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Hindi News ›   India News ›   Tollygunge Kali Puja Pandal 2025: ‘Aalo’ Theme to Illuminate Darkness, Special Tribute to Visually Impaired

Kolkata: ‘आलो’ थीम में टॉलीगंज का काली पूजा पंडाल करेगा अंधेरे को रौशन, दृष्टिबाधितों को समर्पित विशेष पहल

Fri, 17 Oct 2025 06:58 AM IST
शिवम गर्ग एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 17 Oct 2025 06:58 AM IST
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Tollygunge Kali Puja Pandal 2025: ‘Aalo’ Theme to Illuminate Darkness, Special Tribute to Visually Impaired
काली माता (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe

भारत की विविधताओं में हर प्रांत की अपनी पहचान है। कोई भाषा से जाना जाता है, कोई खानपान से, कोई वीरता से तो कोई अध्यात्म से। अगर बंगाल को पहचानना हो तो दो शब्द काफी हैं—कला और उत्सव। यही कारण है कि इसे एक ओर “साहित्य और कला की राजधानी” कहा जाता है, तो दूसरी ओर “उत्सवों की धरती” भी। यहां के जीवन का सबसे सटीक बयान उस मशहूर बांग्ला कहावत में मिलता है—बारोह मासे तेरोह पूजो”, यानी पूरे साल उत्सवों से जगमगाती ये है बंगाल की धरती। दुर्गापूजा को गए कुछ ही दिन बीते हैं कि कोलकाता और आसपास कालीपूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कोलकाता की प्रसिद्ध काली पूजा समितियों में से एक टॉलीगंज छात्र संघ इस साल दिव्यांगजनों — विशेषकर दृष्टिबाधित लोगों — को एक अनोखी श्रद्धांजलि देने जा रहा है। अपनी 63 साल पुरानी विरासत को आगे बढ़ाते हुए समिति ने इस वर्ष की थीम ‘आलो’ (रोशनी) रखी है। पंडाल में रोशनी न सिर्फ सजावट का हिस्सा होगी, बल्कि यह उन लोगों को समर्पित होगी जो अंधेरे में जीते हुए भी दुनिया को अपनी अनूठी दृष्टि से महसूस करते हैं।

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इस थीम को कलाकार बिवास मुखर्जी ने तैयार किया है। उन्होंने कहा, दृष्टिबाधित लोग हमसे अलग नहीं हैं। वे दुनिया को अलग ढंग से महसूस करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी मायने में कम हैं। पंडाल की सबसे खास बात इसका प्रतीकात्मक डिज़ाइन है — एक ओर उजाला और दूसरी ओर उस उजाले की परछाईं, जो इस बात का प्रतीक है कि रोशनी सिर्फ आंखों से नहीं, दिल और स्पर्श से भी महसूस की जा सकती है। खास तौर पर दृष्टिबाधित आगंतुकों के लिए पूरे पंडाल में बनाई गई पेंटिंग्स और चित्रों पर ब्रेल लिपि उकेरी गई है, ताकि वे कला को छूकर समझ और महसूस कर सकें।
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यह पहल सिर्फ एक दृश्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक गहरा सामाजिक संदेश भी देती है। प्रतीकात्मक प्रकाश व्यवस्था और स्पर्श आधारित कला के जरिये यह पंडाल दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है कि दुनिया को देखने के कई अलग-अलग तरीके होते हैं। थीम में लुई ब्रेल और हेलेन केलर जैसी हस्तियों को भी नमन किया गया है, जिन्होंने अंधत्व को कमी नहीं बल्कि एक अलग दृष्टिकोण में बदल दिया। जैसे-जैसे कोलकाता की रोशनी काली पूजा की रात को जगमगाएगी, यह पंडाल सभी को याद दिलाएगा — सच्ची रोशनी वह नहीं जो आंखों से दिखे, बल्कि वह है जिसे दिल से महसूस किया जा सके।

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