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अस्पताल में बवाल पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: पालघर पुलिस को फटकारा; कहा- ठाणे कांड से भी कोई सबक नहीं लिया?

Wed, 09 Sep 2026 08:21 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 09 Sep 2026 08:21 PM IST
सार

पालघर अस्पताल हमले की जांच में लापरवाही पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई। नौ आरोपी अब भी फरार हैं। अदालत ने जांच को लेकर सवाल उठाए और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी।

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Bombay High Court Slams Palghar Police Over ‘Casual’ Probe Into Hospital Attack
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

पालघर के एक निजी अस्पताल में मेडिकल स्टाफ से मारपीट और तोड़फोड़ के मामले की जांच को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पालघर पुलिस के रवैये को ‘बेहद लापरवाह’ बताते हुए कहा कि संवेदनशील मामले में पुलिस ने अब तक ठीक से कोई जांच नहीं की है। जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस कमल खाता की पीठ ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली उसकी अक्षमता को दर्शाती है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या पुलिस ने जुलाई में ठाणे के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों से हुई मारपीट की घटना से कोई सबक नहीं लिया।

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नौ आरोपी अब तक फरार क्यों?

पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने अदालत को बताया कि एफआईआर में नामजद 10 लोगों में से एक आरोपी शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के शहर प्रमुख राहुल घरात को गिरफ्तार कर लिया गया है और वह पुलिस हिरासत में है। बाकी नौ आरोपी फरार हैं। इस पर अदालत ने सवाल किया कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने तुरंत कदम क्यों नहीं उठाए। पीठ ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद ऐसा लगता है कि कोई जांच ही नहीं की गई। अदालत ने पुलिस की ढिलाई को आरोपियों के फरार होने की वजह बताया।

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'यह संवेदनशील मामला है, पुलिस ने बेहद लापरवाही बरती'

हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल में तोड़फोड़, कर्मचारियों से मारपीट और डॉक्टरों को धमकी देने का मामला बेहद संवेदनशील है। इसके बावजूद पुलिस ने जांच में ‘बिल्कुल लापरवाही’ वाला रवैया अपनाया है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर पालघर पुलिस मामले की जांच में रुचि नहीं रखती है तो जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी जा सकती है।

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केस डायरी के रखरखाव पर भी जताई नाराजगी

पीठ ने पुलिस की ओर से केस डायरी बनाए जाने के तरीके पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने सरकारी वकील शिशिर हिरय को निर्देश दिया कि वह पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से बात कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर जानकारी लें। इसके बाद शिशिर हिरय ने अदालत को बताया कि डीजीपी पालघर पुलिस से मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड मंगाएंगे और उचित कार्रवाई करेंगे। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की है।

क्या है पालघर अस्पताल हमले का मामला?

गौरतलब है कि 5 और 6 सितंबर की दरमियानी रात कई शिवसेना कार्यकर्ता पालघर के रिलीफ अस्पताल में कथित तौर पर घुस गए थे। अस्पताल में दही हांडी उत्सव में शामिल हुए कुछ घायल ‘गोविंदा’ भर्ती थे। आरोप है कि कार्यकर्ताओं ने अस्पताल पर अधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की। उन्होंने डॉक्टरों को धमकाया, कर्मचारियों से मारपीट की और आईसीयू में भर्ती घायल लोगों को कथित तौर पर जबरन अपने साथ ले गए।

इस मामले में पुलिस ने शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरात, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और उप तालुका प्रमुख रोहित गावित समेत 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से राहुल घरात को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नौ आरोपी फरार हैं। सात अन्य आरोपियों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।



यह मामला उस समय सामने आया जब हाईकोर्ट ठाणे के सरकारी अस्पताल में जुलाई में डॉक्टरों से हुई मारपीट के मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा था। उस मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं। इसी दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंडरगी ने अदालत को पालघर की घटना की जानकारी दी।

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