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शास्त्र अनुमति दें तो गहनों की प्रदर्शनी करेंगे: तिरुमाला तिरुपति

Mon, 21 May 2018 04:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विजयवाडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, विजयवाडा Updated Mon, 21 May 2018 04:13 PM IST
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Tirumala Tirupati Devasthanams says If shastras allow then will exhibit jewels
तिरुपति बालाजी
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) और पूर्व मुख्य पुजारी एवी रमणा दीक्षितुलु के बीच चल रहे विवाद ने रविवार को एक नया मोड़ ले लिया। टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंघल ने घोषणा की कि अगर अगम शास्त्र इसकी अनुमति दें तो मंदिर प्रबंधन जवाहरात के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए तैयार है ताकि इसकी सुरक्षा को लेकर सभी संदेह मिट जाएं। सिंघल ने यह बयान दिया है जबकि दीक्षितुलु पिछले 22 वर्षों में कथित रूप से गायब होने वाले कीमती पत्थरों और गहनों की सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं। 
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सिंघल ने मीडिया से कहा कि अगर अगम शास्त्र मंदिर के आभूषणों के सार्वजनिक प्रदर्शन की अनुमति नहीं देते हैं, तो टीटीडी उन्हें 3डी प्रारूप में डिजिटाइज करेगा और उनकी तस्वीरों को जनता के लिए एक संग्रहालय में रखेगी। उन्होंने कहा, "यह मेरी व्यक्तिगत राय है। अधिकारियों और उच्च पदस्थ लोगों को इस पर विचार करना चाहिए।" 
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कुछ दिनों पहले दीक्षितुलु के आरोप लगाया था कि टीटीडी के गहने वाली रजिस्टर में दर्ज रूबी गायब है और वैसा ही एक मूल्यवान पत्थर जिनेवा में हुई नीलामी में आया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंघल ने अपना जवाब दोहराया, "टीटीडी कर्मचारी सभी चीजों को सुरक्षित रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और इस तरह के आरोपों का वास्तव में तकलीफदेह हैं।" 
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पूर्व मुख्य पुजारी जिस रूबी का जिक्र कर रहे हैं वह 2001 में ब्रह्मोत्सवम गरुड़ सेवा के दौरान कथित तौर पर टूट गया था। सिंघल ने कहा, जस्टिस जगन्नाथ राव कमिटि ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस बेशकीमती पत्थर के टूटे हुए टुकड़े मंदिर के पेशकार के संरक्षण में हैं। इस गहने को मैसूर के महाराजा ने 1945 में दान किया था और इस रूबी का मूल्य 500 करोड़ रुपये आंका गया था। 

उन्होंने कहा कि, टीटीडी के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी आईवाईआर कृष्ण राव ने भी राज्य सरकार को 2010 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि टूटे हुए टुकड़े 'गुलाबी हीरे' के नहीं बल्कि रूबी के थे। 

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अर्चक की सेवानिवृति की उम्र 65 साल है, जिसे 2012 में सरकार आदेश के बाद तय किया गया था। 

इस बीच, दीक्षितुलु ने हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जहां उन्होंने आरोप लगाया कि 1996 में मिरासी व्यवस्था के खत्म समाप्त होने के बाद, गहनों का नियंत्रण अर्चक से टीटीडी के पास चला गया। उन्होंने कहा, "तब से, गहने की कोई सुरक्षा नहीं है।" उन्होंने पूछा, "रूबी एक बड़ी सी प्लैटिनम की चेन के अंदर थी और रिकॉर्ड के मुताबिक गरुड़ सेवा के दौरान मूर्ति पर फेंक जाने वाले सिक्कों की वजह से रूबी टूट गई थी। क्या ऐसी कोई घटना हुई है?" 


दीक्षितुलु ने यह जानना चाहा कि पुराने गहने मौजूद होने के बावजूद नए गहनों को क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे हटा दिया गया क्योंकि मैंने अनियमितताओं पर सवाल उठाया था। अगर मैंने गलतियां की तो मुझे दंडित किया जाना चाहिए।" 
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