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Tamil Nadu: विजय सरकार का बड़ा फैसला, कई अहम विभागों के 100 से अधिक शॉर्ट-टर्म टेंडर रद्द; जानें पूरा मामला
Sat, 23 May 2026 05:08 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 23 May 2026 05:08 PM IST
सार
तमिलनाडु की विजय सरकार ने पार100 से अधिक शॉर्ट-टर्म टेंडर रद्द कर दिए हैं। 13 से 22 मई के बीच जारी इन टेंडरों पर रोक लगाते हुए सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को सस्पेंड भी किया है।
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विजय थलापति
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
विस्तार
तमिलनाडु की नई सरकार ने प्रशासनिक कामकाज में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न विभागों के 100 से अधिक 'शॉर्ट-टर्म टेंडर' (कम समय वाले टेंडर) रद्द कर दिए हैं। इनमें लोक निर्माण, बिजली, ग्रामीण विकास और नगर प्रशासन जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं। सरकार ने यह फैसला प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सख्त बनाने और सरकारी कामों में पारदर्शिता लाने के लिए लिया है।
शॉर्ट-टर्म टेंडर क्या है?
आमतौर पर शॉर्ट-टर्म टेंडर तब जारी किए जाते हैं जब कोई काम बहुत जरूरी हो या आपातकालीन स्थिति हो। इसमें बोली लगाने का समय कम कर दिया जाता है ताकि काम जल्दी शुरू हो सके। हालांकि, 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) की सरकार ने सत्ता संभालने के बाद यह नीति बनाई थी कि बहुत जरूरी परिस्थितियों को छोड़कर शॉर्ट-टर्म टेंडर का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए। इसी नीति पर अमल करते हुए सरकार ने कम समय सीमा वाले टेंडरों की व्यापक समीक्षा शुरू की है।
इन विभागों के टेंडर हुए रद्द
इस कार्रवाई के तहत पिछले कुछ हफ्तों में जारी किए गए कई टेंडर वापस ले लिए गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 13 मई से 22 मई के बीच अलग-अलग विभागों में जारी किए गए टेंडरों की पहचान की गई और उन्हें रद्द कर दिया गया। प्रभावित विभागों में ग्रामीण विकास, परिवहन, लोक निर्माण विभाग (PWD), बिजली विभाग, चेन्नई कॉर्पोरेशन, नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग शामिल हैं। अधिकारियों ने इन टेंडरों को रद्द करने का कारण प्रशासनिक बताया है।
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ये भी पढ़ें: CJP को मिला सोनम वांगचुक का समर्थन: खुद को बताया 'मानद कॉकरोच', सरकार से की युवाओं की आवाज सुनने की अपील
अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
सरकार ने नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की है। चेन्नई कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विकास विभाग के उन अधिकारियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, जिन्होंने निर्देशों के बावजूद कथित तौर शॉर्ट-टर्म टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से सरकार ने साफ कर दिया है कि खरीद नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
इस कदम को नई सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रशासनिक सुधारों का एक हिस्सा माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक व्यय पर निगरानी बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी ठेकों की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी हो। अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य में होने वाली खरीद संबंधी गतिविधियों पर और भी कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि निर्धारित प्रक्रियाओं में किसी भी तरह से नियमों का उल्लंघन न हो।
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शॉर्ट-टर्म टेंडर क्या है?
आमतौर पर शॉर्ट-टर्म टेंडर तब जारी किए जाते हैं जब कोई काम बहुत जरूरी हो या आपातकालीन स्थिति हो। इसमें बोली लगाने का समय कम कर दिया जाता है ताकि काम जल्दी शुरू हो सके। हालांकि, 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) की सरकार ने सत्ता संभालने के बाद यह नीति बनाई थी कि बहुत जरूरी परिस्थितियों को छोड़कर शॉर्ट-टर्म टेंडर का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए। इसी नीति पर अमल करते हुए सरकार ने कम समय सीमा वाले टेंडरों की व्यापक समीक्षा शुरू की है।
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इन विभागों के टेंडर हुए रद्द
इस कार्रवाई के तहत पिछले कुछ हफ्तों में जारी किए गए कई टेंडर वापस ले लिए गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 13 मई से 22 मई के बीच अलग-अलग विभागों में जारी किए गए टेंडरों की पहचान की गई और उन्हें रद्द कर दिया गया। प्रभावित विभागों में ग्रामीण विकास, परिवहन, लोक निर्माण विभाग (PWD), बिजली विभाग, चेन्नई कॉर्पोरेशन, नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग शामिल हैं। अधिकारियों ने इन टेंडरों को रद्द करने का कारण प्रशासनिक बताया है।
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अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
सरकार ने नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की है। चेन्नई कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विकास विभाग के उन अधिकारियों को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, जिन्होंने निर्देशों के बावजूद कथित तौर शॉर्ट-टर्म टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से सरकार ने साफ कर दिया है कि खरीद नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
इस कदम को नई सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रशासनिक सुधारों का एक हिस्सा माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक व्यय पर निगरानी बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी ठेकों की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी हो। अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य में होने वाली खरीद संबंधी गतिविधियों पर और भी कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि निर्धारित प्रक्रियाओं में किसी भी तरह से नियमों का उल्लंघन न हो।