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एक राष्ट्र-एक चुनाव पर इंदिरा की राह पकड़ेगी कांग्रेस? आसान नहीं मोदी 2.0 का ये मास्टर स्ट्रोक

Tue, 18 Jun 2019 11:42 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Tue, 18 Jun 2019 11:42 PM IST
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This master stroke is not easy to Modi 2.0
लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल यानी 2.0 की पिच पर 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' का मुद्दा उछाल दिया है।मोदी इस मुद्दे पर मास्टर स्ट्रोक लगाना चाहते हैं।
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'एक राष्ट्र-एक चुनाव' की पिच पर कोई बाधा न आए, इसके लिए पीएम मोदी ने बुधवार को सभी दलों के प्रमुखों की बैठक बुलाई है।कांग्रेस का रुख बता रहा है कि वह 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के मामले में मोदी को इतनी आसानी से मास्टर स्ट्रोक नहीं लगाने देगी।
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इस मुद्दे पर कांग्रेस इंदिरा गांधी की राह पकड़ेगी।1952, 1957, 1962, 1967 में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए थे।इंदिरा गांधी ने 1971 में लोकसभा का मध्यावधि चुनाव करा दिया।इसके बाद 1980, 1984, 1991, 1998, 1999 में भी लोकसभा को तय समय से पहले ही भंग कर दिया गया।
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मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में ही 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' का एजेंडा तैयार कर लिया था...

भले ही पीएम मोदी ने 19 जून को 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को आमंत्रित किया है, लेकिन वे अपना एजेंडा तैयार कर चुके हैं।लॉ कमीशन की रिपोर्ट पिछले साल आ गई थी।

उसमें भी इस एजेंडे को गलत नहीं कहा गया है।आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उन सब बातों का जिक्र किया है, जिससे मोदी सरकार के इस एजेंडे को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।कितनी नई ईवीएम और पेपर ट्रेल मशीनों की जरुरत होगी, मतदान केन्द्रों की संख्या, सुरक्षा बल एवं अन्य स्टाफ, इन सब बातों पर गौर कर लिया गया था।

चुनाव आयोग का कहना था कि यदि एक साथ चुनाव कराये जाते हैं तो 12.9 लाख मतपत्र इकाइयों, 9.4 लाख नियंत्रण इकाइयों और लगभग 12.3 लाख वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का इंतजाम करना होगा। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), जिसमें एक नियंत्रण इकाई (सीयू), एक मतपत्र इकाई (बीयू) और एक वीवीपैट होगा, इसकी कुल लागत 33,200 रुपये बताई गई थी।

ईवीएम की खरीद पर लगभग 4,555 करोड़ रुपये खर्च होंगे।विधि आयोग के मुताबिक, एक ईवीएम मशीन 15 साल तक काम कर सकती है।इस आधार पर यदि 2024 में भी एक साथ चुनाव होते हैं तो 1751.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

अगर 2029 में भी एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो उसके लिए ईवीएम मशीनों की खरीद पर 2017.93 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा।2034 में 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' व्यवस्था लागू रहती है तो ईवीएम खरीद के लिए 13,981.58 करोड़ रुपये जुटाने होंगे।

 

मोदी को 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' का श्रेय इतनी आसानी से नहीं लेने देगी कांग्रेस...

This master stroke is not easy to Modi 2.0
राहुल गांधी-प्रियंका गांधी वाड्रा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

पिछले साल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस मुद्दे पर जब विधि आयोग में पत्र के द्वारा अपना पक्ष रखा तो कांग्रेस ने पीएम मोदी को ये चुनौती दी थी कि वे ऐसा करना चाहते हैं तो लोकसभा को समय से पहले भंग करने का साहस दिखाएं।

शाह ने विधि आयोग को जो पत्र लिखा था, कांग्रेस नेता अशोक गहलौत ने उसे 'नाटक' बताया था।उनका कहना था कि मोदी-शाह का यह एजेंडा राजनीतिक फ़ायदा लेने का एक स्टंट है। भाजपा अपनी संभावित हार के डर से यह नाटक कर रही है।

गहलोत ने कहा था, 'भाजपा चाहे तो राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्य, जहां विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, उनके साथ लोकसभा चुनाव करवा कर देख लें।बता दें कि जिस वक्त कांग्रेस की ओर से ये बयान आ रहे थे, तब उसे उम्मीद थी कि वह लोकसभा में वह अच्छा प्रदर्शन करेगी।

अब स्थिति बदल चुकी है।कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि मौजूदा समय में 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' की अवधारणा मोदी के पक्ष में है, इसलिए वे इस पर चर्चा करने की जल्दबाजी दिखा रहे हैं।कांग्रेस पार्टी इसमें कई तरह के संशोधनों की पक्षधर है।

संशोधन भी बहुमत के आधार पर नहीं, बल्कि सभी दलों की आपसी सहमति पर आधारित हों।यह गौर करना जरुरी है कि कांग्रेस पार्टी ने 1971 के अलावा 1984 में भी लोकसभा को एक साल पहले ही भंग कर दिया था।

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