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Arunachal Pradesh: रोशन हुए गांव, बजीं फोन की घंटियां, चीन सीमा से सटे तीन गांवों की तस्वीर नौ माह में बदली

Sun, 17 Dec 2023 01:38 PM IST
जलज मिश्रा एन. अर्जुन, ईटानगर
एन. अर्जुन, ईटानगर Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 17 Dec 2023 01:38 PM IST
सार

किबिथू, काहो और मेशाई में बैडमिंटन, वॉलीबॉल और बास्केटवॉल कोर्ट बनकर तैयार हैं। शाम को यहां पर भारतीय सेना के मार्गदर्शन में युवा अभ्यास करते हैं। यहां बैडिमंटन खेल रहे आकाश मेयोर कहते हैं, हम लोग यहां तैयारी करते हैं। निश्चित ही एक दिन हमारे गांव से भी खिलाड़ी निकलेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।

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three villages of Arunachal Pradesh bordering China changed in nine months
अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर गांवों का हुआ कायाकल्प। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (वीवीपी) के तहत केंद्र सरकार ने भारत-चीन सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले के तीन गांवों काहो, किबिथू और मेशाई का चयन किया था। केंद्र सरकार, अरुणाचल सरकार और भारतीय सेना के प्रयासों से केवल नौ महीनों में ही तीनों गांवों में ऐतिहासिक बदलाव आए हैं। गांवों का पूरी तरह से कायाकल्प हुआ और इनकी तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। स्कूलों के भवन बेहतर हुए हैं। पानी की सुविधा बेहतर हुई है। गांवों में 24 घंटे बिजली आ रही है और साथ ही फोन की घंटियां भी बज रही हैं। संवददाता एन. अर्जुन ने सीमा पर बसे गांवों का दौरा कर वहां के लोगों से जाना क्या बदलाव उनके गांव और जीवन में आए...

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बैडमिंटन और वॉलीबॉल कोर्ट
किबिथू, काहो और मेशाई में बैडमिंटन, वॉलीबॉल और बास्केटवॉल कोर्ट बनकर तैयार हैं। शाम को यहां पर भारतीय सेना के मार्गदर्शन में युवा अभ्यास करते हैं। यहां बैडिमंटन खेल रहे आकाश मेयोर कहते हैं, हम लोग यहां तैयारी करते हैं। निश्चित ही एक दिन हमारे गांव से भी खिलाड़ी निकलेंगे और देश का नाम रोशन करेंगे।

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हर घर जल
प्रथम गांव काहो के मेयोर परिषद के उपाध्यक्ष कुंचक कहते हैं कि अब हमारे गांव में चौबीस घंटे बिजली आती है। जल जीवन मिशन के तहत हमारे गांव के हर घर में पानी आता है।

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मोबाइल टावर
वॉलोंग और कीबिथु सर्किल के सभी गांवों में मोबाइल टावर लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। किबिथू और वॉलोंग में तो मोबाइल की घंटियां भी बजने लगी हैं।

2014 के बाद बहने लगी बदलाव की बयार
काहो गांव के कुंचलश्री मेयोर और किबिथू गांव के हेमराज कहते हैं, एक समय था जब हमारे गांवों में सड़कें नहीं थीं, बिजली नहीं थी। 2014 के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और अरुणाचल प्रदेश की पेमा खांडू सरकार ने इस ओर ध्यान दिया। हमारे गांव को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के अंतर्गत चुने गए। इसी का नतीजा है कि आज यहां विकास की बयार बह रही है। आज हमारे गांव में बिजली है, सड़कों का जाल बिछ रहा है, हर घर जल है, रोशनी है और फोन की घंटियां बज रही हैं।



खुले पुस्तकालय और शिक्षकों के लिए आवास
किबिथू, काहो और मेशाई में प्राथमिक और मीडिल स्कूलों का कायाकल्प किया गया है। पुस्तकालय बने। किबिथू स्कूल की अध्यापिका रोसांग कहती हैं, यहां पर आठवीं तक स्कूल है, जबकि काहो में प्राइमरी स्कूल है। जिन गांवों में अध्यापकों के रहने की दिक्कत हो रही थी, वहां पर अब अध्यापकों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं।

गांव लौटने लगे युवा
गांवों में मधुमक्खी पालन, पर्यटन को बढ़ावा और गांव में ही रोजगार के साधनों को विकसित करने पर जोर देने से गांव से छोड़कर गए युवा यहां पर लौटने लगे हैं। अभी भले ही इसकी संख्या कम हो, लेकिन शुरुआत हो गई है।

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