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कीटों का हो रहा पतन, बड़े संकट में पड़ सकती है दुनिया

Wed, 13 Feb 2019 10:11 AM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 13 Feb 2019 10:11 AM IST
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The world insects are extinction and could vanish in 100 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

दुनिया में कीटों की संख्या लगातार कम होती जा रही है, माना जा रहा है कि 100 सालों में ये खत्म हो सकते हैं। यह जानकारी कीटों की जनसंख्या पर हुई एक रिसर्च रिपोर्ट में दी गई है। इस रिपोर्ट को फ्रैंसिसको संचेज और क्रिस एजी वायकुयस नाम के दो वैज्ञानिकों ने पिछले 40 वर्षों में प्रकाशित कीटों के सभी दीर्घकालिक सर्वेक्षणों की समीक्षा कर तैयार किया है। इन्हें खोज में पता चला है कि 40 फीसदी से अधिक कीट प्रजातियां अगले कुछ दशकों में विलुप्त हो सकती हैं।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि रिपोर्ट में जो भी कुछ सामने आया है वह भयावह है। पारिस्थिकी तंत्र के लिए ये सब किसी विपत्ति से कम नहीं है। 

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी फॉर कन्वर्सेशन बायोलॉजी के प्रेजिडेंट पॉल राल्फ एहरलिच का कहना है कि यह एक शानदार पेपर है लेकिन किसी भी जीवविज्ञानी को डरा देने वाला है। अगर सभी कीट मिट जाएंगे तो हम भी मिट जाएंगे। पूरा कृषि क्षेत्र की कीटों पर निर्भर है। 

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फसलों के लिए कीट क्यों जरूरी?

फसल के लिए कीट बेहद जरूरी होते हैं, इनके न होने से पूरा चक्र ही टूट जाएगा। किसान कीटों को मारने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं ताकि उनकी फसल को कोई नुकसान न हो। लेकिन कई कीट ऐसे भी होते हैं जो किसानों के मित्र कह जाते हैं। ये कीट उन कीटों को खाते हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। अधिक कीटनाशक का छिड़काव भी कीटों के लुप्त के लिए जिम्मेदार है। ऐसा इसलिए क्योंकि कीटनाशकों का शिकार मित्रकीट व अन्य जीव जंतु भी हो जाते हैं। इसके अलावा यह फूड चेन के लिए भी बेहद जरूरी है।

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कीट पौधों को परागण, मिट्टी और पानी को शुद्ध करने, कचरे को रीसायकल करने और कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर साल इनकी संख्या 2.5 फीसदी तक कम हो रही है। वैज्ञानिक इनके पतन के लिए जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण को भी जिम्मेदार मानते हैं।


किसानों को सुझाव देते हुए वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्हें कीटनाशकों का प्रयोग एक सीमा तक की करना चाहिए। इससे फल आदि जिनकी फसल की जाती है न तो वो दूषित होंगे और न ही अधिक संख्या में कीटों का पतन होगा।

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