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ऑपरेशन ऑल आउट के खिलाफ कायरता पर उतारू घाटी के आतंकी

Sat, 01 Sep 2018 03:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Sep 2018 03:17 PM IST
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to save themselves from security forces operations militants are abducting forces relatives

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑलआउट की वजह से आतंकी बौखलाए हुए हैं। पिछले कुछ समय से जिस तरह से सुरक्षाबलों ने दहशतगर्दों के खिलाफ मोर्चा खोला है उससे आतंकी घबरा गए हैं और अब वे एंटी-टेरर गतिविधियों में शामिल सुरक्षाबलों के परिजनों को निशाना बना रहे हैं। ऐसी हरकत करके वो सुरक्षाबलों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह उनके रिश्तेदारों का अपहरण कर रहे हैं ताकि उनके खिलाफ चल रहे अभियान पर अंकुश लगाया जा सके। वहीं सुरक्षाबल हिट लिस्ट में शामिल आतंकियों को घेरकर खात्मा करने में व्यस्त हैं। ऐसे में यदि दक्षिण कश्मीर का इलाका छोड़ दें तो स्थानीय आतंकवादियों के लिए दूसरी कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है।

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आतंकियों ने सुरक्षाबलों को कब-कब बनाया निशाना

6 जनवरी- उत्तर कश्मीर के सोपोर के मुख्य बाजार में आतंकियों ने आईडी धमाका किया। जिसमें चार पुलिसवाले शहीद हो गए थे।

6 फरवरी- आतंकियों ने एसएमएचएस अस्पताल के अंदर हमले किया जिसमें दो पुलिसवाले शहीद हो गए थे। इसी हमले के दौरान लशकर-ए-तैयबा का कमांडर नवीद जट अस्पताल से भागने में सफल रहा। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बाद में हमलावरों की पहचान हो गई थी।
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21 मार्च- उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में दो पुलिसवाले शहीद हो गए थे। 

12 जून- दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में आतंकियों के हमले में दो पुलिसवाले शहीद हो गए थे। 

14 जून- प्रेस कालोनी के बाहर वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी गई थी। आतंकियों के इस हमले में दो पुलिसवाले जो बुखारी के बॉडीगार्ड थे, वह भी मारे गए थे।
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22 अगस्त- बकरीद के मौके पर आतंकियों ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जिले में तीन पुलिसवालों को मार दिया था। जिसमें एक इंसपेक्टर भी शामिल था।

29 अगस्त- शोपियां में आतंकियों के हमले में उप-पुलिस अधीक्षक के चार गार्ड्स जोकि पुलिसवाले थे उनकी हत्या कर दी थी।

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आतंकियों द्वारा पुलिसवालों के सदस्यों का अपहरण

शुक्रवार को दक्षिण कश्मीर के त्राल के दो मंजिला घर में गुलाम हसन मीर के परिवारवाले बहुत ही उत्सुकता से छोटे बेटे नासिर अहमद को लेकर कोई खबर आने का इंतजार कर रहे थे। गुरुवार रात को उसे अज्ञात बंदूकधारियों ने उस समय अगवा कर लिया था जब वह नमाज पढ़ने के लिए घर से बाहर निकला था। नासिर के पिता गुलाम हसन ने कहा, 'मैं मणिगाम के पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में अपनी ड्यूटी पर था जब मुझे अपने छोटे बेटे के अपहरण का फोन आया। मुझे नहीं पता आखिर मेरे बेटे का अपहरण क्यों किया गया था। मैं एक कुक हूं और मैंने जिंदगी में किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है।' इसी तरह आंतकियों ने शबीर अहमद के भाई को अगवा कर लिया था। उन्होंने कहा, 'मेरा भाई शाम की नमाज अदा करने के लिए घर से निकला था और वापस नहीं लौटा। हमें लगा कि वह कहीं ठहर गया होगा। एक घंटे बाद सोशल मीडिया के जरिए हमे पता चला कि उसका अपहरण कर लिया गया है।'

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रियाज अहमद नायकू

घाटी के हजारों युवा बनना चाहते हैं पुलिसवाले

घाटी में आजादी की मांग और आतंकियों के खौफ के बीच हजारों युवा पुलिसबल और भारतीय सेना में शामिल होने की इच्छा रखते हैं। अधिकारियों के अनुसार इस साल 5000 लोग जिसमें 218 महिलाएं शामिल है, उनकी कांस्टेबल पद पर भर्ती हुई। उन्होंने कहा 698 सब- इंस्पेक्टर की भर्ती आखिरी चरण में है। जिसके लिए पिछले साल मई में 67,000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इसमें से 35,722 उम्मीदवार कश्मीर से थे। इस महीने पुलवामा के लेथपुरा के कमांडो ट्रेनिंग सेंटर से 790 जवानों ने अपना प्रशिक्षण पूरा किया है। वहीं जम्मू के विजयपुर के पुलिस टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन से 215 कांस्टेबल ने प्रशिक्षण पूरा किया है। 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद जहां घाटी में काफी विरोध प्रदर्शन हो रहा था, उसी बीच केवल 6000 रुपए की मासिक आय वाली विशेष पुलिस बल के पद के लिए लगभग 25,000 युवा कश्मीरियों ने आवेदन किया था।

बुरहान वानी के बाद नायकू ने संभाली हिजबुक की कमान

30 साल का नायकू सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर 2016 में पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी की मौत के बाद आना शुरू हुआ था। उसके सिर पर 12 लाख रुपए का ईनाम है। अवंतीपुरा के दुरबग के नायकू मोहल्ले का निवासी नायकू घाटी के वांछनीय आतंकियों की A++ श्रेणी में आता है। उसने घाटी में पिछले साल सबजार भट की मौत के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुखिया का पद संभाला है। केंद्रीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा, 'नायकू को पूरी घाटी में हिजबुल का कमांडर माना जाता है। पिछले एक साल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने उसे कई बार घेरा है लेकिन हर बार वह किसी तरह बचकर भाग निकलने में सफल रहा।' अधिकारी ने आगे कहा कि नायकू ने दृढ़ता से अपनी एक उसूलपरस्त आतंकवादी की छवि बनाई है।

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