अमेरिकी-यूरोपीय लोगों को खूब लुभाएंगी आम की दीपशिखा और मनोहारी वैरायटी
- अपेक्षाकृत कम मिठास और चटख लाल रंग के कारण पूसा दीपशिखा आम को अमेरिकी बाजार में मिल सकती है बड़ी कामयाबी
- वर्तमान में भारत फलों-सब्जियों के निर्यात में चीन के बाद दूसरे नंबर पर, वर्तमान में फलों का उत्पादन 9.797 करोड़ टन और सब्जियों का उत्पादन 18.317 करोड़ टन प्रति वर्ष है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फलों का राजा आम अपनी मिठास के कारण पूरी दुनिया में भारत के नाम का डंका बजा रहा है। इसका सीधा लाभ हमारे देश के आम उत्पादक किसानों और व्यापारियों को हुआ है। यूरोपीय और अमेरिकी समाज के लोग अपेक्षाकृत कम मिठास के फल खाना ज्यादा पसंद करते हैं।
यही कारण है कि उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए पूसा के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे विशेष आम विकसित किए हैं जो अन्य आम फलों की तुलना में कम मीठे हैं, लेकिन अपने स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इनकी खूब मांग रह सकती है। कम मीठा होने के कारण शुगर पीड़ित लोग भी इसे खा सकते हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा), नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह ने अमर उजाला को बताया कि ‘पूसा दीपशिखा (हाईब्रिड 11-2)’ आम्रपाली और सेंसशन के संकरण से प्राप्त संकर किस्म है। इसके पेड़ नियमित फल देने वाले और अर्ध-बौने आकार के होते हैं।
इस प्रजाति के पेड़ों से प्राप्त फल अधिकांशतया सामान आकार के, लंबे आकार के, आकर्षक, चमकदार, लाल छिलके और नारंगी-पीले गूदे वाले होते हैं, जो अमेरिकी-यूरोपीय समुदाय में बहुत पसंद किए जाते हैं।
इनके पेड़ों को मध्यम सघन बागवानी 6X6 मीटर पर लगाना ज्यादा लाभदायक है। प्रति हेक्टेयर के आधार पर लगभग दस साल पुराना पेड़ 50.33 किलोग्राम फल देता है। इस किस्म की प्रति हेक्टयर अनुमानित उपज 14.3 टन है।
पूसा दीपशिखा (हाइब्रिड 11-2) के फल मध्यम मिठास (18.67 डिग्री ब्रिक्स) वाले, 70 फीसदी गूदे वाले, एस्कोर्बिक एसिड (35.34 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम गूदा) और बीटा कैरोटीन (9.48 मिलीग्राम) पाया गया है।
इन फलों की भंडारण आयु कमरे के सामान्य तापमान पर भी 7-8 दिनों की होती है। इससे व्यापारियों को बिना फल खराब हुए इसे बेचने के लिए लंबा समय मिलता है, जो व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है।
पूसा मनोहारी (हाईब्रिड 8-11)
पूसा मनोहारी आम को संकर किस्म आम्रपाली और लाल सुंदरी आमों की विशेषताओं के संकरण से बनाया गया है। आम के बौर लगने के समय आमों में लगने वाला गुच्छा रोग आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है, लेकिन यह नई किस्म इस रोग के प्रति सहनशील (10-15 फीसदी) पाई गई है।
यह भी मध्यम सघन बागवानी वाली आम की फसल है, जो मध्यम आकार (223 ग्राम औसतन) के फल देती है। लगभग दस साल पुराना पेड़ औसतन 58 किलोग्राम फल देता है। इससे अनुमानित तौर पर प्रति हेक्टेयर 16.1 टन की फसल प्राप्त की जा सकती है।
ये फल भी हल्के लाल रंग की आभा लिए हरे-पीले छिलके वाले होते हैं। लेकिन इसका गूदा रेशा रहित नारंगी पीला होता है, जो देखने में काफी अच्छा लगता है। इन फलों की मिठास क्षमता (20.38 डिग्री ब्रिक्स), अम्लता (0.27 प्रतिशत), एस्कोर्बिक अम्ल (39.78 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम गूदा), बीटा कैरोटीन (9.73 मिलीग्राम प्रति एक किलोग्राम गूदा) होता है।
फलों के बाजार में भारत की स्थिति
केंद्र सरकार की नीतियों के कारण बागवानी क्षेत्र में भारत ने 2013-14 के बाद से बहुत अच्छी प्रगति की है। 2018-19 में 2.543 करोड़ हेक्टेयर भूक्षेत्र में बागवानी की खेती हुई है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस वर्ष 31.074 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया गया।
वर्तमान समय में भारत फलों-सब्जियों के निर्यात के मामले में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। वर्तमान में देश फलों का उत्पादन 9.797 करोड़ टन और सब्जियों का उत्पादन 18.317 करोड़ टन प्रति वर्ष है। भारतीय कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पैदा की गई नई-नई फलों-सब्जियों के कारण यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सका है।