Seethakka: तेलंगाना की नई मंत्री सीताक्का की कहानी; नक्सली बनीं, भाई-पति को खोया; ऐसे हुई राजनीति में एंट्री
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
तेलंगाना की नई अनुमुला रेवंत रेड्डी सरकार में दो महिला विधायकों को भी मंत्री बनाया गया है। मुलुग सीट से चुनी गईं सीताक्का ने जब शपथ ली तो, जनता से अचानक शोर उठा। हालांकि, उनकी कहानी भी फिल्मी सीन की तरह ही है।
आइये जानते हैं सीताक्का के बारे में...
10वीं की पढ़ाई करके नक्सलियों के साथ चली गईं, भाई-पति को गंवाया
दसवीं कक्षा की पढ़ाई करने के बाद सीताक्का 1988 में नक्सलियों के साथ जुड़ गई थीं। इसके साथ नक्सलियों के समूह में वह कमांडर बन गईं। इस बीच नक्सलवाद में शामिल उनके भाई और पति की पुलिस मुठभेड़ों में मौत हो गई। अंततः चंद्रबाबू सरकार में उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण के बाद आदिवासियों के लिए शुरू किया काम
आत्मसमर्पण करने के बाद सीताक्का ने जगलों में रहने वाली आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वह आदिवासी इलाकों में लोकप्रिय हो गईं और 2009 में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने उन्हें विधानसभा का टिकट दे दिया। उन्होंने मुलुग सीट से पहली बार चुनाव जीता और विधानसभा पहुंच गईं। हालांकि, तेलंगाना बनने के बाद उन्होंने टीडीपी को अलविदा कह दिया और रेवंत रेड्डी के साथ कांग्रेस में आ गईं।
चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई
आदिवासी नेता सीताक्का का भी नाम तेलंगाना के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहा। आज उन्होंने तेलंगाना कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली। मुलुग सीट से उतरीं दनसारी अनसुया उर्फ सीताक्का ने 33,700 वोटों से चुनाव जीतकर यहां हैट्रिक लगाई है।
2022 में पूरी की पीएचडी
सार्वजनिक जीवन में भारी व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। 2022 में कांग्रेस विधायक ने ओस्मानिया विश्विद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी की डिग्री हासिल की। सीताक्का के पास 82 लाख रुपये की संपत्ति है। इनमें नकदी के रूप में उनके पास एक लाख रुपये हैं। इसके साथ ही कांग्रेस नेता के पास 60 ग्राम के सोने के आभूषण हैं जिसकी कीमत तीन लाख रुपये है।