टूलकिट मामले में खुलासा: ट्रैक्टर रैली से पहले दिशा और निकिता ने धालीवाल के साथ की थी बैठक, ये था प्लान
दिल्ली पुलिस ने किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में 21 साल की जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को रविवार को बंगलूरू से गिरफ्तार किया। अब इसी मामले में दिल्ली की एक अदालत ने कार्यकर्ता-वकील निकिता जैकब और शांतनु के खिलाफ गैर जमानती वारंट किया है। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है और इनकी लोकेशन मिलते ही इन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इसी बीच, टूलकिट मामले में एक और अहम खुलासा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि दिशा और निकिता ने जूम पर खालिस्तानी समर्थक और पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक मो धालीवाल के साथ बैठक की थी। इसका मकसद 26 जनवरी के मौके पर ट्विटर पर भारी जन समर्थन जुटाना था। बता दें कि किसानों का समर्थन करते हुए बीते दिनों ग्रेटा थनबर्ग ने एक ट्वीट किया था। अपने ट्वीट के साथ उन्होंने एक टूलकिट शेयर की थी। हालांकि बाद में उन्होंने इसे डिलीट कर दिया था। इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने तीनों पर शिंकजा कसा है। ऐसे में जानिए कौन हैं ये तीनों-
कौन हैं निकिता जैकब
निकिता जैकब एक कार्यकर्ता और वकील हैं। टूलकिट विवाद छिड़ने पर निकिता ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया था। ऐसा दावा किया जा रहा कि निकिता ने अपनी ट्विटर प्रोफाइल पर खुद का परिचय बंबई उच्च न्यायालय की वकील, पर्यावरणविद और आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़े होने के तौर पर दिया था। नई प्रोफाइल में उन्होंने आप से जुड़े होने की बात हटा दी है।
एक यूजर विजय पटेल ने दावा किया है कि निकिता ने 30 जनवरी, 2021 को 'सॉलिडेरिटी विद इंडियन फार्मर्स' के नाम से एक डॉक्युमेंट तैयार किया था। ऐसा दावा किया गया है कि उनका इंस्टाग्राम पर न्यूज इनफ्यूज नाम से एक अकाउंट है जिसके जरिए वे प्रोपेगैंडा फैलाती रहती हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि बंबई उच्च न्यायालय की वकील टूलकिट विवाद में अपना नाम आने के बाद से फरार हैं। वह भारत विरोधी अभियानों में भाग लिया करती थीं। पुलिस का आरोप है कि धालीवाल संग उनकी जूम पर हुई बैठक में एक योजना तैयार की गई थी।
कोई भी आसानी से प्रभावित कर सकता है: निकिता
निकिता ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वेबसाइट का लिंक साझा किया है। वेबसाइट पर अपना परिचय देते हुए उन्होंने खुद को वकील बताया है। उन्होंने लिखा है कि वे सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करती रहती हैं। वेबसाइट के अनुसार, निकिता सही के पक्ष में खड़ा होना चाहती हैं लेकिन आखिर में वो अनचाहे गलती कर बैठती हैं। उनका कहना है कि कोई भी उन्हें आसानी से प्रभावित कर सकता है। निकिता का कहना है कि वे लेखक, गायिका और वॉइस आर्टिस्ट बनना चाहती हैं। वे फोटोग्राफी कर लेती हैं और खाना भी बना लेती हैं।
कौन हैं दिशा रवि
नार्थ बंगलूरू के सोलादेवना हल्ली इलाके की रहने वाली व जलवायु कार्यकर्ता दिशा ने माउंट कार्मल कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की है। इस समय वह गुड माइल्क कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के समय वह अपने घर में ही काम कर रही थीं। दिशा रवि के पिता मैसूर में एक एथलेटिक कोच हैं और मां एक गृहिणी हैं। दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि की गिरफ्तारी को लेकर बंगलूरू पुलिस को जानकारी दी।
फ्राइडे फॉर फ्यूचर की संस्थापक हैं दिशा
दिल्ली की एक अदालत ने दिशा को पांच दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है। वे 'फ्राइडे फॉर फ्यूचर' नाम के अभियान की संस्थापक हैं। वे माउंट कार्मल कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। वोग मैग्जीन ने पर्यावरण संकट को मुख्यधारा में लाने वाले दुनिया के चार अहम अश्वेत कार्यकर्ताओं की सूची में दिशा को शामिल किया था। वे न्यूज पोर्टल सहित सोशल मीडिया पर नियमित रूप से कॉलम लिखती रहती हैं और युवाओं और किशोर कार्यकर्ताओं के लिए जलवायु से संबंधित फोरम का संचालन करती हैं।
पुलिस ने जब्त किया दिशा का लैपटॉप और मोबाइल
पुलिस अधिकारी ने कहा कि दिशा रवि का लैपटॉप और मोबाइल आगे की जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वह इस मामले से जुड़े अन्य लोगों के संपर्क में थीं या नहीं। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने गूगल और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से 'टूलकिट' बनाने वालों से जुड़े ईमेल आईडी, डोमेन यूआरएल और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देने को कहा था। जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने इस टूलकिट को किसानों के समर्थन में किए ट्वीट के साथ साझा किया था।
इस वजह से जलवायु कार्यकर्ता बनीं दिशा
रिपोर्ट्स की मानें तो दिशा के परिवार का घर बाढ़ की चपेट में आ गया था। दिशा ने इसके कारण तलाशने शुरू किए। साथ ही उनका कहना है कि इस तरह की त्रासदी के लिए राजनेताओं की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जलवायु कार्यकर्ता का मानना है कि बाढ़, भारी बारिश से होने वाली तबाही के लिए सीधे तौर पर राजनेता जिम्मेदार हैं क्योंकि वे 'ढीले कदम' ही उठाते रहे हैं।
धालीवाल ने अपने सहयोगी के जरिए किया था निकिता से संपर्क
निकिता जैकब ने बंबई उच्च न्यायालय में गैर-जमानती वारंट के खिलाफ ट्रांजिट बेल की अर्जी दायर की है। कल इस मामले की सुनवाई हो सकती है। टूलकिट की साजिश को लेकर सूत्रों ने कहा, 'चार दिन पहले स्पेशल सेल की टीम निकिता जैकब के घर गई थी। उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच की गई।
दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वे उनसे पूछताछ करने के लिए फिर आएंगे, लेकिन दोबारा पहुंचने पर वह गायब थीं।' पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक मो धालीवाल ने अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था। इसके बाद धालीवाल, निकिता, दिशा और अन्य लोगों ने गणतंत्र दिवस से पहले जूम पर बैठक की थी। इस बैठक का उद्देश्य गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के मुद्दे पर ट्विटर पर जन समर्थन जुटाना था।
शांतनु
शांतनु भी एक कार्यकर्ता हैं। उनके खिलाफ दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को गैर जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस फिलहाल उनकी तलाश कर रही है।
टूलकिट में क्या था
टूलकिट में बताया गया था किसान आंदोलन में सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाया जाए। हैशटैग का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए और प्रदर्शन के दौरान क्या किया जाए और क्या नहीं, सब जानकारी इसमें मौजूद थी। तीन फरवरी को कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों का समर्थंन करते हुए इस टूलकिट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। बाद में इस टूलकिट को सोशल मीडिया ने प्रतिबंधित कर उसे डिलीट कर दिया था।