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आरक्षण पर चिराग पासवान का दो टूक संदेश: बोले- ये खैरात नहीं, सांविधानिक अधिकार; क्रीमी लेयर पर भी जताई आपत्ति

Mon, 24 Aug 2026 05:14 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 24 Aug 2026 05:14 PM IST
सार

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जाति आधारित आरक्षण को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए इसे संवैधानिक व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने आरक्षण की समीक्षा या उसमें बदलाव की मांगों पर चिंता जताई और कहा कि सामाजिक भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि जाति आधारित आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सांविधानिक अधिकार है। वहीं, विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल आरक्षण खत्म करने के लिए संविधान में संशोधन करना चाहता है।
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उन्होंने कहा, "यह व्यवस्था बाबासाहेब (बी आर आंबेडकर) की सोच के आधार पर स्थापित की गई थी और दुनिया की कोई ताकत इसे कमजोर नहीं कर पाएगी। जब तक मैं, रामविलास पासवान का बेटा, इस सरकार का हिस्सा हूं, मैं इस व्यवस्था से समझौता नहीं होने दूंगा।"
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चिराग बोले- खैरात नहीं, आरक्षण है सांविधानिक अधिकार
दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन से इतर पत्रकारों से बातचीत में पासवान ने कहा, "ये लोग हर चीज में राजनीति देखते हैं। आखिर संघ, भाजपा और हमारी पार्टी सभी एनडीए का हिस्सा हैं या नहीं? क्या किसी के कह देने भर से आरक्षण खत्म किया जा सकता है? यह सांविधानिक अधिकार है।"
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चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण किसी को दी जाने वाली खैरात नहीं है, बल्कि ऐसा सांविधानिक अधिकार है जिसे दुनिया की कोई ताकत कभी खत्म नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जो लोग समीक्षा या सुधार की आड़ में आरक्षण खत्म करने की बात करते हैं, शायद वे यह भी नहीं समझते कि आरक्षण जरूरी क्यों है।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे से जुड़ी घटना का किया जिक्र
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ होने वाले व्यवहार का जिक्र करते हुए पासवान ने कहा कि समाज में जाति आधारित भेदभाव जारी रहने के बावजूद लोग अब भी यह सवाल करते हैं कि उन्हें आरक्षण की जरूरत क्यों है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े हालिया विवाद का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या उनके वहां से जाने के बाद मंच को शुद्ध किया गया था।

उन्होंने उन घटनाओं का भी जिक्र किया, जिनमें दलित दूल्हों को बारात निकालने से रोका जाता है और प्रमुख नेताओं के मंदिर परिसर में जाने के बाद वहां गंगाजल से सफाई की जाती है। उन्होंने इन्हें छुआछूत जारी रहने का सबूत बताया।

क्रीमी लेयर के खिलाफ क्या बोले चिराग पासवान?
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यही वह अनुसूचित जाति समुदाय है जो छुआछूत का शिकार रहा है। संविधान में 'अनुसूचित जाति' का दर्जा इन्हें छुआछूत के कारण ही दिया गया था। उन्हें गांव से बाहर रहने के लिए मजबूर किया जाता था। उन्हें छूना तो दूर, उन्हें देखना भी पाप माना जाता था। क्या यह भेदभाव आज भी मौजूद नहीं है?" पासवान ने कहा कि यही वजह है कि वह आरक्षण में "क्रीमी लेयर" की अवधारणा का विरोध करते हैं।

उन्होंने कहा, "आज कम से कम हम एकजुट हैं और अपनी चिंताओं को आवाज देने में सक्षम हैं। लेकिन जैसे ही उप-वर्गीकरण और 'क्रीमी लेयर' चर्चा में आएगा, हमारी सामूहिक ताकत कम होने लगेगी। और जैसे-जैसे हमारी ताकत कमजोर होगी, आरक्षण खत्म करने की इच्छा रखने वालों को गति मिलेगी।"


सवर्ण के आरक्षण पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियां ऐसे समुदाय हैं जिनकी अलग पोशाक, जीवनशैली और बोलियां हैं और जिन्हें "अनुसूचित" के रूप में वर्गीकृत किया गया है। वहीं, पिछड़ा वर्ग उन लोगों का समूह है जिन्हें अवसर नहीं मिले और जिन्हें आरक्षण व्यवस्था के जरिए सहायता दी गई। पासवान ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने ऊंची जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है।
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