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राफेल लड़ाकू विमान की सियासत पर छलक आया पूर्व वायुसेना अध्यक्ष का दर्द

Fri, 14 Sep 2018 03:18 AM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Fri, 14 Sep 2018 03:18 AM IST
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The pain of former Air Force chief of Rafael Fighter Aircraft over politics 
Rafale Deal
राफेल युद्धक विमान का परीक्षण करके जुलाई 2010 में रिपोर्ट देने वाले पूर्व वायु सेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक का दुख समझिए। लड़ाकू विमान का परीक्षण देने के बाद ही पीवी नाइक एयरचीफ मार्शल बने थे, लेकिन वायुसेना से रिटायर होने के इतने साल बाद राफेल लड़ाकू विमान पर राजनीति उन्हें साल रही है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में एयरचीफ मार्शल का कहना है कि सोचना चाहिए, देश को क्या मिला? हमने छह से अधिक साल खराब कर दिए। इन छह सालों में लड़ाकू विमान की कीमत भी कितना बढ़ गई होगी?
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पूर्व वायु सेना अध्यक्ष का मानना है कि इससे देश का कितना नुकसान हुआ? इसका भी आंकलन किया जाना चाहिए। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह की देरी सैन्य बलों को भी तंग करती है। हालांकि वायुसेना की भूमिका केवल सरकार को अपनी जरूरत बताने और इसके बाद तकनीकी तथा यूजर परीक्षण करके संबंधित रक्षा साजो-सामान के बारे में रिपोर्ट देने की ही होती है। रक्षा साजो-सामान की कीमत, लाइफ साइकिल कास्ट समेत अन्य मामलों से सेना के तीनों अंगो का कोई लेना देना नहीं होता।
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वायुसेना को कितने लड़ाकू विमानों की है दरकार ?

पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक का कहना है कि वायु सेना को 126 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की जरूरत थी। चीन और पाकिस्तान की सीमा पर हमारे सामने दोहरी चुनौती थी। इसे केन्द्र में रखकर ही वायुसेना ने अपनी जरूरत बताई थी। जब यह जरूरत बताई गई थी, तब पुराने हो रहे और वायुसेना से रिटायर होने वाले लड़ाकू विमानों की संख्या को भी ध्यान में रखा गया था। इसी आधार पर वायुसेना ने सरकार को अपनी जरूरत बताई थी। 
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रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों के लिए आरएफपी जारी करने की अनुमति दी थी और 126 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों के लिए परीक्षण हुआ था। पूर्व वायु सेना अध्यक्ष के अनुसार अभी वायुसेना की इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सैन्य बल कोई नए विमान नहीं मिले हैं। इसलिए आवश्यकता तो वहीं है, जो पहले (126 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान) थी। 

इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले सभी लड़ाकू विमानों का परीक्षण करने के बाद हमने अपनी भविष्य की जरूरत, चुनौती आदि को ध्यान में रखकर जुलाई 2010 में अपनी रिपोर्ट दी थी। यह रिपोर्ट परीक्षण के उपरांत तब एयर मार्शल पीवी नाइक की देख-रेख में तैयार हुई थी। पूर्व वायु सेना अध्यक्ष का कहना है कि राफेल युद्धक विमान क्षमता और गुणवत्ता में एक बेहतरीन लड़ाकू विमान है और वायुसेना अपने परीक्षण में कभी कोई कोताही नहीं बरतती।

छह साल से रो रहे थे, लड़ाकू जहाज लाओ

पूर्व वायुसेना अध्यक्ष का कहना है कि भारतीय वायुसेना को साजो-सामान और लड़ाकू विमानों की जरूरत है। वायुसेना को सशक्त और सक्षम बनाना है। पूर्व एयरचीफ मार्शल का कहना है कि वायुसेना के वर्तमान और अवकाश प्राप्त शीर्ष अफसर लगातार रो रहे थे कि सरकार जल्द लड़ाकू विमानों के सौदे को अंतिम रूप दे। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष ने कहा कि रक्षा सौदों में देरी पर उनकी कीमत बढ़ जाती है। 

इस बढ़ी कीमत का भुगतान भी देश को ही करना पड़ता है। इतना ही नहीं सैन्य बल की ताकत और उसका मोरॉल भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि एक वायुसेना अध्यक्ष होने के नाते उन्हें इसकी खुशी है कि 36 राफेल (दो स्कावाड्रान) लड़ाकू विमानों को लिए जाने को हरी झंडी दी जा चुकी है। हालांकि पूर्व वायुसेना अध्यक्ष का कहना है कि एक सैनिक होने के नाते उन्हें रक्षा-साजो सामान को लेकर होने वाली इस तरह की राजनीति से काफी परेशानी होती है। 

क्या रक्षा मंत्री झूठ बोल रही हैं?

एयरचीफ मार्शल ने कहा कि रक्षा मंत्री ने तकनीकी पक्ष को बताया है। उन्होंने कहा कि वायुसेना में मौजूदा संसाधन और क्षमता को देखते हुए एक समय में दो स्क्वाड्रॉन लड़ाकू विमानों को ही शामिल किया जा सकता है। पूर्व एयरचीफ मार्शल का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि वायुसेना को केवल 36 राफेल लड़ाकू विमान ही चाहिए थे। वह जहां तक समझ पाए हैं, उसका अर्थ यही है कि रक्षा मंत्री एक साथ, एक समय में वायुसेना में दो स्क्वाड्रॉन लड़ाकू विमानों को शामिल किए जाने की बात कह रही हैं। 

भारतीय सैन्य बल के परीक्षण से बदल जाता है बाजार

भारतीय सैन्य बल विश्व का जो रक्षा-साजो सामान अपने परीक्षण में पास करते हैं, दुनिया में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ जाती है। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष एयरचीफ मार्शल पीवी नाइक का भी यही कहना है। एयरचीफ मार्शल के अनुसार जब 126 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान का परीक्षण चल रहा था, तब यूरोप में मंदी छाई थी। लेकिन 2010 में लड़ाकू विमानों का मूल्यांकन करके रिपोर्ट सौपने के बाद यूरोपीय फाइटर जेट की मांग बढ़ गई। सैन्य सूत्र बताते हैं कि भारत में पोखरण का तापमान 65-70 डिग्री तक जाता है तो सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन का तापमान 50-70 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। 


तीन ओर से देश समुद्री क्षेत्र से घिरा है। ऐसे में वायुसेना, सेना या नौसेना सभी मौसम, तापमान, स्थिति आदि को ध्यान में रखकर रक्षा साजो-सामान का परीक्षण करती है। भारत के पास परीक्षण के उन्नत संसाधन भी है। इसके चलते रक्षा साजो-सामान की अंतरराष्ट्रीय मांग पर भी असर पड़ता है। पूर्व वायुसेना अध्यक्ष ने भी इसकी पुष्टि की।
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