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याचिका दायर: गैर कोरोना मरीजों की भी सुध लें अस्पताल, सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने की गुहार
Thu, 20 May 2021 07:09 PM IST
सुरेंद्र जोशी
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 20 May 2021 07:09 PM IST
सार
देश के अस्पतालों का पूरा फोकस कोरोना मरीजों के इलाज व उनकी जान बचाने पर है। ऐसे में अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों का इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस पीआईएल में कोर्ट से इस समस्या के समाधान का आग्रह किया गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र और राज्यों को यह निर्देश देने की मांग की गई कि गैर-कोविड-19 मरीजों को भी पर्याप्त चिकित्सा उपचार और सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। याचिका में कहा गया है कि जन स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
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वकील जी एस मणि द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण से करीब 2.70 लाख लोगों की मौत हुई। हालांकि दूसरी लहर के बाद अधिकांश राज्यों ने प्रतिबंध लगाए और कोरोना मरीजों के इलाज के प्रोटोकॉल बनाए हैं।
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ऐसे में हृदय, किडनी, लीवर और फेफड़ों की बीमारियों से ग्रसित मरीजों व गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से इलाज नहीं मिल पा रहा है। न ही अस्पतालों में कोई जांच ही हो पा रही है। जिन लोगों को सर्जरी या ऑपरेशन की जरूरत है, उन्हें भी चिकित्सा सुविधाओं से महरूम रखा जा रहा है।
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याचिका में कहा गया है कि हृदय रोगियों और गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल में दाखिला लेना बहुत मुश्किल हो गया है। कुछ निजी अस्पताल ऑनलाइन परामर्श प्रदान कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश सरकारी अस्पतालों में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
याचिकाकर्ता कहना है कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत सभी नागरिकों को जीवन और जन स्वास्थ्य का अधिकार प्राप्त है। याचिका में कहा गया है कि गैर-कोविड -19 रोगियों के लिए और अधिक सरकारी अस्पताल होने चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें कई इमरजेंसी कॉल आते हैं। लोगों में भ्रम की स्थिति है। अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाएं, कोविड -19 रोगियों से भरी होती है। इसलिए वहां दूसरे मरीज नहीं जा सकते।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कोविड -19 संक्रमण की दूसरी लहर के कारण उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसी कई राज्य सरकारों ने अप्रैल और मई, 2021 के महीने के लिए पूर्ण और आंशिक लॉकडाउन की घोषणा की है। कई राज्य सरकारों ने प्रतिबंधों को जून, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस वजह से अन्य बीमारियों के ग्रसित मरीजों को अस्पतालों में नियमित इलाज नहीं मिल पा रहा है।