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कौन हैं सीमा पाहूजा?: दिशा सालियान मामले की करेंगी निगरानी, हाथरस-गुड़िया जैसे चर्चित केस की कर चुकी हैं जांच
Wed, 16 Sep 2026 12:24 PM IST
सुनील मेहरोत्रा
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: सुनील मेहरोत्रा
Updated Wed, 16 Sep 2026 12:24 PM IST
सार
दिशा सालियान मामले की जांच सीबीआई की तेज-तर्रार अफसर सीमा पाहूजा करेंगी। सीमा पाहूजा ने कई हाई प्रोफाइल मामलों की जांच की है और बेहतरीन काम के लिए वे सम्मानित भी हो चुकी हैं।
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सीमा पाहूजा करेंगी दिशा सालियान मामले की जांच
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत की जांच अब सीबीआई की चर्चित अधिकारी सीमा पहुजा की निगरानी में होगी। सीबीआई मुख्यालय की स्पेशल क्राइम यूनिट में एसपी के पद पर तैनात सीमा पहुजा को इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ जांच अधिकारी के तौर पर डीएसपी पुरन कुमार और अन्य अधिकारी भी काम करेंगे। दिशा की मौत 8 जून 2020 को हुई थी। सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली है।
सीबीआई दर्ज करेगी बयान
सीबीआई अब दिशा की मौत से पहले मुंबई में उनके मंगेतर रोहन रॉय के घर हुई पार्टी में मौजूद लोगों के बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी पुराने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और अब तक हुई जांच की भी दोबारा पड़ताल करेगी। इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि घटना से पहले और बाद में क्या-क्या हुआ था और अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों में कोई अहम कड़ी छूटी तो नहीं है।
सीबीआई की तेज-तर्रार अफसर मानी जाती हैं सीमा पाहूजा
सीमा पहुजा का नाम सीबीआई के उन अधिकारियों में शामिल है, जिन्होंने देश के कई चर्चित और संवेदनशील मामलों की जांच में काम किया है। साल 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले की जांच में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उस मामले की समग्र निगरानी सीबीआई की अतिरिक्त निदेशक संपत मीणा कर रही थीं, जबकि सीमा पहुजा ने जमीनी स्तर पर जांच में अहम भूमिका निभाई थी।
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इससे पहले सीमा पहुजा हाथरस मामले की जांच करने वाली सीबीआई टीम का भी हिस्सा थीं। सितंबर 2020 में 19 वर्षीय युवती की मौत के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इस जांच में भी वरिष्ठ अधिकारी संपत मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जबकि सीमा पहुजा जांच टीम में शामिल थीं।
कई चर्चित मामलों की कर चुकी हैं जांच
सीमा पहुजा का सबसे चर्चित जांच कार्य हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के कोटखाई का 'गुड़िया' मामला माना जाता है। साल 2017 में 16 वर्षीय स्कूली छात्रा के बलात्कार और हत्या के इस मामले की शुरुआती जांच को लेकर कई सवाल उठे थे। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीमा पहुजा ने इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई थी। इस मामले में एक आरोपी को अदालत ने दोषी ठहराया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
उन्नाव बलात्कार मामले की सीबीआई जांच टीम से भी सीमा पहुजा का नाम जुड़ा रहा है। उस केस में विधायक कुलदीप सेंगर को आजीवन कारावास की सजा हुई है।उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्नाव और हाथरस दोनों मामलों में संपत मीणा की वरिष्ठ स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका थी और सीमा पहुजा ने जांच टीम के साथ काम किया था।
बेहतरीन काम के लिए हो चुकी हैं सम्मानित
बेहतरीन इन्वेस्टीगेशन और उत्कृष्ट कार्य के लिए सीमा पहुजा को राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। गृह मंत्रालय की 2021 की पदक सूची में भी उनका नाम दर्ज है। सीबीआई में सीमा पहुजा को जटिल आपराधिक मामलों की जांच के अनुभव वाले अधिकारियों में गिना जाता है। आरजी कर, हाथरस और कोटखाई जैसे मामलों में काम करने के अनुभव को देखते हुए अब दिशा सालियान मामले में भी पुराने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों की नए सिरे से जांच अहम होगी।
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सीबीआई दर्ज करेगी बयान
सीबीआई अब दिशा की मौत से पहले मुंबई में उनके मंगेतर रोहन रॉय के घर हुई पार्टी में मौजूद लोगों के बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी पुराने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों और अब तक हुई जांच की भी दोबारा पड़ताल करेगी। इस दौरान यह भी देखा जाएगा कि घटना से पहले और बाद में क्या-क्या हुआ था और अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों में कोई अहम कड़ी छूटी तो नहीं है।
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सीबीआई की तेज-तर्रार अफसर मानी जाती हैं सीमा पाहूजा
सीमा पहुजा का नाम सीबीआई के उन अधिकारियों में शामिल है, जिन्होंने देश के कई चर्चित और संवेदनशील मामलों की जांच में काम किया है। साल 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या के मामले की जांच में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उस मामले की समग्र निगरानी सीबीआई की अतिरिक्त निदेशक संपत मीणा कर रही थीं, जबकि सीमा पहुजा ने जमीनी स्तर पर जांच में अहम भूमिका निभाई थी।
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इससे पहले सीमा पहुजा हाथरस मामले की जांच करने वाली सीबीआई टीम का भी हिस्सा थीं। सितंबर 2020 में 19 वर्षीय युवती की मौत के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इस जांच में भी वरिष्ठ अधिकारी संपत मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जबकि सीमा पहुजा जांच टीम में शामिल थीं।
कई चर्चित मामलों की कर चुकी हैं जांच
सीमा पहुजा का सबसे चर्चित जांच कार्य हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के कोटखाई का 'गुड़िया' मामला माना जाता है। साल 2017 में 16 वर्षीय स्कूली छात्रा के बलात्कार और हत्या के इस मामले की शुरुआती जांच को लेकर कई सवाल उठे थे। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया। सीमा पहुजा ने इस मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई थी। इस मामले में एक आरोपी को अदालत ने दोषी ठहराया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
उन्नाव बलात्कार मामले की सीबीआई जांच टीम से भी सीमा पहुजा का नाम जुड़ा रहा है। उस केस में विधायक कुलदीप सेंगर को आजीवन कारावास की सजा हुई है।उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्नाव और हाथरस दोनों मामलों में संपत मीणा की वरिष्ठ स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका थी और सीमा पहुजा ने जांच टीम के साथ काम किया था।
बेहतरीन काम के लिए हो चुकी हैं सम्मानित
बेहतरीन इन्वेस्टीगेशन और उत्कृष्ट कार्य के लिए सीमा पहुजा को राष्ट्रपति पुलिस पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है। गृह मंत्रालय की 2021 की पदक सूची में भी उनका नाम दर्ज है। सीबीआई में सीमा पहुजा को जटिल आपराधिक मामलों की जांच के अनुभव वाले अधिकारियों में गिना जाता है। आरजी कर, हाथरस और कोटखाई जैसे मामलों में काम करने के अनुभव को देखते हुए अब दिशा सालियान मामले में भी पुराने रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों की नए सिरे से जांच अहम होगी।