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सरकार ने माना, धीमी पड़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार

Sat, 30 Dec 2017 07:06 AM IST
एजेंसी / नई दिल्ली
एजेंसी / नई दिल्ली Updated Sat, 30 Dec 2017 07:06 AM IST
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The government accepted, Slow down economy
राज्यसभा में अरुण जेटली - फोटो : PTI
आर्थिक सुस्ती के अलग-अलग दावों के बीच सरकार ने माना है कि वित्त वर्ष 2016-17 में देश की विकास दर धीमी पड़ी है। भारत की जीडीपी 2015-16 में 8 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले 2016-17 में गिरकर 7.1 प्रतिशत पर पहुंच गई। यही नहीं, आर्थिक रफ्तार धीमी होने के कारण औद्योगिक क्षेत्र और सर्विस सेक्टर में भी तेजी नहीं आई। शुक्रवार को वित्त अरुण जेटली ने लोकसभा में यह बात कही। 
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वित्त मंत्री के मुताबिक, 2016 में वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी रहने के साथ-साथ जीडीपी के मुकाबले तय निवेश में कमी, कॉर्पोरेट सेक्टर पर दबाव वाली बैलेंस शीट, इंडस्ट्री सेक्टर के क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट और कई वित्तीय कारणों से 2016-17 की आर्थिक विकास दर में कमी आई। विकास दर धीमी पड़ना दर्शाता है कि इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में कम वृद्धि हुई। किसी देश की आर्थिक प्रगति कई कारणों पर निर्भर करती है। इनमें संरचनात्मक, बाहरी, राजकोषीय और मौद्रिक कारक शामिल होते हैं।
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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के हाल के आंकड़ों के मुताबिक, जीडीपी की वृद्धि दर 2014-15, 2015-16 तथा 2016-17 में क्रमश: 7.5 प्रतिशत, 8 प्रतिशत और 7.1 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली और दूसरी तिमाही में जीडीपी क्रमश: 5.7 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी। 
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पढ़ें- "साल 2018 में 7.5 फीसदी हो जाएगी भारत की विकास दर"

जेटली ने कहा, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की अनुमानित मंदी के बावजूद, भारत 2016 में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था रहा। यह 2017 में भी सबसे तेजी से बढ़ रही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, इनमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देना, परिवहन एवं ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ठोस उपाय करना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में व्यापक सुधार करना और कपड़ा उद्योग को विशेष पैकेज देना शामिल है।

विकास के लिए हर क्षेत्र में उठा रहे कदम

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जीडीपी
1. इंफ्रास्ट्रक्चर : जेटली ने कहा कि सरकार ने विकास को बढ़ावा देने के लिए 2017-18 के बजट में कई उपायों की घोषणा की। इसमें आधारभूत ढांचे के विकास के लिए किफायती घरों को इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस दिया गया। हाईवे निर्माण के लिए ज्यादा आवंटन किया गया। तटीय कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित किया गया। हाईवे के विकास के लिए भारतमाला परियोजना शुरू की गई है।
2. बैंकिंग : वित्त मंत्री ने कहा, बैंकों में पूंजी डालने के लिए सरकार ने चरणबद्ध कार्यक्रम तैयार किया है। सरकारी बैंकों में पूंजी का प्रवाह बढ़ाया जाएगा। इससे उन्हें कर्ज देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। समयबद्ध तरीके से दिवालियापन के मामलों को हल करने के लिए दिवाला एवं दिवालियापन संहिता लाई गई है।
3. जीएसटी : वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को लागू करने से विकास को गति देने का अहम अवसर मिला है। इससे व्यापार, व्यवसाय और संबंधित आर्थिक गतिविधियों की बाधाएं दूर हुई हैं।

विपक्ष ने विकास दर में गिरावट को ‘बढ़ाचढ़कर बताया

जेटली ने कहा, विपक्ष ने यह दावा ‘बढ़ाचढ़ाकर’ किया है कि देश की विकास दर अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। तीन साल से लगातार भारत विश्व की सबसे तेज गति से प्रगति करने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है। आईएमएफ और विश्व बैंक ने भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की होड़ में महज 0.1 प्रतिशत से ही दूसरे नंबर पर रहेगा। 
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