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टाइगर जिंदा है: गुजरात में 27 साल बाद दिखा बाघ, प्रशासन ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन
Sun, 10 Feb 2019 10:35 AM IST
Shani Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: Shani Mishra
Updated Sun, 10 Feb 2019 10:35 AM IST
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tiger
- फोटो : social media
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साल 1992 में सीमावर्ती इलाके में बाघ दिखने के बाद अब फिर से गुजरात में बाघ की मौजूदगी की तस्वीर सामने आई है। गिर के शेर की तस्वीरें अक्सर सामने आती रहती हैं मगर 27 साल के बाद यह पहला वाक्या है जब किसी बाघ के मौजूदगी की तस्दीक हुई है। महिसागर के एक स्कूल में शिक्षक महेश महेरा ने 6 फरवरी को बोरिया गांव से गुजरते वक्त एक बाघ को अपनी गाड़ी के पास देखा था। स्थानीय लोगों ने यहां पहले भी बाघ देखने की बात कही थी। बाघ की तस्वीर को महेश ने अपने फोन के कैमरे में कैद कर लिया था, जो कि बाद में वन विभाग के अधिकारियों के साथ साझा की गई।
टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में महेश महेरा ने कहा कि मैंने शनिवार रात स्कूल से लौटते वक्त इस बाघ को अपनी कार के पास से गुजरते देखा था। मुझे पहले विश्वास नहीं हुआ कि मैं उसे अपनी कार से सिर्फ 40 फीट की दूरी पर देख रहा हूं, लेकिन चूंकि मैंने स्थानीय लोगों से इस इलाके में बाघ की मौजूदगी की बात सुनी थी, ऐसे में उसकी फोटो खींच ली।
इस घटना के बाद अब वन विभाग के अधिकारी सक्रीय हो चुके हैं और बाघ की तलाश में बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।
फोटो की होगी जांच, पुष्टि को लगे कैमरे
प्रिंसिपल चीफ फॉरेस्ट कंजर्वेटर अक्षय सक्सेना ने स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों को बाघ की तलाश करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने महेश महेरा द्वारा खींची फोटोज की सत्यता की जांच करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि हम बाघ के पैरों के निशान और उसकी मौजूदगी की जांच करा रहे हैं। तीन नाईट विजन कैमरे लगाए गए हैं, जल्द ही और भी लगाए जाएंगे। बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने पर कार्य योजना बनाकर इस दिशा में काम किया जाएगा।
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पिछली बार बाघ देखने की घटना तब सुर्खियां बनी थी जब पिछले साल जुलाई में तापी जिले के नीझर गांव से 15 किमी दूर कुछ स्थानीय लोगों ने बाघ देखने का दावा किया था। महिसागर के डिप्टी फॉरेस्ट कंजर्वेटर ने कहा कि आर एम परमार ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने लुनावड़ा के विराना और संतरामपुर में चार बकरियां और एक बैल के मारे जाने की बात कही है। हम सभी चीजों की जांच कर रहे हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में महेश महेरा ने कहा कि मैंने शनिवार रात स्कूल से लौटते वक्त इस बाघ को अपनी कार के पास से गुजरते देखा था। मुझे पहले विश्वास नहीं हुआ कि मैं उसे अपनी कार से सिर्फ 40 फीट की दूरी पर देख रहा हूं, लेकिन चूंकि मैंने स्थानीय लोगों से इस इलाके में बाघ की मौजूदगी की बात सुनी थी, ऐसे में उसकी फोटो खींच ली।
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इस घटना के बाद अब वन विभाग के अधिकारी सक्रीय हो चुके हैं और बाघ की तलाश में बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।
फोटो की होगी जांच, पुष्टि को लगे कैमरे
प्रिंसिपल चीफ फॉरेस्ट कंजर्वेटर अक्षय सक्सेना ने स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों को बाघ की तलाश करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने महेश महेरा द्वारा खींची फोटोज की सत्यता की जांच करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि हम बाघ के पैरों के निशान और उसकी मौजूदगी की जांच करा रहे हैं। तीन नाईट विजन कैमरे लगाए गए हैं, जल्द ही और भी लगाए जाएंगे। बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने पर कार्य योजना बनाकर इस दिशा में काम किया जाएगा।
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पिछली बार बाघ देखने की घटना तब सुर्खियां बनी थी जब पिछले साल जुलाई में तापी जिले के नीझर गांव से 15 किमी दूर कुछ स्थानीय लोगों ने बाघ देखने का दावा किया था। महिसागर के डिप्टी फॉरेस्ट कंजर्वेटर ने कहा कि आर एम परमार ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने लुनावड़ा के विराना और संतरामपुर में चार बकरियां और एक बैल के मारे जाने की बात कही है। हम सभी चीजों की जांच कर रहे हैं।