मैकेनिकल, आईटी और अंतरिक्ष का कॉकटेल हैं लैंडर विक्रम के 'खोजी' शनमुग, जानें कैसे पहुंचे नासा
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चेन्नई के एक युवा ने वो कमाल कर दिखाया है जिसे नासा और इसरो के वैज्ञानिक महीनों की मेहनत के बाद करने में असफल रहे थे। वह शख्स कोई और नहीं बल्कि मैकेनिकल इंजीनियर शनमुग सुब्रमण्यन हैं। इन्होंने ही चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के मलबे एवं दुर्घटना वाली जगह का पता लगाया है।
दरअसल, मूल रूप से मदुरै के निवासी और अब चेन्नई में रह रहे शनमुग ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इस समय वह आईटी कंपनियों में बतौर प्रोफेशनल काम कर रहे हैं। इसके अलावा वह वेबसाइट बनाने और ऐप डिजाइन का काम भी करते हैं, पर अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी खास रुचि है। यही वजह है कि उन्हें मैकेनिकल, आईटी और अंतरिक्ष का कॉकटेल कहा जा रहा है।
बता दें कि अब अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी मंगलवार को उनके किए गए आकलन की पुष्टि कर दी है। नासा ने एक ट्वीट में कहा कि सुब्रमण्यन ने मलबे और दुर्घटनास्थल को लेकर जो अनुमान जाहिर किया है, वह सही है। गौरतलब है कि भारत की महत्वाकांक्षी परियोजना के उपग्रह चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चांद की जमीन पर सही से उतर नहीं सका और गिर कर नष्ट हो गया था।
वैज्ञानिकों को दुर्घटना वाली जगह और लैंडर के मलबे का पता नहीं चल सका था। सुब्रमण्यन ने इसे चुनौती की तरह लेते हुए चंद्रमा की सतह के छायाचित्रों का गहन अध्ययन किया और अपने आकलन को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पास भेजा। हैरानी की बात है कि उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई नहीं की है, हालांकि इसमें उनकी बहुत रुचि है।
कैसे पहुंचे नासा तक
शनमुग सुब्रमण्यन ने एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) के कैमरे, ल्यूनर रिकनाइसांस ऑर्बिटल कैमरा (एलआरओसी) से तस्वीरें डाउनलोड की। उनके अलावा करीब 26 लोगों ने विक्रम के बारे में जानने के लिए इसकी तस्वीरों को डाउनलोड किया।
सुब्रमण्यन ने तीन अक्तूबर को नासा, एलआरओ और इसरो को ट्वीट करके पूछा कि क्या यह विक्रम लैंडर है। एक बार फिर 17 नवंबर को दोबारा संपर्क किया और उन्हें विक्रम लैंडर क्रैश साइट के बारे में बताया। एएसयू ने उनके दावे को स्वीकार कर लिया और बाद में नासा ने भी इसकी पुष्टि कर दी।
एलआरओ कैमरा के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट एलआरओएम जॉन केलर ने एक पत्र लिख कर सुब्रमण्यन को इसके लिए बधाई दी है। एएसयू ने कहा कि जब 17 सितंबर को तस्वीरें ली गईं, तो दुर्घटनास्थल बहुत धुंधला दिख रहा था। लेकिन 14-15 अक्तूबर को और 11 नवंबर को ली गई तस्वीरें बेहतर थीं।
जब सुब्रमण्यन ने उन्हें सूचना दी तो एलआरओसी टीम ने फिर से जांच की और दुर्घटनास्थल एवं मलबे का स्थान देख लिया। एएसयू ने कहा सुब्रमण्यन ने सबसे पहले मलबा मुख्य दुर्घटनास्थल से 750 मीटर उत्तर-पश्चिम में देखा।
स्टालिन ने शनमुग की तारीफ में कहे ये शब्द
द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने चंद्रयान-2 का मलबा खोज निकलाने वाले इंजीनियर शनमुग सुब्रमण्यन की प्रशंसा की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि वह उसकी सफलता से बेहद खुश हैं और जब उन्हें पता चला कि नासा ने उसकी खोज की पुष्टि की है तो उनकी प्रसन्नता और बढ़ गई। वह उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।