जम्मू-कश्मीर में खतरनाक मंसूबे वालों के दांत खट्टे करती रहेगी यह टीम
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तालमेल निराला है। अमित शाह दहशतगर्दों को डराते हैं और प्रधानमंत्री सब संतुलित करके चल रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को खुफिया और रणनीतिक ऑपरेशन अंजाम देने में महारत हासिल है।
सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत केंद्र सरकार की मंशा साफ-साफ समझते हैं। केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा का समन्वय, सूचना, प्रबंधन और नजर रखने पर लगातार जोर बना हुआ है। भारत सरकार की यह टीम जम्मू-कश्मीर में खतरनाक मंसूबे रखने वालों के दांत खट्टे करने की पूरी क्षमता रखती है।
एनएसए डोभाल यूं ही नहीं गए थे कश्मीर
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की अचानक कश्मीर की गोपनीय यात्रा काफी चर्चा में है। सूत्र बताते हैं कि वह तीन दिन तक कश्मीर में थे। उन्होंने अमरनाथ गुफा के पास एक कैंप में समय बिताया। वह सुरक्षा मामलों की बैठक जैसा कोई कार्यक्रम लेकर नहीं गए थे।
यात्रा के पीछे का मकसद बाबा अमरनाथ के दर्शन जैसा संदेश रहा, लेकिन बताते हैं सीमा पार का खतरनाक मंसूबा भांपकर एनएसए बड़ा होमवर्क करने गए थे। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान उनकी भेंट सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत और राज्य के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम समेत अन्य से हुई थी।
बीवीआर सुब्रमण्यम
जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली में अहम किरदार निभाने वाले बीवीआर सुब्रमण्यम जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव हैं। जून 2018 में अचानक केंद्र सरकार ने सुब्रमण्यम को जम्मू-कश्मीर भेजने का फैसला किया था। तब वह छत्तीसगढ़ सरकार में गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
नक्सलवाद को काबू में रखने की महारत और शानदार रिकॉर्ड देखने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल की सलाह पर केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया था। सुब्रमण्यम को रातों रात जम्मू-कश्मीर पहुंचने के लिए कहा गया और उन्होंने ऐसा ही किया।
साल 2004-2008 तक सुब्रमण्यम तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय में तैनात थे। सुब्रमण्यम इस समय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और केंद्रीय गृह मंत्री के सबसे विश्वस्त लोगों में हैं। सुब्रमण्मय की सबसे बड़ी विशेषता दायरे में रहकर दहशतगर्द और अराजक लोगों पर नकेल कसने की क्षमता है।
अरविंद कुमार और सामंत कुमार गोयल
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के नए प्रमुख सामंत कुमार गोयल हैं। सामंत कुमार कश्मीर मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं। आपरेशन बालाकोट के प्लानर रहे हैं। प्रधानमंत्री और एनएसए का विश्वास हासिल है। नए खुफिया प्रमुख अरविंद कुमार को नक्सलवाद और कश्मीर मामलों में महारत है।
खुफिया ब्यूरो में बतौर विशेष निदेशक अरविंद कुमार का कामकाज काफी अच्छा रहा था। कहा जाता है कि उन्हें इसी का पुरस्कार मिला है। अरविंद कुमार को राजीव जैन और सामंत कुमार गोयल को अनिल कुमार धस्माना का कार्यकाल खत्म होने के बाद यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
के. विजय कुमार
के. विजय कुमार की रणनीति बनाने की और ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता निराली है। विजय कुख्यात चंदन दस्यु तस्कर वीरप्पन को मुठभेड़ में मार गिराने के बाद चर्चा में आए थे। पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर काबू करने के लिए उन्हें सीआरपीएफ का डीजी बनाया था।
वे झारखंड के राज्यपाल के सलाहकार रह चुके हैं और इस समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर तैनात हैं। के. विजय कुमार को भी अजीत डोभाल का भरोसा हासिल है।
दिनेश्वर शर्मा
जम्मू-कश्मीर में शांतिवार्ता बहाली के उपायों पर काम करने और वार्ताकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के विश्वस्त हैं। इससे पहले वह खुफिया ब्यूरो के प्रमुख थे। दिनेश्वर शर्मा के पास कामकाज की अनूठी शैली है। शर्मा शांतिपूर्ण तरीके से अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए जाने जाते हैं।
गृहमंत्री की सक्रियता बदल रही है पैमाना
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी की माने तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रोजमर्रा के कामकाज की जानकारी अपनी अंगुलियों पर रखते हैं। वह अधिकारियों के संपर्क में रहते हैं और उच्च स्तर पर मॉनिटरिंग तथा कोऑर्डिनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के बीच ऑपरेशन के तालमेल में भी वह कोई चूक नहीं चाहते।
शाह की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख और रॉ के पूर्व प्रमुख अनिल धस्माना का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें भोज पर आमंत्रित किया। सरकार के साथ कामकाज और तालमेल की परंपरा को आगे बढ़ाया।
जम्मू-कश्मीर के सूत्र बताते हैं कि वह राज्यपाल महामहिम सत्यपाल मलिक के लगातार संपर्क में रहते हैं। गृह मंत्री अलगाववादी नेताओं, दहशत गर्दों को खुलकर अपनी भाषा में लगातार संदेश भी दे रहे हैं। वह संसद भवन से लेकर सरकार और राज्य सरकार के स्तर तक स्पष्ट सोच को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। बताते हैं इससे सुरक्षा बलों के मनोबल को लगातार समर्थन मिल रहा है।