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5 Famous Speeches: सुभाष के तुम मुझे खून दो… से गांधी के करो या मरो तक, स्वतंत्रता संग्राम के पांच यादगार भाषण

Mon, 15 Aug 2022 12:05 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 15 Aug 2022 12:05 AM IST
सार

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के मौके पर अमर उजाला आपको उन पांच भाषणों के बारे में बता रहा है जिन्होंने आजादी की लड़ाई में गहरी छाप छोड़ी। आइये जानते हैं उन भाषणों को...

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The Five famous speeches of Freedom Fighters during Independence Struggle news in hindi
स्वतंत्रता सेनानियों के पांच चर्चित भाषण। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। इस आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं। तब से लेकर अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने कई बदलाव देखे। बदलाव की इन कड़ियों के बीच हम रोज कोई न कोई भाषण सुनते हैं। हालांकि, इतिहास में कुछ भाषण ऐसे भी हैं, जिन्हें पूरा देश आज भी याद कर के जोश से भर उठता है। फिर चाहे वह सुभाष चंद्र बोस का 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारा हो या जवाहर लाल नेहरू द्वारा स्वतंत्रता का एलान। ये सब कुछ एक भाषण के दौरान ही हुआ। 
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इस मौके पर अमर उजाला आपको उन पांच भाषणों के बारे में बता रहा है जिन्होंने आजादी की लड़ाई में गहरी छाप छोड़ी। आइये जानते हैं उन भाषणों को...
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The Five famous speeches of Freedom Fighters during Independence Struggle news in hindi
सुभाष चंद्र बोस (फाइल फोटो) - फोटो : गूगल
1. सुभाष चंद्र बोस
12 सितंबर 1944 को म्यांमार के रंगून स्थित जुबली हॉल में शहीद यतीन्द्र दास के स्मृति दिवस पर नेताजी ने अत्यंत मार्मिक भाषण दिया था। नेताजी विश्व युद्ध के दौरान आजाद हिंद फौज में आजादी का जोश भर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कहा था- "अब हमारी आजादी निश्चित है परंतु आजादी बलिदान मांगती है। स्वतंत्रता संग्राम के मेरे साथियों स्वतंत्रता बलिदान चाहती है। आपने आजादी के लिए बहुत त्याग किया है, किन्तु अभी प्राणों की आहुति देना शेष है। आजादी को आज अपने शीश फूल की तरह बढ़ा देने वाले पुजारियों की आवश्यकता है। ऐसे नौजवानों की आवश्यकता है, जो अपना सिर काट कर स्वाधीनता की देवी को भेंट चढ़ा सकें। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। खून भी एक दो बूंद नहीं इतना कि खून का एक महासागर तैयार हो जाये और उसमें मैं ब्रिटिश साम्राज्य को डुबो दूं।"

The Five famous speeches of Freedom Fighters during Independence Struggle news in hindi
prayagraj news : पंडित जवाहर लाल नेहरू (फाइल फोटो)। - फोटो : prayagraj
2. जवाहर लाल नेहरू
नेहरू ने 14 अगस्त की मध्यरात्रि में वायसराय लॉज (मौजूदा राष्ट्रपति भवन) से ऐतिहासिक भाषण 'ट्रिस्ट विद डेस्टिनी' दिया था। इस भाषण को पूरी दुनिया ने सुना था लेकिन एक शख्स ऐसे थे जिन्होंने भारत को आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी लेकिन उस दिन वो बिना भाषण सुने ही 9 बजे सोने चले गए थे । वो कोई और नहीं बल्कि महात्मा गांधी थे।     
 
वायसराय लॉज से पंडित नेहरू ने अपने भाषण की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा था- ‘कई साल पहले हमने भाग्य को बदलने का प्रयास किया था और अब वो समय आ गया है जब हम अपनी प्रतिज्ञा से मुक्त हो जाएंगे। पूरी तरह से नहीं लेकिन ये महत्वपूर्ण है। आज रात 12 बजे जब पूरी दुनिया सो रही होगी तब भारत स्वतंत्र जीवन के साथ नई शुरुआत करेगा।‘

‘ये ऐसा समय होगा जो इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है। पुराने से नए की ओर जाना, एक युग का अंत हो जाना,अब वर्षों से शोषित देश की आत्मा अपनी बात कह सकती है। यह संयोग है कि हम पूरे समर्पण के साथ भारत और उसकी जनता की सेवा के लिए प्रतिज्ञा ले रहे हैं। इतिहास की शुरुआत के साथ ही भारत ने अपनी खोज शुरू की और न जाने कितनी सदियां इसकी भव्य सफलताओं और असफलताओं से भरी हुई हैं।’
‘समय चाहे अच्छा हो या बुरा, भारत ने कभी इस खोज से नजर नहीं हटाई, कभी अपने उन आदर्शों को नहीं भुलाया जिसने आगे बढ़ने की शक्ति दी। आज एक युग का अंत कर रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ भारत खुद को खोज रहा है। आज जिस उपलब्धि की हम खुशियां मना रहे हैं, वो नए अवसरों के खुलने के लिए केवल एक कदम है। इससे भी बड़ी जीत और उपलब्धियां हमारा इंतजार कर रही हैं। क्या हममे इतनी समझदारी और शक्ति है जो हम इस अवसर को समझें और भविष्य में आने वाली चुनौतियों को स्वीकार करें?’ 
 
नेहरू ने अपने भाषण में कहा था कि भविष्य में हमें आराम नहीं करना है और न चैन से बैठना है बल्कि लगातार कोशिश करनी है। जिससे हम जो बात कहते हैं या कह रहे हैं उसे पूरा कर सकें। भारत की सेवा का मतलब है करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है अज्ञानता और गरीबी को मिटाना, बीमारियों और अवसर की असमानता को खत्म करना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा रही है कि हर आंख से आंसू मिट जाएं।
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The Five famous speeches of Freedom Fighters during Independence Struggle news in hindi
बाल गंगाधर तिलक पुण्यतिथि - फोटो : Facebook
3. बाल गंगाधर तिलक
देशवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की अहम भूमिका रही। उनके एक भाषण ने तो स्वराज को लेकर पूरे देश की चेतना को जगा दिया था। यह भाषण उन्होंने जेल से छह साल बाद बाहर आने के बाद 1917 में नासिक में दिया था। इस भाषण में उनका एक नारा- 'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे' सबसे ज्यादा चर्चित नारों में से एक है। 
 
अपने संबोधन के दौरान तिलक ने कहा था, "बेशक मेरी उम्र बहुत जवां नहीं है लेकिन मेरे जज़्बे में आज भी वही आग है। आज मैं आप से जो कुछ भी कहूंगा वो आपके लिए  हमेशा प्रेरणादायक होगा। ये शरीर भले ही ढल जाए, बूढ़ा हो जाए, जर्जर हो जाए लेकिन हमारी प्रतिज्ञा अमर होती है। ठीक उसी तरह हो सकता है हमारे स्वराज अभियान में थोड़ी शिथिलता आ जाए लेकिन इसके पीछे की सोच और उद्देश्य शाश्वत है जो कभी खत्म नहीं होगी और हम स्वतंत्रता हासिल कर के रहेंगे।”
 
“स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। मेरा स्वराज जबतक मेरे अंदर जिंदा है मैं कमज़ोर या बूढ़ा नहीं हो सकता। कोई भी हथियार इस हौसले को नहीं पस्त कर सकता, कोई आग इसे जला नहीं सकती, पानी की धारा इसे भिगो नहीं सकती, हवा के तेज झोंके भी इसे सुखा नहीं सकते। हम स्वराज की मांग करते हैं और हम इसे लेकर रहेंगे। जो विज्ञान स्वराज पर खत्म होती है वही राजनीति की भी विज्ञान होनी चाहिए, वो नहीं जो ग़ुलामी की ओर ले जाए। राजनीति का विज्ञान ही देश का वेद है। मैं आपकी अंतरआत्मा को जगाने आया हूं। मैं आप सबको झूठे, मक्कारों और ठगों के झांसे से बाहर निकालने आया हूं।”
 
“स्वराज का मतलब कौन नहीं जानता, कौन स्वराज नहीं चाहता। अगर मैं आपके घर जबरन घुस आउं और आपके किचन को कब्ज़े में ले लूं तो क्या आप इसकी इजाज़त देंगे?  नहीं ना, मेरे घर की तमाम मसलों पर मेरा अधिकार होना चाहिए। एक सदी गुजर गई लेकिन अंग्रेजी हुकूमत अब भी हमें स्वराज के काबिल नहीं मानती, लेकिन अब हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे।” 

“जब इंग्लैंड भारत का इस्तेमाल कर बेल्जियम जैसे छोटे राष्ट्र को बचाना चाहता है फिर वो हमें किस मुंह से स्वराज के काबिल नहीं मानता? जो लोग हमें गलत ठहरा रहे हैं वो लालची और हमारे विरोधी हैं, लेकिन इससे विचलित होने की जरुरत नहीं है क्योंकि बहुत लोग ईश्वर के निर्णय में भी खोट निकालते हैं। हमें इस वक्त बिना कुछ और सोचे हुए देश की आत्मा की रक्षा में जुटना होगा। हमारे देश का भविष्य और समृद्धि अपने जन्मसिद्ध अधिकार यानी स्वराज में नीहित है। कांग्रेस ने स्वराज का प्रस्ताव पास कर दिया है। "

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महात्मा गांधी ने गंगा में गंदगी पर जताई थी चिंता - फोटो : facebook
4. महात्मा गांधी
महात्मा गांधी ने 1942 में भारत में ब्रिटिश शासन को सबसे सशक्त नारे ‘भारत छोड़ो’ के साथ चुनौती दी थी। उन्होंने भारत के लोगों से कहा था कि ‘करो या मरो’। यह ऐतिहासिक आह्वान गांधीजी ने 8 अगस्त, 1942 को किया था। इससे एक दिन पहले उन्होंने भाषण दिया था। इसमें गांधीजी ने ब्रिटेन द्वारा भारत छोड़ने की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, "‘‘इससे पहले कि आप इस प्रस्ताव पर विचार करें, मैं आपके सामने एक या दो चीजें स्पष्ट करना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि आप दो चीजों को साफतौर पर समझ लें और उनके प्रति उसी नजरिए से विचार करें, जिस नजरिए से मैं उन्हें रख रहा हूं। ऐसे लोग हैं जो मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं वही व्यक्ति हूं, जो 1920 में था अथवा मेरे में कुछ परिवर्तन आ गया है। आपका यह सवाल करना सही है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं वही व्यक्ति हूं, जो 1920 में था। अंतर सिर्फ  इतना है कि मैं 1920 की तुलना में काफी मजबूत हो गया हूं।”
 
उन्होंने आगे कहा, ‘‘बहुत सारे लोग हैं जिनके दिल में ब्रिटेन के प्रति नफरत है। मैंने लोगों को यह कहते हुए सुना है कि वे उनसे तंग आ चुके हैं। आम आदमी का दिमाग ब्रिटिश सरकार और ब्रिटेन के लोगों के बीच अंतर नहीं करता है। उनके लिए वे दोनों एक ही हैं। ऐसे भी लोग हैं, जो जापानियों के उदय को नहीं समझते हैं। उनके लिए शायद जापान का अर्थ स्वामी बदलना है। लेकिन यह एक खतरनाक स्थिति है. आपको इसे अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए।’’
 
गांधीजी ने लोगों को आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा ‘‘मेरे लोकतंत्र का अर्थ है, हर एक व्यक्ति अपना स्वामी खुद है। मैंने काफी इतिहास पढ़ा है और मैंने कहीं ऐसा प्रयोग नहीं देखा, जहां अहिंसा द्वारा इतने बड़े पैमाने पर लोकतंत्र की स्थापना का कार्य हुआ हो। जब आप इन चीजों को समझ लेंगे, तो हिंदू और मुसलमान के बीच अंतर भूल जाएंगे।’’

The Five famous speeches of Freedom Fighters during Independence Struggle news in hindi
सरदार पटेल। - फोटो : Amar Ujala
5. सरदार वल्लभ भाई पटेल
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने पंडित मोतीलाल नेहरू के अवसान के बाद जनता को संबोधित किया था। यहां उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की फांसी का मुद्दा भी उठाया था। इस भाषण के जरिए ही पटेल ने देश के युवाओं और किसानों को स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने कहा था, "नौजवान भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को थोड़े ही दिन पहले फांसी हुई है। इससे देश बेहद उत्तेजित हो गया है। इन युवकों की कार्य-पद्धति से मुझे वास्ता नहीं है। मैं यह नहीं मानता कि और किसी उद्देश्य से हत्या करने की अपेक्षा देश के लिए हत्या करना कम निद्य है। फिर भी भगतसिंह और उसके साथियों की देशभक्ति, हिम्मत और कुर्बानी के सामने मेरा सिर झुक जाता है। इन युवकों को दी गई फांसी की सजा को देश निकाले में बदल देने की लगभग सारे देश की मांग होते हुए भी सरकार ने उन्हें फांसी दे दी है। इससे प्रकट होता है कि मौजूदा शासन तंत्र कितना हृदयहीन है।”
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