एक रुपये में इडली बेचती हैं यह दादी अम्मा, इनके बिजनेस में पैसा लगाना चाहते हैं आनंद महिंद्रा
आज जहां महंगाई आसमान छू रही है। एक रुपये में टॉफी के सिवाय खाने के किसी भी सामान की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वहीं तमिलनाडु में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला का काम लोगों को प्रभावित कर रहा है। इनके प्रभाव का असर यह है कि महिंद्रा समूह के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने इनके वीडियो को ट्वीट किया और कैप्शन के साथ लिखा, 'यह उन विनम्र कहानियों में से एक जो आपको आश्चर्यचकित करती है, लेकिन अगर आप भी कमलाथल जैसा कुछ प्रभावशाली काम करते हैं, तो यकीनन वो दुनिया को हैरान करेगा। मैंने नोटिस किया है कि वह अभी भी एक लकड़ी से जलने वाले चूल्हे का उपयोग करती हैं। अगर कोई उन्हें जानता है तो मैं उन्हें एक एलपीजी ईंधन वाला चूल्हा देना चाहूंगा और उनके व्यवसाय में निवेश करने में मुझे खुशी होगी।'
One of those humbling stories that make you wonder if everything you do is even a fraction as impactful as the work of people like Kamalathal. I notice she still uses a wood-burning stove.If anyone knows her I’d be happy to ‘invest’ in her business & buy her an LPG fueled stove. pic.twitter.com/Yve21nJg47
— anand mahindra (@anandmahindra) September 10, 2019विज्ञापन
कौन हैं दादी अम्मा
तमिलनाडु के पेरु के नजदीक वडिवेलम्पलयम गांव में रहने वाली 80 वर्षीय महिला के. कमलाथल एक रुपये में सांभर और चटनी के साथ इडली बेचती हैं और आज भी अपनी उम्र की दूसरी महिलाओं से फिट हैं। इनके जीवन का लक्ष्य लोगों को सस्ता और भरपेट भोजन उपलब्ध कराना है। कमलाथल पिछले 30-35 सालों से यह काम कर रही हैं।
80 साल की कमलाथल रोज सुबह सूरज उगने से पहले उठ जाती हैं। सुबह छह बजते ही ग्राहकों के लिए इनके घर के दरवाजे खुल जाते हैं। छप्पर के नीचे ग्राहक बैठकर एक रुपए में इडली-सांभर और चटनी का स्वाद चखते हैं। यहां आने वाले ज्यादातर ग्राहक ऐसे हैं जो रोजाना आते हैं।
दादी अम्मा का लक्ष्य
कमलाथल कहती हैं कि, रोजाना दुकान पर आने वाले लोग भरपेट इडली खा सकें, यह मेरे लिए एक लक्ष्य की तरह है। इसलिए मैंने इडली का दाम एक रुपए रखा है। इससे यहां आने वाले जरूरतमंद लोग अपने परिवार के लिए पैसों की बचत करने के साथ पेट भी भर सकेंगे। अम्मा बताती हैं कि पहले इडली का दाम 50 पैसे होता था, लेकिन इसकी सामाग्री की कीमत बढ़ने की वजह से मुझे इसका दाम एक रुपये करना पड़ा।दादी अम्मा रोजाना करीब एक हजार इडली बेचती हैं। अपनी बचत के बारे में बताती हैं कि दिनभर की दुकानदारी से मैं रोजाना 200 रुपए कमाती हूं। कई लोगों का कहना है मुझे इडली के दाम बढ़ाने चाहिए। लेकिन मेरे लिए लोगों का पेट भरना और जरूरतमंदों की मदद करना प्राथमिकता है। मैं भविष्य में कभी भी इसके दाम नहीं बढ़ाउंगी।