{"_id":"6880e775a2bc8aaa16020970","slug":"thane-court-testimony-of-five-year-old-child-sent-accused-prison-under-pocso-act-pronounced-sentence-2025-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Thane: पांच साल के बच्चे की गवाही ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत काल कोठरी में पहुंचाया, कोर्ट ने सुनाई सजा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Thane: पांच साल के बच्चे की गवाही ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत काल कोठरी में पहुंचाया, कोर्ट ने सुनाई सजा
Wed, 23 Jul 2025 07:16 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 23 Jul 2025 07:16 PM IST
सार
ठाणे की एक विशेष अदालत ने नाबालिग लड़के की गवाही के आधार पर रविकुमार रोहिदास को पॉक्सो एक्ट के तहत पांच साल की सजा सुनाई। आरोपी ने पांच वर्षीय बच्चे को चॉकलेट का लालच देकर यौन उत्पीड़न किया था। कोर्ट ने चिकित्सा साक्ष्यों और बच्चे की विश्वसनीय गवाही को मान्यता दी, हालांकि गंभीर यौन संबंध के आरोपों से उसे बरी कर दिया गया।
विज्ञापन
पांच साल के बच्चे की गवाही ने आरोपी को पहुंचाया जेल
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नाबालिग लड़के की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए, एक विशेष अदालत ने पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक व्यक्ति को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया। उसे पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश डी.एस. देशमुख ने रविकुमार रोहिदास पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जबकि उसे प्रकृति के विरुद्ध शारीरिक संबंध (आईपीसी की धारा 377) और गंभीर यौन उत्पीड़न (पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दंडनीय धारा 5-एम) से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया। बता दें, जुर्माने की राशि पीड़ित को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि उस समय 24 वर्षीय रोहिदास ने कथित तौर पर पांच साल के लड़के को 13 मई, 2022 को अपने साथ ले जाने के लिए चॉकलेट का लालच दिया था। अगले दिन बच्चा घायल अवस्था में घर लौटा और बताया कि रोहिदास उसे एक नाले के पास ले गया और उसके गाल पर पत्थर से वार किया फिर उसे धमकाया। उसके कपड़े उतार दिए और यौन इरादे से उसके गुप्तांगों को छुआ।
विशेष अदालत ने सात गवाहों से की पूछताछ
इस मामले में अदालत ने सात गवाहों से की पूछताछ की. वहीं न्यायाधीश ने कहा कि पीड़ित बच्चे की एकमात्र गवाही ही यह साबित करने के लिए पर्याप्त होगी कि आरोपी ने यौन इरादे से उस पर गंभीर यौन हमला किया था। इसके लिए जज ने पीड़ित के चेहरे पर खरोंचों सहित चोटों की पुष्टि करने वाले चिकित्सा साक्ष्यों का हवाला दिया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 'टैक्स के नाम पर हो रहा अत्याचार', जीएसटी नोटिस को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का सिद्धारमैया पर वार
शारीरिक संबंध के आरोपों से किया बरी
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे को लगाए गए टांके किसी नुकीली चीज से वार का संकेत देते हैं और बचाव पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि चोटें खेलने से हो सकती हैं। हालांकि, अदालत ने रोहिदास को शारीरिक संबंध और यौन संबंध के आरोपों से बरी कर दिया। न्यायाधीश ने कहा, ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने पीड़ित बच्चे के साथ शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही, यह भी साबित नहीं हुआ है कि उसने पीड़ित बच्चे पर गंभीर यौन प्रवेश किया था।
ये भी पढ़ें- 'वाल्मीक कराड गिरोह 2023 में बीड में महादेव मुंडे की हत्या के पीछे', पूर्व सहयोगी का दावा
पुराने विवाद का दावे को कोर्ट ने किया खारिज
इसके साथ ही जज ने पक्ष की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि रोहिदास को उसके और बच्चे के परिवार के बीच पुराने विवाद के कारण झूठा फंसाया गया था। आदेश में कहा गया कि पीड़िता के पिता के साथ हुए पिछले झगड़े के कारण झूठे फंसाए जाने के आरोपी के दावे को और बच्चे की चोटों को देखते हुए इसे असंभव मानते हुए खारिज कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि रोहिदास को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और भारतीय दंड संहिता की अपहरण और जानबूझकर चोट पहुँचाने से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। अदालत ने अपराध की प्रकृति, आरोपी के तर्कों और जेल में उसकी नजरबंदी को देखते हुए उदार रुख अपनाया।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष ने कहा कि उस समय 24 वर्षीय रोहिदास ने कथित तौर पर पांच साल के लड़के को 13 मई, 2022 को अपने साथ ले जाने के लिए चॉकलेट का लालच दिया था। अगले दिन बच्चा घायल अवस्था में घर लौटा और बताया कि रोहिदास उसे एक नाले के पास ले गया और उसके गाल पर पत्थर से वार किया फिर उसे धमकाया। उसके कपड़े उतार दिए और यौन इरादे से उसके गुप्तांगों को छुआ।
विज्ञापन
विशेष अदालत ने सात गवाहों से की पूछताछ
इस मामले में अदालत ने सात गवाहों से की पूछताछ की. वहीं न्यायाधीश ने कहा कि पीड़ित बच्चे की एकमात्र गवाही ही यह साबित करने के लिए पर्याप्त होगी कि आरोपी ने यौन इरादे से उस पर गंभीर यौन हमला किया था। इसके लिए जज ने पीड़ित के चेहरे पर खरोंचों सहित चोटों की पुष्टि करने वाले चिकित्सा साक्ष्यों का हवाला दिया।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- 'टैक्स के नाम पर हो रहा अत्याचार', जीएसटी नोटिस को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का सिद्धारमैया पर वार
शारीरिक संबंध के आरोपों से किया बरी
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे को लगाए गए टांके किसी नुकीली चीज से वार का संकेत देते हैं और बचाव पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि चोटें खेलने से हो सकती हैं। हालांकि, अदालत ने रोहिदास को शारीरिक संबंध और यौन संबंध के आरोपों से बरी कर दिया। न्यायाधीश ने कहा, ऐसा कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने पीड़ित बच्चे के साथ शारीरिक संबंध बनाए। साथ ही, यह भी साबित नहीं हुआ है कि उसने पीड़ित बच्चे पर गंभीर यौन प्रवेश किया था।
ये भी पढ़ें- 'वाल्मीक कराड गिरोह 2023 में बीड में महादेव मुंडे की हत्या के पीछे', पूर्व सहयोगी का दावा
पुराने विवाद का दावे को कोर्ट ने किया खारिज
इसके साथ ही जज ने पक्ष की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि रोहिदास को उसके और बच्चे के परिवार के बीच पुराने विवाद के कारण झूठा फंसाया गया था। आदेश में कहा गया कि पीड़िता के पिता के साथ हुए पिछले झगड़े के कारण झूठे फंसाए जाने के आरोपी के दावे को और बच्चे की चोटों को देखते हुए इसे असंभव मानते हुए खारिज कर दिया गया।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि रोहिदास को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 और भारतीय दंड संहिता की अपहरण और जानबूझकर चोट पहुँचाने से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। अदालत ने अपराध की प्रकृति, आरोपी के तर्कों और जेल में उसकी नजरबंदी को देखते हुए उदार रुख अपनाया।