन लोगों को लेसकैश प्रक्रिया को अपनाने के लिए सभी विकल्पों, तकनीक, इस्तेमाल की जानकारी दी गई। इसमें एचडीएफसी, पेटीएम, मोबाइल पॉज की सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
कौन उठाएगा खर्च
-लेस कैश का विकल्प बताने के बाद जब सवाल-जवाब की बारी आई तो अनूठे सवाल उठे। दूर दराज से आए प्रतिनिधियों ने जाना चाहा कि लेस कैश व्यवस्था अपनाने पर आने वाला खर्च कौन उठाए। मोबाइल पॉज (कार्ड स्वैपिंग)मशीन चार से आठ हजार रुपये में आती है, ऑन लाइन कैश ट्रांजक्शन पर 2.5-4 प्रतिशत तक चार्ज लगता है, पेटीएम जैसी सेवा भी चार्ज करती है। यह खर्चा कौन उठाएगा?
-लेस कैश व्यवस्था में आने पर मोबाइल फोन अप्लीकेशन (पेटीएम आदि) के जरिए होने वाले भुगतान के क्रम में टच स्क्रीन स्मार्ट मोबाइल फोन, इंटरनेट की जरूरत होगी। तमाम उपभोक्ता, दुकानदार के पास यह नहीं है। इसका खर्च कौन उठाएगा?
व्यापारियों ने खड़े किए हाथ
-कुछ अप्लीकेशन बिना इंटरनेट सेवा के भी आने की उम्मीद हैं, लेकिन यह भी स्मार्ट फोन पर ही चलेंगे। इसके अलावा देश के उपभोक्ताओं, व्यापारियों के पास सस्ते चाइनीज फोन हैं। इसका हैकर्स भी लाभ उठाएंगे, आर्थिक असुरक्षा बढ़ेगी?
-डेबिट कार्ड अथवा क्रेडिट कार्ड आदि का वार्षिक शुल्क, लेन-देन की सीमा लांघने के बाद लगने वाला चार्ज, बैंक में निश्चित जमा राशि होने की शर्त आदि का क्या क्या होगा?
सरकार ने दिया जवाब
वाणिज्य मंत्रालय के डीआईपीपी विभाग के सचिव रमेश अभिषेक ने इन सवालों को महत्वपूर्ण माना। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार रही है। लेस कैश की व्यवस्था को कारगर बनाने के लिए ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट पर लगने वाले चार्ज के बारे में भी विचार किया जा रहा है। सरकार इस चार्ज को कुछ कम कराने या पूरी तरह से खत्म करने जैसे तमाम विकल्पों पर मंथन करने के बाद जल्द ही इस बारे में घोषणा कर सकती है।
व्यापारियों ने खड़े किए हाथ
-सीएआईटी के प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि व्यापारी, दुकानदार इस तरह का कोई खर्च या डिजिटल ऑन लाइन पेमेंट पर लगने वाले चार्ज का खर्च नहीं उठाएंगे। खंडेलवाल के मुताबिक अभी तक यह खर्च उपभोक्ता उठाता है। वहीं ऑनलाइन पेमेंट से दुकानदार, व्यापारी के टैक्स का दायरा भी बढऩे की आशंका है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह धनराशि के भुगतान में लगने वाले चार्ज को पूरी तरह से समाप्त करे।
-लेस कैश की तरफ बढऩे के लिए उपभोक्ता और दुकानदार, व्यापारी को प्रोत्साहन मिले। रिवार्ड दिए जाएं।
-सरकार मशीन, डिजिटल ऑनलाइन पेमेंट के लिए उपयुक्त मशीन या मोबाइल फोन पर आने वाले खर्च के बारे में गंभीरता से सोचे।
हर आदमी के पास ऑनलाइन लेन-देन में सक्षम मोबाइल फोन नहीं
गांव और कस्बों की समस्या
सम्मेलन में आए ग्वालियर के आरबी गुप्ता कलेक्ट्रेट में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट रहे हैं। गुप्ता का कहना है कि गांव, कस्बाई बाजार, दूर-दराज के जिलों में बिजली, इंटरनेट सेवा समस्या की तरह है। हर आदमी के पास ऑनलाइन लेन-देन में सक्षम मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड नहीं है। जिनके पास एटीएम कार्ड है, वह बराबर उसका इस्तेमाल करना नहीं जानते आदि।
अभी क्या है
-देश में करीब 70 करोड़ डेबिट कार्ड हैं।
-95 प्रतिशत डेबिट कार्ड का प्रयोग सामान्य तौर पर पैसा एटीएम निकालने में होता है।
-पांच प्रतिशत डेबिट कार्ड का लोग खरीददारी में में प्रयोग करते हैं।
-7-8 करोड़ लोग क्रेडिट कार्ड रखते हैं
-चार-पांच करोड़ लोग ऑनलाइन पेमेंट, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, पेटीएम आदि का उपयोग करते हैं।