वोटिंग के समय किसानों की कर्जमाफी नहीं, यह मुद्दा लोगों की प्राथमिकता में सबसे ऊपर
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किसानों की कर्जमाफी इस समय सबसे कारगर चुनाव जिताऊ फैक्टर माना जा रहा है। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल इस समय स्वयं को सबसे ज्यादा किसान हितैषी साबित करने पर तुले हुए हैं। लेकिन एक सर्वे में यह बात निकल कर सामने आई है कि मतदाताओं के लिए किसानों की कर्जमाफी सबसे बड़ा मुद्दा नहीं है। जब मतदाताओं से यह पूछा गया कि उनके लिए सबसे अहम मुद्दा क्या है और वे वोटिंग करते समय किस सबसे प्रमुख मुद्दे पर वोटिंग करेंगे तो उन्होंने नौकरी को इसमें सबसे ऊपर बताया। यह ट्रेंड ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक समान था।
सर्वे में शामिल लोगों के जवाब से यह बात स्पष्ट रुप से सामने आई थी कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने भी सबसे ज्यादा (59 फीसदी) रोजगार को ही अपनी प्राथमिकता बताया था। शहरी क्षेत्र के लोगों में भी रोजगार को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने की बात कही। यहां 70 फीसदी लोगों ने रोजगार को प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखा। सर्वे में यह बात थोड़ी आश्चर्यजनक अवश्य रही कि ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं के लिए भी कर्जमाफी पहले तो क्या दूसरे नंबर पर भी नहीं रही।
ग्रामीण मतदाताओं के लिए महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा
ग्रामीण मतदाताओं ने रोजगार के बाद महंगाई को अपने वोटिंग का दूसरा सबसे बड़ा कारण बताया जबकि उनके लिए कृषि से जुड़े विषय तीसरे नंबर पर थे। शहरी क्षेत्र के मतदाताओं ने रोजगार के बाद जिस मुद्दे को वोटिंग का सबसे बड़ा कारण बताया वह स्वास्थ्य (45 फीसदी) रहा जबकि तीसरे नंबर पर उनके लिए कानून-व्यवस्था (41 फीसदी) अहम मुद्दा थी।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने इसी साल अगस्त से नवंबर में मध्यप्रदेश में एक सर्वे किया था। सर्वे में 15 हजार से अधिक लोगों से ये सवाल किये गए थे। सर्वे में शामिल लोगों में 70 फीसदी ग्रामीण, 30 फीसदी शहरी, 54 फीसदी सामान्य वर्ग, 13 फीसदी ओबीसी, 19 फीसदी एससी और 15 फीसदी एसटी समाज के लोग शामिल थे। सामान्य तौर पर पूरे मध्यप्रदेश में इसी तरह की सामाजिक संरचना है।