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Pak and Afgan पाक मौलाना के सुझाव पर भड़का तालिबान, बोला-जिन्ना का नाम बदलना चाहिए क्योंकि वह एक शराबी थे

Wed, 21 Sep 2022 03:05 PM IST
वीरेंद्र शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Wed, 21 Sep 2022 03:05 PM IST
सार

तालिबान ने कहा कि पाकिस्तान जानबूझकर सीमा पार से फलों के निर्यात में देरी करता है। तालिबान ने कहा कि कराची और ग्वादर बंदरगाहों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अफगानिस्तान ने चाबहार बंदरगाह का इस्तेमाल करने के लिए ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

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tension between pakistan and afghanistan taliban leaders gave hard reaction to pak after Maulana suggestion
Muhammad Ali Jinnah

विस्तार

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से डूरंड लाइन विवाद की जड़ बनी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों देशों एक-दूसरे पर तीखी प्रतिक्रिया देते रहते हैं।  लेकिन इस बार विवाद की जड़ अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान मोहम्मद नबी है।  पाकिस्तान के एक मौलाना ने अफगान क्रिकेट टीम के कप्तान नबी को नाम बदलने का सुझाव दिया।
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मौलाना के सुझाव पर आगबबूला हुए तालिबान अधिकारी मुबीन खान ने कहा कि पाकिस्तान जानबूझकर सीमा पार से हमारे फलों के निर्यात में देरी करता है। भगवान का शुक्र है कि हमें अब कराची या ग्वादर बंदरगाहों की जरूरत नहीं पड़ेगी। चाबहार बंदरगाह का उपयोग करने के लिए ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान हमेशा अफगानिस्तान को नुकसान पहुंचाता है, चाहे कोई भी सत्ता में हो।
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ट्वीटर हैंडल पर शेयर किए गए वीडियो में तालिबानी अधिकारी ने पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए कहा कि आपको जिन्ना का नाम बदलना चाहिए क्योंकि वह एक शराबी थे जो नशे में रहते थे। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद है जबकि वहां इस्लामिक कुछ भी नहीं है।
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डूंरड लाइन का लंबा है इतिहास
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच आपसी कटुता की कहानी वर्ष 1974 में शुरू हुई। दोनों देशों के बीच अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन को अंतरराष्ट्रीय सीमा के तौर पर मान्यता नहीं दी। अफगानिस्तान पाकिस्तान से सटी सीमा और सिंधु नदी तक के कुछ क्षेत्र पर अपना दावा करता है। 

ब्रिटिश भारत में खींची गई थी यह रेखा
भारत के उत्तरी हिस्सों पर ब्रिटिश सरकार ने नियंत्रण को मजबूत करने के लिए 1893 में अफगानिस्तान के साथ 2640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा खींची थी। ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन विदेश सचिव सर मॉर्टिमर डूरंड और अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच काबुल में हुए समझौते के बाद इस लाइन को खींचा गया। यह पश्तून इलाके से गुजरती है। इस डूरंड लाइन समझौते के तहत  अफगान को चित्राल, चागेह आदि जिलों को छोड़ना था। जिन पर अफगानिस्तान का नियंत्रण नहीं था। हालांकि, डूरंड लाइन समझौते के पहले भारत और अफगान के बीच कोई सीमा नहीं थी। 

 

 
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