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Adopt Heritage 2.0: 'आज संस्कृति को दोबारा संतुलित करने की लड़ाई'; विरासत के बारे में बोले विदेश मंत्री जयशंकर
Mon, 01 Apr 2024 12:27 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Mon, 01 Apr 2024 12:27 AM IST
सार
एस जयशंकर पुराना किला में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी की अपनी विरासत, संस्कृति और विश्वास को पेश करना पारंपरिक राजनीति की तरह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि पारंपरिक राजनीति में।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार की दुनिया में सांस्कृतिक पुनर्संतुलन के महत्व को रेखांकित किया। वह पुराना किला में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि किसी की अपनी विरासत, संस्कृति और विश्वास को पेश करना पारंपरिक राजनीति की तरह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि पारंपरिक राजनीति में।
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बता दें कि इस कार्यक्रम में सरकार के 'अडॉप्ट ए हेरिटेज 2.0' के तहत पांच साल के लिए चार ऐतिहासिक स्मारकों - पुराना किला, हुमायूं का मकबरा, सफदरजंग मकबरा और महरौली पुरातत्व पार्क - के लिए गैर सरकारी संगठन या एनजीओ सभ्या फाउंडेशन को 'स्मारक सारथी' घोषित किया गया।
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विदेशमंत्री ने कहा, 'आज लड़ाई संस्कृति के पुनर्संतुलन की है। हम दुनिया की संपूर्ण विविधता को कैसे पहचानें, हम उस युग की विकृतियों को कैसे दूर करें जिसे कुछ देशों और कुछ क्षेत्रों ने विकृत कर दिया था।' उन्होंने आगे कहा, 'यही कारण है कि आज अपनी विरासत, अपनी संस्कृति, अपनी जीवन शैली, अपनी आस्था, अपने विश्वास को सामने रखना महत्वपूर्ण है और मेरे लिए कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि पारंपरिक राजनीति।'
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एस जयशंकर ने आगे समझाया, 'ऐसा कोई भी (महाकाव्य) नहीं है जो वास्तव में न केवल जटिलता और सूक्ष्मता के मामले में महाभारत से तुलना करता हो, लेकिन वास्तव में दुनिया को, उसकी चुनौतियों को और उसके अवसरों को देखना आज भी कितना प्रासंगिक है।'
दरअसल, 'एडॉप्ट ए हेरिटेज 2.0' परियोजना, संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की एक पहल है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय संरक्षित स्मारकों और स्थलों पर सुविधाएं प्रदान करने, विकसित करने और बनाए रखने के लिए निजी/सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के साथ साझेदारी करना है। इसके साथ ही 'स्मारक सारथी' के रूप में, सभ्याता फाउंडेशन इन चार विरासत स्थलों पर आगंतुकों के अनुभवों को बढ़ाने और उन्हें खास स्थलों के रूप में स्थापित करने की जिम्मेदारी लेगा।