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Hindi News ›   Mumbai ›   The International Union for Conservation of Nature (IUCN) has passed a resolution for conservation Great Indian bustard

प्रस्ताव पास: फिर दिखाई देगी दादी-नानी की कहानियों वाली सोन चिरैया, संरक्षण के लिए आगे आया आईयूसीएन

Sun, 03 Oct 2021 02:37 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई। Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sun, 03 Oct 2021 02:37 PM IST
सार

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की वर्ल्ड कंजर्वेशन कांग्रेस (डब्लूसीसी) ने इसके संरक्षण के लिए प्रस्ताव पारित किया है।

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The International Union for Conservation of Nature (IUCN) has passed a resolution for conservation Great Indian bustard
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (सोन चिरैया) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पूर्वी उत्तर प्रदेश में दादी-नानी अपनी नातिन या पोती को प्यार से सोन चिरैया कहकर पुकारती हैं। लेकिन इसकी संख्या अब नाममात्र रह गई है। पर खुशी की बात यह है कि इस खूबसूरत चिड़िया को विलुप्त होने से बचाने का प्रयास शुरू हो गया है। प्राणी व प्रकृति के संरक्षण के लिए काम करने वाली वैश्विक संस्थाएं भी सोन चिरैया को बचाने के लिए आगे आई हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की वर्ल्ड कंजर्वेशन कांग्रेस (डब्लूसीसी) ने इसके संरक्षण के लिए प्रस्ताव पारित किया है।

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सोन चिरैया को अंग्रेजी में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और राजस्थान में गोडावण कहते हैं जबकि महाराष्ट्र में इसे मालढोक कहा जाता है। सितंबर महीने में वैश्विक संस्था आईयूसीएन ने फ्रांस के मार्सिले में आयोजित ऑनलाइन बैठक में भारत की द कार्बेट फाउंडेशन की ओर से पेश किए गए सोन चिरैया के संरक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। द कार्बेट फाउंडेशन के निदेशक केदार गोरे ने बताया कि सोन चिरैया को विलुप्त होने से बचाने के प्रस्ताव को आरण्यक, बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी, गुजरात इकोलॉजी सोसायटी, वन्यजीव कंजर्वेशन ट्रस्ट, वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया और वाइल्ड ट्रस्ट ऑफ इंडिया सहित अंतर्राष्ट्रीय संस्था जैसे बर्ड लाइफ इंटरनेशनल (यूके) और रॉयल सोसायटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स (यूके) आदि ने अपना समर्थन दिया। उन्होंने बताया कि सोन चिरैया के संरक्षण का प्रस्ताव मई 2020 में पेश किया गया था। लेकिन 3 से 11 सितंबर को आईयूसीएन के 1500 सदस्यों के बीच हुए मतदान में सोन चिरैया को बचाने का प्रस्ताव पारित हुआ। केदार गोरे ने कहा कि भारत में सोन चिरैया के विलुप्त होने को रोकने के संकल्प से इन राजसी पक्षियों की अंतिम जीवित आबादी के संरक्षण और संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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भारत और पाकिस्तान में पाई जाती है सोन चिरैया
सोन चिरैया पक्षी मुख्यतः भारत और पाकिस्तान में पाई जाती है। लुप्तप्राय होने के करीब पहुंची सोन चिरैया की संख्या सत्तर के दशक में 1260 थी। लेकिन अब इसकी संख्या 150 से भी कम हो गई है। यह राजसी पक्षी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित कुछ जंगलों में भी पाई जाती है जबकि राजस्थान से सटे पाकिस्तान के चोलिस्तान इलाके में भी कुछ संख्या में सोन चिरैया पक्षी मौजूद हैं। लेकिन वहां इस पक्षी का शिकार कर खाया जाता है।
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बिजली के तारों का शिकार होती रही है सोन चिरैया
विश्व में पाई जाने वाले सबसे बड़े और वज़नी उड़ने वाले पक्षियों की प्रजाति में से एक सोन चिरैया की उंचाई एक मीटर और इसका वज़न 10-15 किलो होता है। आकार में बड़े होने और पैर लंबे होने के बावजूद ये उड़ सकती है, लेकिन बिजली के तार के सामने आने पर ये बाकी पक्षियों की तरह बच नहीं पाते और इसका शिकार हो जाते हैं। घास के मैदान कम होने से भी यह विलुप्त होने की कगार पर हैं। अप्रैल महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी सोन चिरैया को बचाने के लिए भूमिगत बिजली केबल पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया था।

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