गोगोई और जमीनी मुद्दों के सहारे असम में कांग्रेस को लड़ाई जीतने का भरोसा
- असम का हाल सीपी जोशी और तरुण गोगोई जाने
- गोगोई ने स्थानीय मुद्दों को बनाया हथियार
- रोजगार,शिक्षा, विकास का किया वादा
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असम विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों और मोदी सरकार की कथनी करनी में फर्क को जनता के सामने रखकर कांग्रेस ने राजनीतिक लड़ाई बहुमत से जीतने का भरोसा पाल लिया है। पूरी रणनीति राज्य के प्रभारी और कांग्रेस महासचिव सीपी जोशी, मुख्यमंत्री तरुण गोगोई को मुख्य भूमिक्रा में रखकर तैयार हुई है। इस बिना पर पार्टी के केन्द्रीय रणनीतिकारों को उम्मीद है कि कांग्रेस को 126 सदस्यीय विधान सभा में 70 से अधिक सीटें मिलेंगी।
असम में कांग्रेस ने स्थानीय मुद्दों को मुख्य तौर पर हथियार बनाया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत अन्य केन्द्रीय कांग्रेसी नेता तथा मुख्यमंत्री तरुण गोगोई भाजपा और अन्य विरोधियों की नीतियों को निशाने पर ले रहे हैं। केन्द्र में मोदी सरकार, चुनावी वादे और जमीनी हकीकत में फर्क पर कांग्रेस का हमला जारी है। पार्टी मोदी सरकार पर देश में धार्मिक उन्माद फैलाने, समाज को बांटने, भाई-चारा बिगाड़ने का आरोप लगा रही है। इसके साथ-साथ चुनाव प्रचार में हैदराबाद विश्वविद्यालय में खुदकुशी करने वाले छात्र रोहित वेमुला, जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के पोस्टर भी छाये हैं।
राज्य में हर साल दो लाख रोजगार के अवसर, स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों की बहाली, चाय बगानों के मजदूरों को लेकर पार्टी ने दरियादिली दिखाई है। चाय बगान मजदूरों के लिए दो हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का वादा किया है। माजुली आईलैंड के लिए 500 करोड़ रुपये का पैकेज देने का मंसूबा दिखाया है।
मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का वादा है कि अगर वह चौथी बार सत्ता में आए तो हर परिवार के कम से कम एक सदस्य को नौकरी मिलेगी। हालांकि कांग्रेस ने बांग्लादेश से आये घुसपैठियों पर कोई स्पष्ट लाइन नहीं ली है। जबकि यह राज्य में एक बड़ा मुद्दा है और असम मूल के लोगों में काफी माने रखता है। उच्चतम न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि यही हालात रहे तो आने वाले समय में असम मूल के लोग राज्य में अल्पसंख्यक हो जाएंगे।
मोदी ने नहीं निभाया अपना वादा
इसके बरअक्स कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बाढ़ और इसके चलते कटाव तथा खोई जमीन की तलाश के लिए रिसर्च, बराक घाटी में लघु सचिवालय, धीमाजी और बगाई गांव में कृषि विश्वविद्यालय खोले जाने को प्रमुखता से स्थान दिया है। राज्य में पार्टी का मुख्य चेहरा मुख्यमंत्री तरूण गोगोई हैं और कांग्रेस पूरी तरह से क्षेत्रीय मुद्दे पर चुनाव समर में उतरी है।
सम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के वादे पर कांग्रेस ने तंज कसा है। कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल का कहना है कि मोदी जी ने पहले असम की चाय ऊबाल-ऊबालकर पिलाई, फिर गुजरात को ऊबाला। इस समय देश को ऊबाल रहे हैं, भाई-चारा बिगड़ रहा है। समाज को बांट रहे हैं। अब यही प्रयोग असम में फिर करना चाह रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री ने कहा है कि उन्होंने असम की चाय को खूब ऊबाल-ऊबालकर लोगों को पिलाया है और अब उसका कर्ज उतारना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपने असम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और उनकी कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला। कुछ देर बाद ही मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने भी पलटवार करते हुए जवाब दिया। पीएम मोदी ने राज्य के पिछड़ेपन के लिए गोगोई सरकार को जिम्मेदार ठहराया, तो गोगोई ने भी मोदी पर अपना वादा नहीं निभाने और ब्रह्मपुत्र नदी पर पुल बनाने के लिए पैसा नहीं देने का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी रैलियों में असम में बिजली व पानी की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इतनी नदियां होने के बावजूद राज्य के लोगों को पीने के पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस पर पलटवार करते हुए गोगोई ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री ने अपना वादा नहीं निभाया है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के मुताबिक राज्य में बिजली क्षेत्र में विकास नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए असम को अवॉर्ड तक मिल चुका है। गोगोई ने दावा किया कि मोदी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर विभिन्न स्थानों पर पांच पुल बनाने के लिए पैसे देने का भी वादा किया था, लेकिन आज तक इस मद में एक पाई भी नहीं दी गई है।