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पूर्वोत्तर: महिला नेतृत्व वाले सामुदायिक संगठनों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, चार दिवसीय कार्यशाला शुरू
सार
ईटानगर में राष्ट्रीय सहायक पर्यवेक्षण ढांचे पर चार दिवसीय कार्यशाला शुरू हो गई है, जो चार दिनों तक चलेगी। इस कार्यशाला में आठ राज्यों और अंडमान-निकोबार के प्रतिनिधि जुटेंगे।
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उत्तर पूर्व में महिला संगठनों पर सरकार का फोकस
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्वोत्तर में ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले सामुदायिक संगठनों को अधिक स्वायत्त, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र ने जोर बढ़ाया है। इसी उद्देश्य से अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में राष्ट्रीय सहायक पर्यवेक्षण ढांचे पर चार दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला मंगलवार को शुरू हुई। इसमें पूर्वोत्तर के आठ राज्यों और अंडमान-निकोबार केंद्रशासित प्रदेश के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
यहां आयोजित कार्यशाला 8 से 11 सितंबर तक चलेगी। इसकी मेजबानी अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन कर रहा है। यह कार्यक्रम दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला में सामुदायिक स्तर के महासंघों की संस्थागत क्षमता, वित्तीय आत्मनिर्भरता, सुशासन और सदस्यों के सामाजिक-आर्थिक परिणामों को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।
निगरानी से सहयोग की ओर बदलाव
राष्ट्रीय सहायक पर्यवेक्षण ढांचा पारंपरिक अनुपालन आधारित निगरानी से आगे बढ़कर सहयोग और संस्थागत विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर के महासंघों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई के रूप में नहीं, बल्कि समुदाय के स्वामित्व वाले और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वायत्त संस्थानों के रूप में विकसित करना है। कार्यशाला में शासन, मानव संसाधन एवं कार्यकर्ता तंत्र, वित्तीय आत्मनिर्भरता, सदस्यों के परिणाम और सामाजिक भूमिका को पांच प्रमुख आधारों के रूप में रखा गया है। इनके माध्यम से संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां सुधार और अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है।
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आठ राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यशाला में असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के साथ अंडमान-निकोबार केंद्रशासित प्रदेश के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। मेजबान अरुणाचल प्रदेश के अधिकारी और कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों की टीमों की भागीदारी से जमीनी अनुभव साझा करने और सफल प्रयोगों को दूसरे राज्यों में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं राज्य मिशन निदेशक संगीता यिरांग ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इसे सामूहिक सीख और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बताया। राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई की ओर से कार्यशाला के उद्देश्यों और ढांचे की जानकारी भी दी गई।
चार दिन में तैयार होगी राज्यों की कार्ययोजना
पहले दिन जमीनी स्तर की स्थिति और संस्थागत कमियों का विश्लेषण किया जा रहा है। दूसरे दिन विभिन्न समूहों की प्रस्तुतियों के बाद सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार होगी। तीसरे दिन राज्यवार योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। अंतिम दिन 11 सितंबर को राज्यों की कार्ययोजनाओं का प्रस्तुतीकरण और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
कार्यशाला का एक प्रमुख लक्ष्य सामुदायिक महासंघों को संचालन और वित्तीय स्तर पर आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत आय के टिकाऊ स्रोत, बेहतर शासन, महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय शासन में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही सामुदायिक संस्थानों को स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों, उत्पादक समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों और बाजार से मजबूत जोड़ने की रणनीति पर भी काम होगा। इससे पूर्वोत्तर में महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण संस्थानों को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की उम्मीद है।
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यहां आयोजित कार्यशाला 8 से 11 सितंबर तक चलेगी। इसकी मेजबानी अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन कर रहा है। यह कार्यक्रम दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला में सामुदायिक स्तर के महासंघों की संस्थागत क्षमता, वित्तीय आत्मनिर्भरता, सुशासन और सदस्यों के सामाजिक-आर्थिक परिणामों को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी।
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निगरानी से सहयोग की ओर बदलाव
राष्ट्रीय सहायक पर्यवेक्षण ढांचा पारंपरिक अनुपालन आधारित निगरानी से आगे बढ़कर सहयोग और संस्थागत विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर के महासंघों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई के रूप में नहीं, बल्कि समुदाय के स्वामित्व वाले और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वायत्त संस्थानों के रूप में विकसित करना है। कार्यशाला में शासन, मानव संसाधन एवं कार्यकर्ता तंत्र, वित्तीय आत्मनिर्भरता, सदस्यों के परिणाम और सामाजिक भूमिका को पांच प्रमुख आधारों के रूप में रखा गया है। इनके माध्यम से संस्थानों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां सुधार और अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है।
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आठ राज्यों के प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यशाला में असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के साथ अंडमान-निकोबार केंद्रशासित प्रदेश के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। मेजबान अरुणाचल प्रदेश के अधिकारी और कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों की टीमों की भागीदारी से जमीनी अनुभव साझा करने और सफल प्रयोगों को दूसरे राज्यों में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं राज्य मिशन निदेशक संगीता यिरांग ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इसे सामूहिक सीख और अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बताया। राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई की ओर से कार्यशाला के उद्देश्यों और ढांचे की जानकारी भी दी गई।
चार दिन में तैयार होगी राज्यों की कार्ययोजना
पहले दिन जमीनी स्तर की स्थिति और संस्थागत कमियों का विश्लेषण किया जा रहा है। दूसरे दिन विभिन्न समूहों की प्रस्तुतियों के बाद सुधार के लिए कार्ययोजना तैयार होगी। तीसरे दिन राज्यवार योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। अंतिम दिन 11 सितंबर को राज्यों की कार्ययोजनाओं का प्रस्तुतीकरण और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
कार्यशाला का एक प्रमुख लक्ष्य सामुदायिक महासंघों को संचालन और वित्तीय स्तर पर आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत आय के टिकाऊ स्रोत, बेहतर शासन, महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और स्थानीय शासन में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही सामुदायिक संस्थानों को स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों, उत्पादक समूहों, किसान उत्पादक संगठनों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों और बाजार से मजबूत जोड़ने की रणनीति पर भी काम होगा। इससे पूर्वोत्तर में महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण संस्थानों को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की उम्मीद है।