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#SelfieWithBitiya: बेटी संग लें सेल्फी, शेयर करें अमर उजाला के साथ

Thu, 24 Jan 2019 07:16 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Thu, 24 Jan 2019 07:16 PM IST
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take a selfie with doughter, SelfieWithBitiya and share with amar ujala
selfiewithbitiya - फोटो : Amar Ujala
बेटियां देश की शान हैं। यह समाज के सभ्य होने का पैमाना हैं। कहा जाता है कि एक बेटे को बेहतर संस्कार देने से सिर्फ एक परिवार रोशन होता है, जबकि एक बेटी के संस्कार से पीढ़ियां फलती-फूलती हैं। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अमर उजाला की ओर से अपराजिता अभियान के तहत इस दिवस को खासतौर से मनाने की अपील की गई है।
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अमर उजाला के आह्वान पर देश-दुनिया के अलग-अलग शहरों से, गांवों से और कस्बों से लोगों ने अपनी बेटियों के साथ तस्वीरें भेजीं। अमर उजाला के सभी केंद्रों ने बेटियों के साथ उनके माता-पिता द्वारा गर्व के साथ भेजी गई तस्वीरों को अमर उजाला के पेज पर जगह दी। 
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अगर किसी कारणवश आप अपनी बेटी को कार्यस्थल नहीं ले जा पाएं हों, या फिर अबतक फोटो नहीं भेज पाएं हों, तो कोई बात नहीं। बेटियों के साथ गर्व महसूस करने में समय-सीमा कैसी!
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अपनी बेटी के साथ तस्वीर शेयर करें। हम उन तस्वीरों को अपने पेज पर शेयर करेंगे। घर पर हैं, तो वहीं से भेज दें। बिटिया संग कहीं बाहर घूमने जा रहे हों, तो वहीं से भेज दें। देर किस बात की!

आपको बस ये करना है
  • अपनी बेटी के साथ सेल्फी लें
  • #SelfieWithBitiya लिखकर फेसबुक पर अपलोड करें
  • टैग करें @AmarUjala फेसबुक पेज को
या फिर 
  • अपनी बेटी के साथ सेल्फी लें
  • #SelfieWithBitiya लिखकर twitter पर अपलोड करें
  • टैग करें @AmarUjalaNews ट्विटर पेज को

जानें क्यों मनाया जाता है बालिका दिवस

24 जनवरी को ही इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। इसलिए इस दिन को राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज के दिन इंदिरा गांधी को नारी शक्ति के रूप में याद किया जाता है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लिया गया है। आज बेटियां जीवन की हर चुनौतियों से पार पाते हुए हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, चाहे पढ़ाई हो, खेल हो, राजनीति हो, बिजनेस हो, प्रोफेशन हो, घर हो या उद्योग।

बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है लेकिन आज भी वह कुरीतियों का शिकार हैं। जागरूक समाज भी इस समस्या से अछूता नहीं है। हज़ारों लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है या जन्म लेते ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। आज भी समाज में कई घर ऐसे हैं, जहां बेटियों को बेटों की तरह अच्छा खाना और अच्छी शिक्षा नहीं दी जा रही है। 

एक सरकारी सर्वेक्षण में 42 प्रतिशत लड़कियों ने यह बताया कि वे स्कूल इसलिए छोड़ देती हैं, क्योंकि उनके माता-पिता उन्हें घर संभालने और अपने छोटे भाई-बहनों की देखभाल करने को कहते हैं। लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति आगाह करने और लड़कियों को बचाने के लिए 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

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