एलजी को पावर: क्या भाजपा ने मान लिया है 'दिल्ली दूरस्थ', बैक फायर कर सकता है उपराज्यपाल की ताकत बढ़ाने का फैसला!
- भाजपा के ही कुछ नेता फैसले को उचित नहीं मान रहे, कहा- इससे अपनी हर नाकामी को उपराज्यपाल के पीछे छिपाने का केजरीवाल को मिल गया बहाना
- कुछ नेताओं की परेशानी, अब जनता से कैसे कहें कि 30 साल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए क्यों किया था संघर्ष
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विस्तार
दिल्ली के उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ाने वाला बिल 24 मार्च को राज्यसभा से भी पास हो गया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। अब राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होते ही यह कानून बन जायेगा। आम आदमी पार्टी इसके विरुद्ध न्यायिक समीक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रही है। लेकिन इसी बीच इस नये कानून को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने जनता को यह बताना शुरू कर दिया है कि यह कानून लाकर भाजपा ने स्वयं मान लिया है कि वह अब दिल्ली में कभी सरकार नहीं बना सकेगी। पार्टी इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अरविंद केजरीवाल की बड़ी जीत बताकर उन्हें नरेंद्र मोदी के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।
सिसोदिया ने कहा- केजरीवाल पीएम मटेरियल
जैसी उम्मीद की जा रही थी, आम आदमी पार्टी ने अभी से इस मुद्दे पर खेलना शुरू कर दिया है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि दिल्ली में भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, दिल्ली के विधानसभा चुनाव प्रचार में पार्टी ने अपने सभी नेताओं को झोंक दिया, लेकिन इसके बाद भी भाजपा जनता के मन से अरविंद केजरीवाल को हटा नहीं पाई। उन्होंने कहा कि इसी से यह साबित होता है कि जनता पीएम नरेंद्र मोदी के विकल्प के रूप में अरविंद केजरीवाल को देखना चाहती है।
निर्णय का विरोध भी
उपराज्यपाल की शक्तियों को बढ़ाने के इस मुद्दे का भाजपा ने स्वागत किया है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा है कि इससे दिल्ली में शक्तियों के बंटवारे की दुविधा खत्म हो गई है। इससे दिल्ली का विकास होगा। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि केंद्र के इस कदम से पार्टी के सभी नेता खुश हैं। पार्टी में अनेक नेता ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि इस कदम से भाजपा को लाभ की बजाय नुकसान हो सकता है और यह फैसला बैक फायर भी कर सकता है।
भाजपा नेता जगदीश ममगाई ने अमर उजाला से कहा कि इस कानून को पास करके पार्टी ने केजरीवाल को हमेशा के लिए एक ‘एक्सक्यूज’ दे दिया है। अब वे कोई भी काम नहीं भी करेंगे तो भी जनता के सामने उनके पास हमेशा यही बहाना होगा कि एलजी और केंद्र सरकार उन्हें कोई काम करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।
भाजपा नेता के मुताबिक़ अरविंद केजरीवाल ने पिछले छह साल में कोई बड़ी दूरदर्शी योजना पेश करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने केवल मुफ्त बिजली, पानी की लोकलुभावनी योजनाएं लागू की हैं। लेकिन ध्यान रहे कि वे इन योजनाओं को तभी लागू कर पाए, जबकि दिल्ली को जीएसटी के कारण भारी मात्रा में राजस्व प्राप्त हुआ। यानी केंद्र की योजना (जीएसटी) से मिले फायदे को केजरीवाल ने योजनाओं के रूप में ढालकर जनता के सामने पेश कर दिया। लेकिन उन्होंने दिल्ली के विकास में कोई मूलभूत ढांचागत परिवर्तन अभी तक नहीं किया है।
ममगाई के मुताबिक केजरीवाल की ये लोकलुभावनी नीतियां समय के साथ जल्दी ही अपना आकर्षण खो देतीं और किसी नई ठोस पहल की कमी के अभाव में भाजपा को अपनी जगह बनाने का अवसर मिल सकता था। लेकिन उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने के रूप में पार्टी ने केजरीवाल को ऐसा बहाना पकड़ा दिया है जिससे उबरना पार्टी के लिए मुश्किल होगा।
पार्टी के एक पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि हमारे सामने साल भर के अंदर ही नगर निगम के चुनाव हैं। हमें जनता के बीच जाना है। अब हम जनता के सामने यह बात कैसे सही साबित कर पायेंगे कि जिस काम के लिए हमने 30 साल धरना-प्रदर्शन किया, आज उसी बात को हमारी ही सरकार ने गलत साबित कर दिया।
नेता के मुताबिक़, निगम में वर्तमान पार्षदों के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा है, लेकिन इसके बाद भी हम मजबूती से लड़ते तो कुछ बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। लेकिन इस कानून के बाद जनता का सामना करना मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि अगर एक बार इस कानून के बाद भी आम आदमी पार्टी को निगम की सत्ता मिल गई, तो इससे और अधिक उल्टा संदेश जायेगा कि केजरीवाल की शक्तियां कम करने के बाद भी भाजपा केजरीवाल को रोक नहीं पाई। नेता के मुताबिक़ इससे केजरीवाल सच में अजेय की स्थिति में हो जायेंगे जिसका राष्ट्रीय स्तर पर बेहद नकारात्मक सन्देश जायेगा।
इस ताकत का उपराज्यपाल ने क्या उपयोग किया
वर्तमान टीम में एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली के सन्दर्भ में आज भी उपराज्यपाल के पास कानून-व्यवस्था, भूमि सुधार और नगर निगमों के प्रशासन के सर्वोच्च के रूप में शक्तियां हैं। लेकिन नजीब जंग से लेकर अनिल बैजल तक कोई भी उपराज्यपाल इन शक्तियों का समुचित उपयोग कर कोई आदर्श स्थापित करने में नाकाम साबित हुआ है। सच्चाई यह है कि दिल्ली में आये दिन दुष्कर्म, लूटपाट और छिनैती की घटनाएं हो रही हैं। दिल्ली पुलिस (उपराज्यपाल) इसमें से किसी पर भी अंकुश लगाने में नाकाम रही।
उपराज्यपाल के ही अन्दर भूमि सुधार और निगम भी आते हैं। लेकिन उपराज्यपाल ने गरीबों को आवास उपलब्ध कराने से लेकर दिल्ली की स्वच्छता सुनिश्चित करने तक कोई काम नहीं कर पाए। ऐसे में उसी उपराज्यपाल को और अधिक शक्तियां देने का कोई तुक उन्हें समझ नहीं आता है।
केजरीवाल नहीं कर पायेंगे ये काम
हालांकि, केंद्र के इस काम को सही बताने वाले भाजपा नेताओं की भी कमी नहीं है। दिल्ली प्रदेश भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली ने देखा है कि किस प्रकार अरविंद केजरीवाल ने कन्हैया कुमार और उमर खालिद जैसे लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी। लेकिन अब सभी प्रमुख शक्तियों के उपराज्यपाल के पास आ जाने से अब केजरीवाल ऐसा नहीं कर पाएंगे।
दिल्ली भाजपा के महामंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली से मिले राजस्व को गुजरात, गोवा और उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए इस्तेमाल कर रही थी। उन्हें इसकी किसी कीमत पर अनुमति नहीं दी जा सकती है। उपराज्यपाल के पास शक्तियों के केन्द्रित होने से वे जनता का काम तो कर पाएंगे, लेकिन उसके नाम पर कोई गलत काम नहीं कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि इस दृष्टि से देखें तो समझ आता है कि दिल्ली के विकास के लिए यह निर्णय कितना जरुरी था।