{"_id":"6abbbbded1bd4eb61f0dc423","slug":"tmc-cec-gyanesh-kumar-audio-recording-sir-controversy-election-commission-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसआईआर विवाद: टीएमसी जारी करेगी सीईसी संग बैठक की ऑडियो रिकॉर्डिंग! क्या बढ़ेंगी ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एसआईआर विवाद: टीएमसी जारी करेगी सीईसी संग बैठक की ऑडियो रिकॉर्डिंग! क्या बढ़ेंगी ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें?
Tue, 29 Sep 2026 07:38 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 29 Sep 2026 07:38 PM IST
सार
टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई 3 बैठकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग अगले हफ्ते जारी करने पर विचार कर रही है, जिससे कि यह साफ हो सके कि बातचीत के दौरान चुनाव आयोग का रवैया कैसा था?
विज्ञापन
एसआईआर विवाद: टीएमसी जारी करेगी सीईसी संग बैठक की ऑडियो रिकॉर्डिंग
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
एसआईआर को लेकर विवादों में घिरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सीईसी की बैठकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग तृणमूल कांग्रेस पार्टी जारी करने का मन बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन रिकॉर्डिंग्स को अगले हफ्ते जारी किया जा सकता है। इसका मकसद यह दिखाना है कि चुनाव आयोग के साथ बैठकों के दौरान कुमार ने राजनीतिक दलों के साथ किस तरह बातचीत की थी। इसमें चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी बातों और प्रक्रियाओं पर भी चर्चा शामिल थी।
ये भी पढे़ं: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर घेराबंदी: आप-डीएमके भी विपक्ष के साथ, संसद में तीसरी बार आएगा हटाने का नोटिस?
क्या है रिकॉर्डिंग्स में?
सूत्रों ने बताया कि टीएमसी के पास तीन बैठकों की रिकॉर्डिंग है। इसमें दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कार्यवाही के दौरान बहुत कम समय के लिए बात की। उन्होंने बताया कि इन रिकॉर्डिंग्स में यह भी पता चलेगा कि टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से किस तरह के सवाल पूछे और आयोग ने क्या जवाब दिया।
विज्ञापन
टीएमसी ने क्या आरोप लगाए?
टीएमसी ने चुनाव आयोग पर लगातार पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विरोधी दावों पर चल रही सुनवाई में पक्षपाती रवैया अपनाने का आरोप लगाती रही है। चुनाव आयोग के सामने यह विवाद तब आया जब रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मौजूदा पार्टी संगठन पर अधिकार को चुनौती दी और टीएमसी पर नियंत्रण का दावा किया। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने रितब्रत के इस दावे को खारिज कर दिया। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने पहले भी यह रिकॉर्डिंग जारी करने पर विचार किया था, लेकिन उस समय ऐसा न करने का फैसला किया गया था। यह कदम चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर हाल ही में हुए एक नए विवाद की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है।
रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर उन फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी, जो वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और बहाल करने तथा वोटर लिस्ट के डेटा को संभालने से संबंधित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि संधू और जोशी ने उन फैसलों पर आपत्ति जताई थी जो उनकी सहमति के बिना लिए गए थे। रिपोर्ट में कुछ बातचीत और कदम को 'अनधिकृत' और 'गैर-कानूनी' भी बताया गया था।
पार्टी अभी क्यों उठा रही कदम?
पार्टी द्वारा रिकॉर्डिंग जारी करने पर विचार करने का यह कदम अप्रैल में पार्टी और चुनाव आयोग के बीच हुई तीखी बहस के कुछ महीनों बाद उठाया जा रहा है। 8 अप्रैल को, टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात की थी। बैठक के बाद, राज्यसभा सांसद और पार्टी के संयुक्त सचिव डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया था कि सात मिनट की बातचीत के आखिर में ज्ञानेश कुमार ने प्रतिनिधिमंडल से चले जाने को कहा था।
ये भी पढे़ं: यूपी: फ्लीट कार्ड के जरिये बड़ा फर्जीवाड़ा, 1.05 करोड़ का किया गबन; आईओसीएल के फील्ड ऑफिसर समेत दस पर एफआईआर
चुनाव आयोग ने दी थी सफाई
हालांकि, टीएमसी नेता के आरोप के बाद चुनाव आयोग ने सफाई भी दी थी। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्त ने टीएमसी नेताओं से साफ-साफ बातचीत की थी। इसके साथ ही आयोग ने टीएमसी नेता ओ'ब्रायन पर चुनाव आयुक्तों पर चिल्लाने और सीईसी को न बोलने के लिए कहने का आरोप भी लगाया था। इसके बाद ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग को बैठक की रिकॉर्डिंग या ट्रांसक्रिप्ट जारी करने की चुनौती दी थी।
विज्ञापन
ये भी पढे़ं: सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर घेराबंदी: आप-डीएमके भी विपक्ष के साथ, संसद में तीसरी बार आएगा हटाने का नोटिस?
विज्ञापन
क्या है रिकॉर्डिंग्स में?
सूत्रों ने बताया कि टीएमसी के पास तीन बैठकों की रिकॉर्डिंग है। इसमें दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कार्यवाही के दौरान बहुत कम समय के लिए बात की। उन्होंने बताया कि इन रिकॉर्डिंग्स में यह भी पता चलेगा कि टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से किस तरह के सवाल पूछे और आयोग ने क्या जवाब दिया।
विज्ञापन
टीएमसी ने क्या आरोप लगाए?
टीएमसी ने चुनाव आयोग पर लगातार पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विरोधी दावों पर चल रही सुनवाई में पक्षपाती रवैया अपनाने का आरोप लगाती रही है। चुनाव आयोग के सामने यह विवाद तब आया जब रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने मौजूदा पार्टी संगठन पर अधिकार को चुनौती दी और टीएमसी पर नियंत्रण का दावा किया। हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने रितब्रत के इस दावे को खारिज कर दिया। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने पहले भी यह रिकॉर्डिंग जारी करने पर विचार किया था, लेकिन उस समय ऐसा न करने का फैसला किया गया था। यह कदम चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर हाल ही में हुए एक नए विवाद की पृष्ठभूमि में उठाया जा रहा है।
रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?
'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर उन फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी, जो वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और बहाल करने तथा वोटर लिस्ट के डेटा को संभालने से संबंधित थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि संधू और जोशी ने उन फैसलों पर आपत्ति जताई थी जो उनकी सहमति के बिना लिए गए थे। रिपोर्ट में कुछ बातचीत और कदम को 'अनधिकृत' और 'गैर-कानूनी' भी बताया गया था।
पार्टी अभी क्यों उठा रही कदम?
पार्टी द्वारा रिकॉर्डिंग जारी करने पर विचार करने का यह कदम अप्रैल में पार्टी और चुनाव आयोग के बीच हुई तीखी बहस के कुछ महीनों बाद उठाया जा रहा है। 8 अप्रैल को, टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात की थी। बैठक के बाद, राज्यसभा सांसद और पार्टी के संयुक्त सचिव डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया था कि सात मिनट की बातचीत के आखिर में ज्ञानेश कुमार ने प्रतिनिधिमंडल से चले जाने को कहा था।
ये भी पढे़ं: यूपी: फ्लीट कार्ड के जरिये बड़ा फर्जीवाड़ा, 1.05 करोड़ का किया गबन; आईओसीएल के फील्ड ऑफिसर समेत दस पर एफआईआर
चुनाव आयोग ने दी थी सफाई
हालांकि, टीएमसी नेता के आरोप के बाद चुनाव आयोग ने सफाई भी दी थी। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्त ने टीएमसी नेताओं से साफ-साफ बातचीत की थी। इसके साथ ही आयोग ने टीएमसी नेता ओ'ब्रायन पर चुनाव आयुक्तों पर चिल्लाने और सीईसी को न बोलने के लिए कहने का आरोप भी लगाया था। इसके बाद ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग को बैठक की रिकॉर्डिंग या ट्रांसक्रिप्ट जारी करने की चुनौती दी थी।