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कमजोर वर्ग की बड़ी राजनीतिक ताकत, एक नजर में देखिए दलित का प्रभुत्व

Tue, 03 Apr 2018 04:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 03 Apr 2018 04:14 PM IST
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The dominant political power of the weaker class, see the domination of Dalit
भारत बंद के दौरान सोमवार को 15 राज्यों में प्रदर्शन हुए। इसमें से हिंदी पट्टी के 10 राज्य ऐसे हैं, जहां बवाल ज्यादा हुआ। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इन राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां दलितों का प्रभाव काफी ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भी अपने फैसले को बदलने से इनकार कर दिया गया है। ऐसे में एक नजर इस पर डालने की जरूरत है कि देश में दलित आबादी का कितना प्रभुत्व है। 
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बड़ी आबादी 

देश में 24 फीसदी दलित आबादी है, 2011 की जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक 25 करोड़ दलितों की संख्या है। 1241 जातीय समूह अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित हैं।
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लोकसभा सीट और राजनीतिक ताकत

देश में 543 लोकसभा सीट हैं 
80 सीट एससी/एसटी के लिए आरक्षित
150 से ज्यादा सीटों पर इनका प्रभाव है
131 सांसद देश में दलित हैं

इन राज्यों में सबसे ज्यादा प्रभाव

पंजाब : दलित आबादी वाला सबसे बड़ा राज्य। 31.9 प्रतिशत आबादी दलित और 34 सीट आरक्षित। 
उत्तर प्रदेश : 20.17 प्रतिशत दलित आबादी और 14 सीट आरक्षित। 
मध्य प्रदेश : दलित आबादी छह फीसदी और आदिवासियों की आबादी 15 प्रतिशत। 
हिमाचल : 25.2 फीसदी जनसंख्या।
हरियाणा में 20.2 प्रतिशत आबादी। 
इन राज्यों में भी बड़ी ताकत : पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु,  आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और राजस्थान में छह से दस फीसदी के बीच दलित हैं।

पिछले दो साल में दलितों के खिलाफ अपराध बढ़े

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2016 के बीच दलितों के खिलाफ होने वाला अपराध में एक प्रतिशत का इजाफा हुआ। मध्य प्रदेश में 49 प्रतिशत, हरियाणा में 35 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 20 फीसदी, गुजरात में 21 फीसदी और केरल में 14 फीसदी अपराध बढ़े। हालांकि झारखंड में 42 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 32, बिहार में 28, राजस्थान में 25 और तमिलनाडु में 15 फीसदी केस कम हुए। 
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2016 में 47 हजार केस दर्ज

2016 में दलितों के खिलाफ अपराध के 47,338 केस देश भर में दर्ज हुए। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने लोकसभा में मंगलवार को यह जानकारी दी है। उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ों के आधार पर बताया कि 40,774 केस अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुए। वहीं बाकी मामले अन्य धाराओं में दर्ज हुए। इसमें से 78.3 फीसदी केस में चार्जशीट फाइल हुई और 25.8 फीसदी मामले में दोषी करार दिया गया। 
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