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Railway Coal Rake: दिखने लगा रेलवे के कोयला रैक का असर, सप्लाई की कमी से बढ़ सकती है स्टील की कीमत

Tue, 28 Dec 2021 07:09 PM IST
Amit Mandal डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली। 
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली।  Published by: Amit Mandal Updated Tue, 28 Dec 2021 07:09 PM IST
सार

अमर उजाला को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिंदल स्टील जैसी बड़ी कंपनियां पिछले दो महीने से रेल रैक की कमी से जूझ रही हैं।

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The effect of railway's coal rake is visible, due to lack of supply, the price of steel may increase
भारतीय रेलवे कोयला आपूर्ति - फोटो : social media

विस्तार

देश के बिजली संयंत्रों को कोयला पहुंचाने में लगाए गए रेल रैक का असर अब स्टील कंपनियों पर दिखाई देने लगा है। भारतीय रेलवे द्वारा रेल रैक को कोयले की ढुलाई में लगाए जाने से देश की बड़ी स्टील कंपनियां अब रैक की कमी से जूझ रही हैं। कंपनियों का कहना है कि सीजन के समय में रेल रैक की कमी का असर व्यापार पर दिखाई दे रहा है। कंपनियों में तैयार माल समय से बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अगर आने वाले दिनों तक ऐसी ही कमी बनी रहती है तो इससे स्टील की कीमतों में इजाफा हो सकता है।

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अमर उजाला को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिंदल स्टील जैसी बड़ी कंपनियां पिछले दो महीने से रेल रैक की कमी से जूझ रही हैं। कंपनी प्रतिदिन करीब 7 रैक इस्तेमाल करती थी लेकिन अब दो से तीन रैक ही कंपनी को मिल रहे हैं। कंपनी के रेल रैक में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी हो गई है। रैक की कमी होने की वजह से कंपनियों का तैयार माल उत्तर भारत के प्रमुख बाजार राजस्थान और पंजाब तक समय से नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि कंपनियों की इस बारे में रेलवे से बातचीत चल रही है, जिससे कि स्टील संयंत्रों को रैक की आपूर्ति सामान्य हो सके। जिंदल स्टील एंड पावर का अंगुल में संयंत्र है, जबकि सरकारी कंपनी स्टील अथॉलिटी आफ इंडिया (सेल) का राउरकेला और टाटा के तीन संयंत्र कलिंगनगर, जमशेदपुर और अंगुल में हैं।
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कंपनियों के सामने भंडारण रखना चुनौती
देश के सभी स्टील प्लांट्स में बड़े बड़े गोदाम हैं। इनमें माल रखने की एक तय क्षमता है। अगर समय से माल नहीं उठाया जाता है तो भंडारण और उसे खाली करना कंपनियों के सामने एक बड़ी समस्या बन जाएगी और यह एक लॉजिस्टिक कठिनाई होगी। इस मामले में रेलवे के विश्वस्त सूत्रों कहना है कि देश में रेल रैक की आपूर्ति अभी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एचएलईसी) के दिशानिर्देशों के मुताबिक की जा रही है। इस समिति का गठन बिजली संयंत्रों पर दबाव दूर करने के मकसद से की गई थी।
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परिचालन से जुड़े एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, पिछले सप्ताह तक गैर बिजली क्षेत्र में रैक की कमी की समस्या नजर आई थी। फिलहाल अब ऐसा कुछ नहीं है। एचएलईसी रैक की तैनाती ताप बिजली संयंत्रों के लिए करने पर प्राथमिकता दे रही है, जिससे भविष्य में होने वाले किसी भी बिजली संकट को टाला जा सके।


सड़क का विकल्प कंपनियों के लिए महंगा सौदा
इस बीच रेलवे के अलावा सड़क मार्ग को अपनाना स्टील कंपनियों के लिए महंगा सौदा है। कंपनियों का तर्क है कि तैयार माल का करीब 70 प्रतिशत रेल के माध्यम से भेजा जाता है और बाकी सड़कों के माध्यम से। सड़क मार्ग को अपनाना भी चुनौती है क्योंकि सड़कें खराब हैं और साथ ही इससे ढुलाई का वक्त बढ़ने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत में भी बढ़ोतरी होती है। आने वाले कुछ दिनों तक अगर रेल रैक की कमी बनी रहती है तो इससे आने वाले महीनों में स्टील की कीमतें बढ़ सकती हैं। पिछले 3 महीने में स्टील की कीमतों में 2,500 रुपये प्रति टन की गिरावट आई है, जबकि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमत 66,000 रुपये प्रति टन है।

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