फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   There is a need for balance between cultural heritage and modern aspirations: Mohan Bhagwat

Arunchal Pradesh: 'सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच संतुलन की जरूरत', आरएसएस प्रमुख भागवत का बयान

Sun, 02 Mar 2025 10:50 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 02 Mar 2025 10:50 PM IST
सार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अरुणाचल प्रदेश के न्यीशी समुदाय के प्रार्थना केंद्र डोनयी पोलो न्येदर नामलो का दौरा किया और सांस्कृतिक विरासत तथा आधुनिक आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण में आध्यात्मिक प्रथाओं की भूमिका की सराहना की।

विज्ञापन
There is a need for balance between cultural heritage and modern aspirations: Mohan Bhagwat
मोहन भागवत - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ईटानगर के निकट नाहरलागुन में न्यीशी समुदाय के प्रतिष्ठित प्रार्थना केंद्र डोनयी पोलो न्येदर नामलो में गए और सामाजिक सद्भाव व राष्ट्र निर्माण को बढ़ावा देने में आध्यात्मिक प्रथाओं की भूमिका पर बात की। 

विज्ञापन


डोनयी पोलो न्येदर नामलो में साप्ताहिक प्रार्थना आयोजित की जाती है। पचिन नदी के तट के पास स्थित नामलो सूर्य (डोनयी) और चंद्रमा (पोलो) की पूजा के लिए समर्पित है, जो इस क्षेत्र के मूल निवासियों के लिए गहन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।
विज्ञापन


'राष्ट्र निर्माण के लिए सामाजिक सद्भाव जरूरी'
नामलो की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि भागवत ने पारंपरिक प्रार्थना समारोह में हिस्सा लिया। भागवत ने नामलो पुजारियों और श्रद्धालुओं से चर्चा के दौरान परंपराओं की रक्षा के लिए उनके प्रयासों की सराहना की। भागवत ने कहा, डोनयी पोलो न्येदर नामलो जैसी आध्यात्मिक प्रथाएं राष्ट्र निर्माण के हमारे साझा लक्ष्य की दिशा में सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अरुणाचल प्रदेश की चार दिवसीय यात्रा आखिरी कार्यक्रम
बयान में कहा गया कि भागवत की यात्रा ने इन प्राचीन परंपराओं के संरक्षण के महत्व और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने में न्यीशी समुदाय की भूमिका को बल दिया। भागवत की अरुणाचल प्रदेश की चार दिवसीय यात्रा का यह आखिरी कार्यक्रम था। यात्रा के दौरान उन्होंने दो दिवसीय आरएसएस कार्यकर्ता शिविर में हिस्सा लिया, जिसमें राज्यभर से संगठन के सदस्य शामिल हुए। उनकी अरुणाचल प्रदेश की यात्रा गुवाहाटी में पांच दिवसीय कार्यक्रम के बाद हुई है। अरुणाचल प्रदेश का दौरा समाप्त कर भागवत शताब्दी वर्ष से संबंधित अन्य कार्यक्रमों के लिए गुवाहाटी लौटेंगे। इस साल विजयादशमी पर आरएसएस के 100 साल पूरे होंगे और इस मौके पर देशभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

संबंधित वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed