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ट्रंप ने इस फायदे के लिए ईरान से शुरू किया तनाव, भारत में मोदी सरकार के लिए यू-टर्न होगा युद्ध

Tue, 07 Jan 2020 07:01 PM IST
Rama Solanki रमा सोलंकी
Updated Tue, 07 Jan 2020 07:01 PM IST
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सार
भारत को अमेरिका और ईरान के बीच निभानी चाहिए अहम भूमिका- तलमीज अहमद
'इस्लामिक देशों पर लड़ाई का पड़ेगा बड़ा असर'
कोई देश जंग नहीं चाहता- तलमीज अहमद
'डॉनल्ड ट्रम्प ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए उठाया ये कदम'
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This is the reason behind UN- Iran tension; war will be an u-turn for Modi govt
ट्रंप ने इस फायदे के लिए ईरान से शुरू किया तनाव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच तल्खी कोई नई बात नहीं है। हाल में ईरान के सैन्य अफसर सुलेमानी की अमेरिका द्वारा हत्या किए जाने के बाद से यह तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के नाम पर पहले से ही कई आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। अब सुलेमानी की हत्या के बाद ईरान ने अमेरिका से बदला लेने और दुनियाभर में अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने की बात कही है। इस क्षेत्र में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। कुछ लोगों के अनुसार, तीसरे विश्वयुद्ध की आहट आने लगी है। इस मसले पर अमर उजाला ने खाड़ी मामलों के विशेषज्ञ तलमीज अहमद से खास बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश: 



अमर उजाला: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की असल वजह क्या है?
अमेरिका के हवाई हमले में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत ईरान के लिए बड़ा हादसा है। असल वजह के लिए आपको 1979 तक जाना पड़ेगा। वहां जब रिवॉल्यूशन हुआ तो अमेरिकन दूतावास के अधिकारी 444 दिन तक बंधक रहे। ईरान का पक्ष देखें तो इनकी शिकायत 100 साल पुरानी है। ईरान में अमेरिका और ब्रिटेन जब कॉलोनियन पावर में थे तो उनका आर्थिक और अन्य तरह से शोषण किया था। 


अमर उजाला: अगर ये युद्ध होता है तो इस्लामिक देशों का रुख कैसा रहेगा?
मेरी समझ में 40 या 50 मुस्लिम देश हैं। इतिहास में एक दफा 1400-1500 साल में ऐसा नहीं हुआ कि सारे मुस्लिम देश एक ही राय के हों और एक ही तरफ से वो काम करें। अब बात रही मुख्य देशों की तो सबके अलग-अलग विचार हैं। सऊदी अरब ईरान को लेकर असहज है। अब तक वो ईरान के खिलाफ थे, लेकिन अगर वहां जंग छिड़ गई तो सबसे बड़ा हमला तो सऊदी अरब पर ही होगा। अब बात रही बाकी देशों की तो हर एक देश अपनी पॉजिशन लेंगे अपने-अपने राष्ट्रीय हित के मुताबिक। बात रही अगर इजरायल की तो मुझे लगता है कि कोई देश ऐसा नहीं है दुनिया में जो जंग चाहता है, ऐसा कोई देश नहीं है। 


अमर उजाला: यदि अमेरिका—ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बनती है तो भारत का रुख क्या होगा?
हमको डिप्लोमसी का फायदा उठाना चाहिए, ताकि जंग न हो और इसमें भारत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री पूरे इलाके में कई दफा गए हैं और वहां के नेता भी भारत आए हैं। हमारा रिश्ता बहुत गहरा हो चुका है। उसमें रणनीतिक भागीदारी का भी जिक्र है, लेकिन हमारी तरफ से कोई पहल नहीं हो पा रही है। हमारे विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री को अपनी आवाज उठानी चाहिए और अगर आपको किसी तरह की कोई दिलचस्पी नहीं है। तेल में और ट्रेड में और हमारे लोगों पर तो दिलचस्पी होनी चाहिए। एक जमाना था कि सुषमा जी परेशान होती थी, जब वहां कोई भारतीय तकलीफ में होता था। मैं आपसे कह रहा हूं कि कई हजार की जान वहां खतरे में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध हुआ तो भारत और उसकी अर्थव्यवस्था पर इसका काफी खतरनाक असर होगा। हजारों निर्दोष लोग मारे जाएंगे।

अमर उजाला: क्या डोनाल्ड ट्रंप इस साल होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव की वजह से ईरान मामले को तूल दे रहे हैं?
सौ फीसदी, देखिए ट्रंप सोच-विचार में ज्यादा नहीं पड़ते हैं। वो कहते हैं और खुद भी एलान किया है कि वो अपनी दिल के कहे अनुसार चलते हैं, जो उनको सही लगता है। ये मेरा मानना है कि वो एक पॉपुलर लीडर हैं, पॉपुलर लीडर वो काम ज्यादा करते हैं जिससे उनका मूल संसदीय क्षेत्र संभला रहे।अपने खुद के फायदे के लिए उन्होंने ये किया है। उनके ऊपर एक दबाव था, वो दबाव ये था कि मुझे अपनी छवि दुरुस्त करना चाहिए। 
हां मैं सहमत हूं कि ये एक चुनावी हथकंडा है।  

( तलमीज अहमद: 1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं। विदेश सेवा में ऊंचे पदों पर रह चुके तलमीज अहमद अपनी कई खासियतों के लिए जाने जाते हैं। वे न सिर्फ विदेश मामलों की बेहतरीन समझ रखते हैं, बल्कि एनर्जी सिक्युरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) और इस्लाम के राजनीतिक अभ्युदय के भी वे उतने ही बड़े एक्सपर्ट हैं। पश्चिम एशिया मामलों से लेकर इस्लाम ने किस तरह से राजनीतिक रूप अख्तियार किया और उसके क्या असर सामने आए, जैसे मामलों को अपनी पुस्तकों के जरिए उन्होंने बखूबी सामने रखा है। सऊदी अरब, ओमान और यूएई में भारत के राजदूत रह चुके हैं। 
*ईरान- आखिर क्या होगा अमेरिका और ईरान की लड़ाई का असर ,जानिए ये पूरी कहानी खाड़ी मामलों के विषेशज्ञ और भूतपूर्व राजनयिक तलमीज अहमद की जुबानी )

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