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CRPF: क्यों चर्चा में है टॉप IPS की लेह यात्रा, एक दर्जन सदस्यों की सुरक्षा और पर्यटन के इंतजाम पर उठ रहे सवाल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 04 Sep 2025 07:48 PM IST
सार

शीर्ष अधिकारी ने 'एक्स' पर लेह दौरे की तस्वीरें भी साझा की हैं। इस दौरे के लिए फील्ड में तैनात सीआरपीएफ के अफसरों एवं जवानों  को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आरोप है कि दौरे में सरकारी धन और संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है।  

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Top IPS's Leh visit raises questions on security and tourism arrangements of a dozen members
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Leh.nic.in

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में एक शीर्ष आईपीएस अधिकारी की लेह दौरा चर्चा में है। यह दौरा पिछले दिनों संपन्न हुआ है। सीआरपीएफ मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि इस दौरे में आईपीएस अधिकारी के साथ उनके परिवार के सदस्य एवं रिश्तेदार भी शामिल रहे। लेह जाने वाले सदस्यों की संख्या एक दर्जन से अधिक बताई जा रही है। यात्रा के इंतजाम में फोर्स के संसाधनों के दुरुपयोग और जवानों की सुरक्षा से खिलवाड़ के आरोप लगाए गए हैं।  

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बता दें कि शीर्ष अधिकारी ने 'एक्स' पर लेह दौरे की तस्वीरें भी साझा की हैं। इस दौरे के लिए फील्ड में तैनात सीआरपीएफ के अफसरों एवं जवानों  को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आरोप है कि दौरे में सरकारी धन और संसाधनों का दुरुपयोग हुआ है। यह दौरा 21 अगस्त से 25 अगस्त तक के लिए प्रस्तावित था। सूत्रों का कहना है कि लेह के मौसम में बदलाव के कारण दौरे को आगे बढ़ाना पड़ा। 
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इस दौरान वहां पर भारी संख्या में फोर्स के सदस्य तैनात रहे। आरोप है कि इससे जवानों की सुरक्षा प्रभावित हुई। इस यात्रा में उक्त अधिकारी एवं उनका परिवार जिस होटल में ठहरे थे, वहां के एक विशेष सुइट का किराया लगभग 30 हजार से 35 हजार रुपये प्रतिदिन बताया गया है। अन्य कमरों का किराया भी करीब 15 हजार रुपये प्रतिदिन था। 
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सूत्रों ने बताया कि साहब के रहने खाने का इंतजाम कथित तौर पर 79वीं बटालियन के द्वारा किया गया। अधिकारी का परिवार, लेह शहर के अलावा पैंगोंग झील जैसे पर्यटन स्थल पर भी पहुंचा। दौरे को सफल बनाने के लिए फोर्स की चार कंपनियां (ई/25, जी/25, ए/115 और जी/115 को श्रीनगर/गांदरबल से कारगिल होते हुए लेह रवाना किया गया था। सूत्रों का कहना है कि इन कंपनियों को आनन फानन में लेह भेजा गया। दौरे में तीन ट्रक (43, 61 और 75 बटालियन से), एक मिनीबस (75 बटालियन से) और पांच बोलेरो व टाटा सफारी (28, 79 और 75 बटालियन से) शामिल बताए जाते हैं। 

दौरे में सब ठीक रहे, इसके लिए श्रीनगर सेक्टर के डीआईजी को विशेष रूप से लाइजनिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया। बल के दूसरे अधिकारियों ने इस दौरे पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, अगर यह दौरा वास्तव में आधिकारिक होता तो प्रोटोकॉल के तहत जम्मू-कश्मीर जोन के शीर्ष अधिकारियों को साथ होना चाहिए था ,लेकिन अधिकारी मौजूद नहीं थे। 


इस बाबत मुख्यालय के जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि डीजी की यह आधिकारिक यात्रा थी। उनके दौरे पर जो चार कंपनियां भेजी गईं, वह स्थायी तौर पर अब वहीं रहेंगी। डीजी की पत्नी, जो इस दौरे में साथ रहीं, उन्होंने अपना सारा खर्च खुद वहन किया, ना कि कावा के फंड से। इस यात्रा में शामिल डीजी के रिश्तेदारों ने भी खुद ही अपनी टिकट बुक कराई थी। जिस होटल में वे सभी लोग ठहरे थे, उसका भुगतान डीजी ने खुद किया। डीजी ने अपने निजी खर्च पर अतिथियों के लिए दो इनोवा बुक की थीं।

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