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West Bengal: सरना धर्म को मान्यता देने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पेश करेगी TMC, भाजपा ने किया पलटवार
Tue, 07 Feb 2023 09:00 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 07 Feb 2023 09:00 PM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस ने पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिमी मिदनापुर और उत्तर बंगाल के कुछ हिस्सों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आदिवासियों तक पहुंच बनाने के लिए सरना धर्म को मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव लाने का भी फैसला किया है।
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टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
पश्चिम बंगाल में आगामी पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए सत्तारूढ़ टीएमसी ने विधानसभा में दो प्रस्ताव पेश करने का फैसला किया है, एक पश्चिम बंगाल को विभाजित करने के प्रयासों के खिलाफ और दूसरा आदिवासियों के सरना धर्म को मान्यता देने के लिए। सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए राज्य के संसदीय कार्य मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को कहा कि दोनों प्रस्ताव 13 फरवरी को विधानसभा में पेश किए जाएंगे।
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उन्होंने कहा, "भाजपा और उसके सहयोगियों के द्वारा बंगाल, विशेष रूप से उत्तर बंगाल को विभाजित करने के प्रयास किए गए हैं। हमें राज्य को प्रतिक्रियावादी ताकतों से बचाने के लिए एकजुट होना होगा, जो बंगाल को विभाजित करना चाहते हैं।" दार्जिलिंग सहित अपने आठ जिलों के साथ उत्तर बंगाल, पश्चिम बंगाल के लिए आर्थिक रूप से अहम है क्योंकि यहां चाय, लकड़ी और पर्यटन उद्योग हैं।
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यह स्थान सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। इसे आमतौर पर 'चिकन नेक' के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यह मुख्य भूमि को उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के साथ अपनी सीमा साझा करने वाले इस क्षेत्र में गोरखाओं और राजवंशी जैसे विभिन्न जातीय समूहों द्वारा अस्सी के दशक की शुरुआत से हिंसक राज्य आंदोलन देखे गए थे।
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बीते कुछ वर्षों में अलीपुरद्वार के सांसद जॉन बारला सहित कई भाजपा सांसदों ने मांग की है कि उत्तर बंगाल को एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए। टीएमसी सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य भाजपा के इरादे को बेनकाब करना है।
एक टीएमसी विधायकों ने कहा, भाजपा के कुछ नेताओं ने खुले तौर पर मांग की है कि उत्तर बंगाल को एक अलग राज्य के रूप में बनाया जाए। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। देखते हैं कि प्रस्ताव पेश होने पर भाजपा का क्या कहती है।
तृणमूल कांग्रेस के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के मुख्य सचेतक मनोज तिग्गा ने कहा कि पार्टी विधायकों की बैठक के दौरान प्रस्ताव पर चर्चा करेगी और विधानसभा में चर्चा में भाग लेने पर फैसला करेगी। उन्होंने कहा, भाजपा एक पार्टी के रूप में पश्चिम बंगाल के विभाजन का समर्थन नहीं करती है। अगर हमारे किसी नेता ने कुछ कहा है तो उन्होंने निजी तौर पर ऐसा कहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिमी मिदनापुर और उत्तर बंगाल के कुछ हिस्सों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आदिवासियों तक पहुंच बनाने के लिए सरना धर्म को मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव लाने का भी फैसला किया है। चट्टोपाध्याय ने कहा, आदिवासी लंबे समय से मान्यता की मांग कर रहे हैं। केंद्र ने उनके अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया है, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार अपना काम करेगी। भाजपा ने इस कदम को पंचायत चुनावों से पहले 'आदिवासियों को लुभाने का प्रयास' करार दिया। तिग्गा ने कहा, यह राज्य में पंचायत चुनाव से पहले आदिवासियों को मूर्ख बनाने का प्रयास है।
आदिवासी संगठन 'आदिवासी सेंगेल अभियान' ने पिछले साल रांची में धरना दिया था और मांग की थी कि सरना धर्म कोड को जनगणना के फॉर्म में एक अलग धर्म कॉलम दिया जाए।