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टीके की ताकत : कोविड टीकाकरण बढ़ने के साथ-साध कम होती चली गईं लोगों की मौतें

Sat, 11 Sep 2021 07:42 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 11 Sep 2021 07:42 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने एक दिन पहले  ही नेशनल वैक्सीन ट्रैकर सिस्टम लॉन्च किया है। जिसमें केंद्र ने घोषणा करते हुए कहा था कि वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद 97 फीसदी से भी अधिक कोरोना से होने वाली मौतों की आशंका को कम किया जा सकता है। 18 अप्रैल से नौ मई के बीच जब देश महामारी की दूसरी लहर का सामना कर रहा था तब टीकाकरण सबसे निचले पायदान पर था।
 

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The Power of Vaccines: As Covid19 Vaccination Increases, deaths have decreased in second wave
कोरोना वारयरस - फोटो : PTI

विस्तार

एक दिन पहले केंद्र सरकार ने नेशनल वैक्सीन ट्रैकर सिस्टम लॉन्च करने की घोषणा करते हुए कहा था कि वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद 97 फीसदी से भी अधिक मृत्यु की आशंका को कम किया जा सकता है।

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इसी ट्रैकर की बदौलत सरकार को टीकाकरण का असर पता चला है। टीके की ताकत ऐसी है कि जैसे-जैसे टीकाकरण बढ़ता चला गया, कोरोना से लोगों की मौतें कम होती चली गईं। 18 अप्रैल से नौ मई के बीच जब देश महामारी की दूसरी लहर का संकट झेल रहा था, तब टीकाकरण सबसे निचले पायदान पर था।
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शायद यह भी एक वजह थी कि उस दौरान सप्ताह में औसतन 10 लाख की आबादी पर 28 से भी अधिक लोगों की मौत दर्ज की जा रही थी लेकिन इसके बाद सरकार को स्थिति संभालने में करीब एक महीने का वक्त लगा और फिर 16 मई के बाद से टीकाकरण बढ़ता चला गया, मौत कम होती चली गई।
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12 अप्रैल से 15 अगस्त के बीच कोरोना से हुईं मौतों का जब गणितीय अध्ययन किया गया तो पता चला है कि 12 से 18 अप्रैल के बीच 10 लाख की आबादी पर टीका लेने वाले 19.2 लोगों की मौत हुई। जबकि पहली खुराक ले चुके 1.72 और दोनों खुराक ले चुके 0.46 लोगों की मौत दर्ज की गई।

25 अप्रैल के सप्ताह में टीका न लगवाने वालाें में 22.52, दो मई के सप्ताह में 27.23 और नौ मई के सप्ताह में 28.89 यानी करीब 29 लोगों की मौत हुई। नौ मई के सप्ताह में पहली खुराक लेने वाले 10 लाख में से 1.87 की मौत हुई और दो खुराक ले चुके 1.1 लोगों की मौत हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त निदेशक ने कहा, उन दिनों के हालात कभी यादों से खत्म नहीं हो सकते। चारों तरफ हंगामा और अफरा-तफरी के बीच नुकसान होता जा रहा था। मंत्रालय भी इसकी चपेट में आ चुका था लेकिन रात-दिन लड़ाई जारी रखने के बाद टीकाकरण को बढ़ाने पर ध्यान अधिक दिया।

नौ मई के बाद जब 23 मई को दो सप्ताह की हमने समीक्षा की तो पाया कि वैक्सीन न लेने वालों में मौत 28.89 से कम होकर 22 तक पहुंची और वैक्सीन की दोनों खुराक लेने वालों की संख्या एक फीसदी से भी नीचे आ गई। यहीं से टीकाकरण का जमीनी पटल पर असर दिखाई देने लगा।


ट्रैकर भ्रांति भी दूर करेगा 
संयुक्त निदेशक का कहना है कि वैक्सीन की ताकत का पता लगाने के लिए यह ट्रैकर सबसे बड़ा गवाह है जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। देश का कोई भी व्यक्ति अपने फोन या फिर कंप्यूटर पर यह ट्रैकर चैक कर सकता है और उन लोगों में वैक्सीन के प्रति भ्रांति दूर कर सकता है जो किसी न किसी डर की वजह से अब तक टीका नहीं लगवा पाए हैं।

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