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Hindi News ›   India News ›   The Koregaon-Bhima Inquiry Commission asks Prakash Ambedkar to appear before it on March 27

Koregaon-Bhima violence: जांच आयोग ने प्रकाश अंबेडकर को 27 मार्च को पेश होने के लिए कहा, 2018 में हुई थी हिंसा

Fri, 03 Mar 2023 10:49 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 03 Mar 2023 10:49 PM IST
सार

पैनल ने 2018 में प्रमुख राजनीतिक नेताओं को नोटिस जारी कर उनसे इसके सामने पेश होने और भविष्य में हिंसक घटनाओं से बचने के उपाय सुझाने का अनुरोध किया था।

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The Koregaon-Bhima Inquiry Commission asks Prakash Ambedkar to appear before it on March 27
प्रकाश अंबेडकर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कोरेगांव-भीमा जांच आयोग ने शुक्रवार को वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के अध्यक्ष प्रकाश अंबेडकर को महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक युद्ध स्मारक पर जनवरी 2018 में हुई हिंसा के संबंध में अपना बयान दर्ज कराने के लिए 27 मार्च को पेश होने के लिए कहा। आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता आशीष सतपुते ने दो सदस्यीय पैनल के समक्ष पूर्व राज्यसभा सांसद की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया था।

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पैनल ने 2018 में प्रमुख राजनीतिक नेताओं को नोटिस जारी किए थे
न्यायिक आयोग को हिंसा की जांच करने का काम सौंपा गया था। पैनल ने 2018 में प्रमुख राजनीतिक नेताओं को नोटिस जारी कर उनसे इसके सामने पेश होने और भविष्य में हिंसक घटनाओं से बचने के उपाय सुझाने का अनुरोध किया था। हालांकि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार को छोड़कर किसी भी राजनीतिक नेता ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। 
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पैनल ने कहा कि प्रमुख दलित नेता अंबेडकर अगर चाहें तो हलफनामा भी दाखिल कर सकते हैं। कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश जेएन पटेल और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव सुमित मलिक का दो सदस्यीय आयोग उन परिस्थितियों की जांच कर रहा है, जिन्होंने दंगों को भड़काया। 
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2018 में भड़की थी हिंसा
पुणे पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी, 2018 को कोरेगांव भीमा की 1818 की लड़ाई की द्विशताब्दी वर्षगांठ के दौरान युद्ध स्मारक के पास जाति समूहों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। दलित संगठन लड़ाई में पुणे के पेशवाओं पर ईस्ट इंडिया कंपनी की जीत का जश्न मनाते हैं क्योंकि कुछ ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, ब्रिटिश सेना में मुख्य रूप से उत्पीड़ित महार समुदाय के सैनिक शामिल थे। हालांकि, कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने जश्न का विरोध किया था, जिसके कारण हिंसा हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य, जिनमें 10 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

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