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471 करोड़ का ठेका रद्द होने पर भारतीय रेलवे के खिलाफ चीनी कंपनी पहुंची कोर्ट
Sat, 18 Jul 2020 09:41 PM IST
Rajeev Rai
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Sat, 18 Jul 2020 09:41 PM IST
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indian railway
- फोटो : social media
भारतीय रेलवे द्वारा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सिग्नल और दूरसंचार कार्य के लिए एक चीनी कंपनी को दिया गया ठेका रद्द करने के फैसले को चीनी कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। भारतीय रेलवे ने इस करार को समाप्त करने के लिए काम की धीमी गति का हवाला दिया है।
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चीनी कंपनी की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट गुरुवार को संज्ञान ले चुकी है। इस याचिका में चीनी कंपनी ने भारतीय रेलवे पर गलत तरीके के अनुबंध समाप्त करने का आरोप लगाया है। कंपनी के कहा कि इस अनुबंध के तहत उसे कानपुर और मुगलसराय के बीच 417 किमी लंबे गलियारे का सिग्नलिंग और दूरसंचार से जुड़ा कार्य करना था। इसके लिए 471 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था जिसे अब अचानक समाप्त कर दिया गया है।
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चीनी कंपनी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड; डीएफसीसीआईएल को बैंक गारंटी भुनाने से रोकने का निर्देश दिया जाए। इस प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक फंडिंग कर रहा है। वहीं भारतीय रेलवे ने कोर्ट में जवाब दिया है काम की धीमी गति के कारण करार समाप्त किया गया है। यह कहा गया है कि रेलवे नियमों के तहत काम कर रही है। काम की धीमी गति के कारण निर्धारित प्रोजेक्ट के पूरा होने में देरी हुई है।
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भारतीय रेलवे ने 2016 में बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एडं डिजाइन इंस्टिट्यूट ऑफ सिग्नल एंड कम्युनिकेशन ग्रुप को यह टेंडर दिया था। अब इस कंपनी का टेंडर समाप्त करने से पहले भारतीय रेलवे ने चीनी कंपनी को 14 दिन का नोटिस दिया था जिसकी अवधि बीते शुक्रवार को पूरी हो गई।
रेलवे के मुताबिक चीनी कंपनी को प्रोजेक्ट से बाहर निकालने का कार्य जनवरी 2019 में शुरू हुआ था क्योंकि वह तय समय में काम नहीं कर पाई थी। कंपनी ने तब तक केवल 20 फीसदी ही काम किया था।