फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Education: CJP Seeks State-Wise Data on Government Schools, Questions Poor Infrastructure and Teacher Shortage

CJP Demands: सीजेपी फिर आंदोलन के मूड में, राज्य सरकारों से पूछे छह सवाल, इस बार कौन से मंत्री हैं निशाने पर?

Mon, 24 Aug 2026 04:52 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 24 Aug 2026 04:52 PM IST
सार

सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखा है। उन्होंने स्कूलों में पीने का पानी, शौचालय, कक्षाओं, शिक्षकों और डिजिटल सुविधाओं की स्थिति पर राज्यवार जानकारी मांगी है। दीपके ने सरकारों से शिक्षा को तत्काल प्राथमिकता देने की अपील की है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि पत्र में उन्होंने कौन-कौन सी मांगें रखी हैं।

विज्ञापन
Education: CJP Seeks State-Wise Data on Government Schools, Questions Poor Infrastructure and Teacher Shortage
अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से क्या मांग की? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सोमवार को सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर राज्यवार आंकड़े मांगे। पत्र में उन्होंने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी, मरम्मत और सरकारी फंड के इस्तेमाल से जुड़े सवाल उठाए। दीपके ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा की स्थिति को तत्काल प्राथमिकता के तौर पर देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना जरूरी है।

विज्ञापन

स्कूलों में किन बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाया गया?

दीपके ने सरकारी स्कूलों की ऐसी तस्वीरों का जिक्र किया, जो सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक, कई स्कूलों में पीने का सुरक्षित पानी, काम करने वाले शौचालय, ठीक कक्षाएं और बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच जैसी मूल सुविधाओं को लेकर सवाल हैं। उन्होंने पूछा कि अगर बच्चों को पढ़ने के लिए जरूरी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो उनसे बेहतर शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने राज्यों से स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार करने की अपील की।

विज्ञापन

 

विज्ञापन
विज्ञापन

 

राज्यों से कौन-कौन से आंकड़े मांगे गए?

दीपके ने शिक्षा मंत्रियों को भेजे प्रश्नों में पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों की मरम्मत और नए निर्माण से लेकर शिक्षकों की स्थिति तक की जानकारी मांगी है। उन्होंने पूछा है कि कितने स्कूलों का नवीनीकरण हुआ, कितने स्कूलों को अभी मरम्मत या पूरी तरह दोबारा बनाने की जरूरत है और कितने स्वीकृत शिक्षकीय पद खाली हैं। इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों में स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित हुआ और उसमें से कितना पैसा खर्च किया गया, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।


पत्र में सीजेपी ने सरकार से कौन से सवाल पूछे?

  • पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण किया गया है? साथ ही, वर्तमान में कितने स्कूलों को मरम्मत या पूर्ण नवीनीकरण की आवश्यकता है?
  • सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं? इनमें से कितने पद भरे हुए हैं और कितने पद अभी खाली हैं?
  • पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया? इसमें से वास्तव में कितनी राशि खर्च की गई?
  • हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उचित पहुंच उपलब्ध कराने के लिए राज्य में कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है?
  • पढ़ाने के अलावा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक कार्य और जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं?
  • राज्य के कितने सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग की पर्याप्त सुविधा, साफ शौचालय तथा बच्चों के लिए उचित खेल सुविधाएं और उपकरण उपलब्ध हैं?

क्या सिर्फ शिक्षक और बजट का आंकड़ा ही मांगा गया?

नहीं। प्रश्नावली में स्कूलों की डिजिटल और दूसरी सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं। इसके अनुसार, राज्यों से पूछा गया है कि कितने सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और डिजिटल शिक्षा की पर्याप्त सुविधा है। साफ और काम करने वाले शौचालयों तथा खेल के लिए जरूरी मैदान, उपकरण और दूसरी सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा यह भी पूछा गया है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उचित पहुंच देने के लिए राज्य में और कितने सरकारी स्कूलों की जरूरत है।

शिक्षकों से पढ़ाने के अलावा कौन-कौन से काम कराए जाते हैं?

दीपके ने शिक्षकों की भूमिका से जुड़ा सवाल भी उठाया है। उन्होंने राज्यों से पूछा है कि पढ़ाने के अलावा सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को किन गैर-शैक्षणिक कामों और जिम्मेदारियों में लगाया जाता है। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रश्नावली में शिक्षक संख्या के साथ उनके काम के स्वरूप की जानकारी भी मांगी गई है। सीजेपी का कहना है कि स्कूलों की स्थिति समझने के लिए केवल शिक्षकों की संख्या जानना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि शिक्षक अपना कितना समय पढ़ाने में लगा पा रहे हैं।

सीजेपी ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान क्यों शुरू किया?

सीजेपी ने इस महीने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत संगठन की टीमें अलग-अलग राज्यों के सरकारी स्कूलों में जाकर उनकी स्थिति का जायजा और ऑडिट कर रही हैं। संगठन का कहना है कि वह स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाना चाहता है। यह अभियान ऐसे समय में आगे बढ़ाया जा रहा है, जब सीजेपी पहले कथित नीट अनियमितताओं को लेकर छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर भी सक्रिय रहा है। अब संगठन ने अपना ध्यान सरकारी स्कूलों की बुनियादी स्थिति पर केंद्रित किया है।

दीपके ने इसे राजनीतिक अभियान मानने से क्यों इनकार किया?

अभिजीत दीपके ने कहा कि यह अभियान किसी एक सरकार या केवल राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उनका कहना है कि बच्चे का जन्म किसी भी जगह हुआ हो या उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, उसे सुरक्षित कक्षा, साफ पीने का पानी, काम करने वाला शौचालय, बैठने के लिए बेंच और पढ़ाने वाला शिक्षक मिलना चाहिए। उन्होंने राज्यों से इन सवालों के जवाब सार्वजनिक करने और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण किसी बच्चे को सम्मानजनक शिक्षा से वंचित न होने देने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की।

राज्यों से आंकड़े मांगने के पीछे सीजेपी की दलील क्या है?

दीपके का तर्क है कि समस्या को ठीक करने से पहले यह पता होना जरूरी है कि अलग-अलग राज्यों में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति क्या है। इसी वजह से उन्होंने शिक्षा मंत्रियों से राज्यवार आंकड़े सार्वजनिक करने को कहा है। इसमें स्कूलों की मरम्मत, शिक्षकों के खाली पद, बजट और खर्च, डिजिटल सुविधाएं, शौचालय, खेल सुविधाएं और अतिरिक्त स्कूलों की जरूरत जैसे मुद्दे शामिल हैं। यानी अभियान का जोर केवल शिकायत करने पर नहीं, बल्कि आंकड़ों के जरिए स्कूलों की स्थिति सामने लाने पर है।

अब आगे क्या होगा और असली चुनौती क्या है?

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि राज्य शिक्षा मंत्रालय सीजेपी की प्रश्नावली पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या मांगी गई जानकारी सार्वजनिक की जाती है। अगर आंकड़े सामने आते हैं तो उनसे अलग-अलग राज्यों में सरकारी स्कूलों की बुनियादी स्थिति की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। लेकिन केवल आंकड़े सामने आना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती यह होगी कि जहां पीने के पानी, शौचालय, कक्षाओं, शिक्षकों या डिजिटल सुविधाओं की कमी है, वहां सरकारें कितनी तेजी से सुधार करती हैं। सीजेपी ने इसी वजह से शिक्षा को तत्काल प्राथमिकता देने और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed