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कानों देखी: खरगे जी क्या बदल देंगे? वह तो दाएं और बांए देख रहे हैं

Tue, 01 Nov 2022 06:24 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 01 Nov 2022 06:24 PM IST
सार

कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड में फिलहाल कोई खास हलचल नहीं है। हिमाचल में पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी प्रचार कर रही हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर अभी कोई बड़ी गहमा गहमी नहीं दिख रही है। खबर है कि राहुल गांधी भी अभी दूर-दूर चल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि खरगे जी क्या बदल देंगे?

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There was no discussion in Congress regarding Gujarat elections even after Mallikarjun Kharge became President
मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस मुख्यालय, 24 अकबर रोड में फिलहाल कोई खास हलचल नहीं है। हिमाचल में पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी प्रचार कर रही हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर अभी कोई बड़ी गहमा गहमी नहीं दिख रही है। खबर है कि राहुल गांधी भी अभी दूर-दूर चल रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि खरगे जी क्या बदल देंगे? पार्टी मुख्यालय का पूरा चक्कर लगाने, लुटियन जोन में घूमने और कुछ नेताओं से फोन पर बात करने के बाद एक अजीब सी मायूसी भी दिखी। एक बड़े नेता ने तो यहां तक कह दिया कि भला खरगे जी क्या बदल देंगे? वह तो अभी चीजों को समझ रहे हैं। जब अध्यक्ष का पद संभाल रहे थे तो एक तरफ सोनिया गांधी थीं। दूसरी तरफ राहुल गांधी को बैठना था। यह तो अच्छा है कि वह मधुसूदन मिस्त्री के बगल में बैठ गए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से सभी बड़े और युवा नेता मिलने में व्यस्त थे। जबकि सचिन पायलट वहां होकर भी गुमसुम थे। बैठने उठने की बात तो छोड़िए, अभी तक तो कुछ साफ नहीं हो पा रहा है कि हो क्या रहा है। इससे ज्यादा फिलहाल कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं, बोलते भी हैं तो कुछ निराशा, कुछ हताशा और कुछ तंज़ कसने वाले अंदाज़ में।

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अमित शाह और मनोज सिन्हा कुछ ऐसा चाहते हैं 
जम्मू-कश्मीर बदल रहा है। जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा बड़े गर्व और शौक से इसे बताते हैं। उन्हें कहने में जरा भी संकोच नहीं होता कि जम्मू-कश्मीर में तिरंगा ही नहीं फहरता, राष्ट्रगान भी गाए जाते हैं। आवाम को सहूलियतें मिल रही हैं और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की रैली में 35 हजार से अधिक लोग थे। मनोज सिन्हा पिछले छह महीने से इसे राज्य और केन्द्र सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिना रहे हैं। वह तो दिसंबर तक चुनाव प्रक्रिया की घोषणा भी चाह रहे थे। बताते हैं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी राज्य के उपराज्यपाल से कई मामले में सहमत हैं। वह भी चाहते हैं कि राज्य में आ रहे बदलाव और सरकार के प्रयास को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाया जाना चाहिए। दरअसल अमित शाह राजनीति को बड़ी बारीकी से पकड़ते हैं। उन्हें पता है कि अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के बाद जम्मू-कश्मीर से जुड़ी इन खबरों का देश के अन्य हिस्से में क्या महत्व है। हालांकि भाजपा में ही कुछ लोग हैं जो इसकी उपलब्धि देने के लिए सही चेहरा भी तलाश रहे हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि इसका श्रेय केवल पीएम मोदी को दिया जाए या फिर पीएम के साथ गृहमंत्री शाह को भी अथवा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को भी इसमें शामिल कर लिया जाए। अभी तक तीन की गिनती में कहीं चौथा नाम भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा का नहीं सुनाई दे रहा है।
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मुंबई में बढ़ रही हलचल को तोल रहे हैं एनसीपी प्रमुख शरद पवार 
भाजपा, मनसे, शिवसेना (उद्धव गुट) में काफी कुछ चल रहा है। अहम किरदार सरकार से लेकर राजनीतिक दलों के बीच में उप मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ही निभा रहे हैं। शिवसेना का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री शिंदे के साथ गए कुछ विधायकों को अपना भविष्य सता रहा है। इस दौर में जहां उद्धव ठाकरे रणनीतिक रूप से बृहनमुंबई महानगर पालिका के चुनाव की गोट साधने में लगे हैं, वहीं शरद पवार की चिंता नए रूप में सामने आ रही है। पवार ने हलचल को पकड़ने के लिए कई दांव चले हैं, लेकिन अभी तस्वीर का धुंधलापन नहीं दूर हो रहा है। सूचना यह भी है कि प्रभावशाली तबके में जनसंपर्क के काम को सुप्रिया सूले ने भी खूब बढ़ा रखा है। पवार को उम्मीद है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ काफी कुछ साफ हो जाएगा। उनके प्रशंसक तो कहते हैं कि भाजपा ने मुख्यमंत्री शिंदे के रूप में एक लायबिलिटी ले ली है। अब देखिए नई लायबिलिटी में किसका नाम जुड़ता है। बस नजर बनाए रहिए।
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अभी योगी जी महाराज की उम्र ही कितनी है !
महाराज होना इतना आसान नहीं है। वह भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में एक योगी। मुख्यमंत्री जी के सचिवालय के अफसर भी उन्हें महाराज जी कहते हैं तो योगी को अच्छा लगता है। आजकल महाराज का एक शांत, संयत, भविष्य पर केन्द्रित रूप देखकर भाजपा के ही कई विरोधी दिग्गज हैरान हैं। लखनऊ में यह हवा उड़ाने वालों की कोई कमी नहीं है कि योगी को लेकर सरकार में दिल्ली से लेकर लखनऊ तक भारी झगड़ा है। कुछ पॉवरफुल गलियारे के लोग कहते मिल जाएंगे कि केशव बाबू पिछड़ों के, ब्रजेश पाठक अगड़ों और खासकर ब्राह्मणों के नेता हैं। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव 2024 के बाद लखनऊ में बदलाव भी दिखेगा। लेकिन इस तरह के सवालों को लेकर योगी जी के प्रशंसकों में कोई हलचल नहीं होती। एक बड़े साहब ने तो बस एक जवाब से भाजपा के ही एक अच्छे खासे नेता को चुप करा दिया। उन्होंने कहा कि महाराज जी की उम्र ही क्या है? अभी तो 25 साल सक्रिय राजनीति में रहेंगे। यह उम्र न तो केन्द्रीय गृहमंत्री ला सकते हैं और न ही उत्तर प्रदेश से लेकर केन्द्र तक अपनी गिनती कराने वाले।

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