Tamil Nadu: 'सरकार की मंशा किसी को दोषी ठहराने की नहीं', करूर हादसे पर बोले तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन
तमिलनाडु के करूर रैली में मची भगदड़ मामले में सीएम स्टालिन ने कहा कि सरकार किसी को दोषी नहीं ठहरा रही, पर झूठी अफवाहों के खिलाफ सच सामने लाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सरकार एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रही है।
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तमिलनाडु के करूर में बीते दिनों अभिनेता और नेता विजय की रैली में मची भगदड़ मामले में राज्यभर की सियासत में गर्माहट तेज है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी अपने चरम पर है। ऐसे में मामले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक बार फिर करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ की घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि इस हादसे से जुड़ी झूठी अफवाहों का सच सामने लाना है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन ने लिखा कि करूर की इस दुखद घटना को लेकर सरकार किसी व्यक्ति को टारगेट नहीं कर रही है। लेकिन जब कुछ लोग जानबूझकर सरकार के खिलाफ गलत जानकारी फैलाते हैं, तो सच्चाई बताना हमारा कर्तव्य बन जाता है।
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सीएम ने राज्य सरकार की आगे की तैयारी पर दिया जोर
सीएम स्टालिन ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए राज्य सरकार एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एसओपी बना रही है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सबसे पहले हमें यह समझना चाहिए कि मानव जीवन अनमोल है और इसे हर हाल में बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
विपक्ष पर भी गरजे सीएम स्टालिन
इससे पहले मुख्यमंत्री स्टालिन ने विधानसभा में भी करूर हादसे पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि 34 विधायकों ने इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षण प्रस्ताव लाया था। विपक्ष के नेता बोलने के बाद हंगामा करने लगे और सदन से बाहर चले गए, क्योंकि उन्हें सरकार की कोई गलती नहीं मिली। उन्होंने सुझाव देने वाले सभी विधायकों का धन्यवाद किया और भरोसा दिलाया कि सभी सुझावों पर विचार कर कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षाबलों की तैनाती और हादसे का कारण
सीएम ने बताया कि करूर में उस दिन कुल 606 पुलिसकर्मी तैनात थे, जो सामान्य राजनीतिक कार्यक्रमों से कहीं ज्यादा थे। करूर जिले से 515 और अन्य जिलों से 91 पुलिसकर्मी बुलाए गए थे। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने 10,000 लोगों के आने की सूचना दी थी, लेकिन भीड़ उससे ज्यादा हो गई और सात घंटे की देरी की वजह से भगदड़ की स्थिति बन गई।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने अंत में कहा कि हादसे की खबर मिलते ही उन्होंने तुरंत करूर पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की और संवेदना जताई। जैसे ही मुझे हादसे की खबर मिली, मैं घर पर नहीं बैठ पाया। उन्होंने कहा कि मैं तुरंत करूर गया और पीड़ितों से मिला। सरकार ने तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
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'हिंदी पर बैन वाला कोई बिल नहीं लाया गया'
इसके साथ ही सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा था कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधानसभा के अंतिम दिन एक ऐसा बिल पेश किया है जिसमें राज्य में हिंदी भाषा, हिंदी फिल्में और होर्डिंग्स पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। लेकिन इन दावों को तमिलनाडु सरकार की फैक्ट-चेक यूनिट ने पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।
सरकार की ओर से एक्स पर बयान जारी कर बताया गया कि ऐसा दावा किया जा रहा है कि माननीय मुख्यमंत्री हिंदी भाषा को सभी रूपों में प्रतिबंधित करने के लिए विधानसभा में एक बिल लाने वाले हैं। यह दावा पूरी तरह झूठा है। विधानसभा सचिव ने साफ किया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।