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सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस केएम जोसेफ सहित तीनों जजों ने ली शपथ, सिब्बल बोले- इतिहास का काला दिन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 07 Aug 2018 02:44 PM IST
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KM Joseph
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न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरण और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ ले ली है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने अपने न्यायालय कक्ष में एक साधारण समारोह में तीनों न्यायाधीशों को शपथ दिलाई।
बता दें कि जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में वरीयता घटाने पर पैदा हुए विवाद पर सरकार ने कहा था कि हाईकोर्ट के जजों की वरीयता के सिद्धांत के आधार पर यह फैसला लिया गया। इसलिए जस्टिस जोसेफ, इंदिरा बनर्जी और विनीत सरन का शपथ ग्रहण तय कार्यक्रम व केंद्र की अधिसूचना में दिए वरीयता क्रम के मुताबिक मंगलवार को ही होगा।
इससे पहले सोमवार को कॉलेजियम के सदस्य जस्टिस एमबी लोकुर, एके सीकरी और कुरियन जोसेफ समेत कई जजों की ओर से सीजेआई दीपक मिश्रा के समक्ष वरिष्ठता क्रम को लेकर चिंता जताई गई। जस्टिस रंजन गोगोई को छोड़कर कॉलेजियम के बाकी सदस्यों ने चाय के दौरान सीजेआई से जस्टिस जोसेफ की वरीयता घटाने के केंद्र के फैसले का विरोध किया। सीजेआई ने उन्हें भरोसा भी दिलाया कि वह मामले को उठाएंगे।
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लोकसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सांसद के. वेणुगोपाल ने जस्टिस जोसेफ का नाम लिए बिना सरकार को घेरते हुए कहा था कि केंद्र न्यायपालिका में हर नियुक्ति मनमर्जी से करना चाहता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने जस्टिस केएम जोसेफ का पद घटाने को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने इसके लिए सरकार पर भी निशाना साधा है। साथ ही कहा कि आज अदालत के इतिहास में काला दिन है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपनी आत्मा के खोज करने जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने संदेश दिया है कि यदि कोई न्यायाधीश आपके पक्ष में कोई निर्णय नहीं लेता है तो उसका इलाज भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के इतिहास में इस दिन को काले दिन के रूप में देखा जाएगा। सिब्बल ने कहा कि यह सरकार का अहंकार है।
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बता दें कि जस्टिस केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में वरीयता घटाने पर पैदा हुए विवाद पर सरकार ने कहा था कि हाईकोर्ट के जजों की वरीयता के सिद्धांत के आधार पर यह फैसला लिया गया। इसलिए जस्टिस जोसेफ, इंदिरा बनर्जी और विनीत सरन का शपथ ग्रहण तय कार्यक्रम व केंद्र की अधिसूचना में दिए वरीयता क्रम के मुताबिक मंगलवार को ही होगा।
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इससे पहले सोमवार को कॉलेजियम के सदस्य जस्टिस एमबी लोकुर, एके सीकरी और कुरियन जोसेफ समेत कई जजों की ओर से सीजेआई दीपक मिश्रा के समक्ष वरिष्ठता क्रम को लेकर चिंता जताई गई। जस्टिस रंजन गोगोई को छोड़कर कॉलेजियम के बाकी सदस्यों ने चाय के दौरान सीजेआई से जस्टिस जोसेफ की वरीयता घटाने के केंद्र के फैसले का विरोध किया। सीजेआई ने उन्हें भरोसा भी दिलाया कि वह मामले को उठाएंगे।
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लोकसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सांसद के. वेणुगोपाल ने जस्टिस जोसेफ का नाम लिए बिना सरकार को घेरते हुए कहा था कि केंद्र न्यायपालिका में हर नियुक्ति मनमर्जी से करना चाहता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने जस्टिस केएम जोसेफ का पद घटाने को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने इसके लिए सरकार पर भी निशाना साधा है। साथ ही कहा कि आज अदालत के इतिहास में काला दिन है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को अपनी आत्मा के खोज करने जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने संदेश दिया है कि यदि कोई न्यायाधीश आपके पक्ष में कोई निर्णय नहीं लेता है तो उसका इलाज भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के इतिहास में इस दिन को काले दिन के रूप में देखा जाएगा। सिब्बल ने कहा कि यह सरकार का अहंकार है।