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BBC Documentary: मुंबई के TISS में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का एलान, कॉलेज प्रशासन ने दी चेतावनी

Fri, 27 Jan 2023 05:33 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 27 Jan 2023 05:33 PM IST
सार

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) ने शुक्रवार को कहा कि कुछ छात्र बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री दिखाने की योजना बना रहे हैं। संस्थान ने इसकी स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी है।

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TATA Institute of Social Sciences Mumbai advisory no permission for BBC documentary screening
टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

साल 2002 के गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री सीरीज पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में विश्वविद्यालयों में छात्र समूह इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने पर अड़े हुए हैं। यह विवाद अब मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) तक पहुंच गया है। छात्र डॉक्यूमेंट्री को दिखाने की योजना बना रहे हैं।

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इस बीच, टीआईएसएस ने शुक्रवार को कहा कि कुछ छात्र बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री दिखाने की योजना बना रहे हैं। संस्थान ने इसकी स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दी है। संस्थान ने कहा कि यह परिसर में शांति को खतरे में डाल सकता है। इस परामर्श के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से सख्ती से निपटा जाएगा। 
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बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री सीरीज का पहला हिस्सा इसी माह जारी किया गया था, जिसे भारत सरकार ने ब्लॉक किया है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'प्रोपेगैंडा पीस' बताया था। हालांकि, कई विश्वविद्यालयों में छात्र संगठनों द्वारा इसकी स्क्रीनिंग की जा रही है, जिसके कारण विवाद गहराता जा रहा है। सबसे पहले केरल में इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद भाजपा के युवा मोर्चा ने प्रदर्शन किया था। 
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देश के प्रतिष्ठित और चर्चित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी जेएनयू (जेएनयू) में भी इस डॉक्यूमेंट्री को दिखाने पर जमकर बवाल हुआ। छात्रों के गुटों ने पथराव होने के भी आरोप लगाए। हालांकि पुलिस ने पथराव की घटना की पुष्टि नहीं की।

यह विवाद जेएनयू व जामिया से चलकर शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय तक पहुंच गया। एनएसयूआई केरला द्वारा आर्ट फैकल्टी में आज स्क्रीनिंग के लिए 4:00 बजे का समय दिया था। लेकिन इसका आयोजन नहीं हो सका। कोई विवाद ना हो इसलिए गेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात है। पुलिस ने धारा 144 भी लगा दी है। वहीं प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इसे लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रॉक्टर रजनी अब्बी ने पहले ही दिल्ली पुलिस को खत लिखकर उचित कार्रवाई की बात कही है।

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी में भी इस विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की गई। वामपंथी संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने विश्वविद्यालय परिसर में विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य ने यह जानकारी दी। पश्चिम बंगाल के ही प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी में भी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की तैयारी चल रही है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की छात्र शाखा एसएफआई ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की इजाजत मांगी है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी की विजुअल आर्ट्स सोसाइटी भी एक फरवरी को बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले गुरुवार को एसएफआई ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में गुजरात दंगों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का आयोजन किया। इसके जवाब में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने यूनिवर्सिटी कैंपस में द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग की।


ब्रिटिश प्रसारक बीबीसी ने साल 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एक डॉक्यूमेंट्री इंडियाः द मोदी क्वेश्चन जारी की है। बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रोपेगैंडा चलाने, पक्षपात करने और भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे। जिसके बाद इस डॉक्यूमेंट्री पर सरकार ने बैन लगा दिया। सरकार के बैन लगाने के बाद कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के इस कदम की आलोचना की।

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