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Manipur: ‘जब तक लूटे गए हथियार बरामद नहीं होते, तब तक राज्य में नहीं आएगी शांति’, बोले कांग्रेस सांसद गोगोई

Wed, 16 Aug 2023 02:54 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 16 Aug 2023 02:54 PM IST
सार

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मैतेई और कुकी दोनों मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में मुख्यमंत्री का समर्थन किया। 
 

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There can be no peace in Manipur till 6,000 looted weapons are recovered: Gogoi
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मणिपुर में लगातार अशांति का माहौल है। जैसे ही लगता है कि राज्य में तनाव कम हो रहा है वैसे ही हिंसा फिर भड़क जाती है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बुधवार को कहा कि जब तक लूटे गए छह हजार हथियार बरामद नहीं हो जाते, तब तक मणिपुर में शांति नहीं हो सकती है। 

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दोनों पक्षों के बीच नहीं बात
गोगोई ने कहा कि मणिपुर में लूटे गए छह हजार अत्याधुनिक हथियार और छह लाख राउंड गोला-बारूद बरामद होने तक शांति नहीं हो सकती। उन्होंने पत्रकारों से बात की। कहा कि राज्य में तीन मई से हिंसा जारी है। यहां सुरक्षा बलों से हथियार और गोला बारूद लूटे गए। अब इन हथियारों का इस्तेमाल राज्य के आम लोगों के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति और सामान्य स्थिति कैसे होगी, जब दोनों पक्षों के बीच सुलह पर कोई बातचीत ही नहीं हुई है।

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सीएम से नाखुश दोनों समुदाय
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मैतेई और कुकी दोनों मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में मुख्यमंत्री का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांति समितियों में सीएम की मौजूदगी के कारण शांति वार्ता विफल हो गई है।

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कालियाबोर से सांसद गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से देश को गुमराह किया है। जब तक 6,000 हथियार बरामद नहीं हो जाते, तब तक राज्य में शांति नहीं आ सकती।



यह है मामला
गौरतलब है, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

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