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संघ के करीब हो रहे स्वामी अग्रिवेश, संगठन के आयोजन में होंगे शामिल

Tue, 02 Jan 2018 10:10 PM IST
संजय मिश्र/नई दिल्ली
संजय मिश्र/नई दिल्ली Updated Tue, 02 Jan 2018 10:10 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला

वामपंथी विचारधारा के करीबी माने-जाने वाले स्वामी अग्रिवेश अब संघ परिवार के नजदीक नजर आ रहे हैं। संघ के पदाधिकारियों संग न सिर्फ उनके मिलने जुलने का सिलसिला बढ़ा है। बल्कि अग्रिवेश संघ के एक आयोजन में सार्वजनिक रूप से शामिल होने भी जा रहे हैं।

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संघ की संस्था विज्ञान भारती के जरिए 10 से 13 जनवरी के बीच पुणे में आयोजित किए जा रहे तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन में अग्रिवेश बतौर अतिथि शामिल होंगे। बताया जा रहा इससे पहले भी वे बीते दिसंबर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के जरिए वैदिक विज्ञान पर आयोजित एक आयोजन में भी राम बहादुर राय के साथ मंच साझा कर चुके हैं।
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राम बहादुर राय वैसे तो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष हैं। मगर उन्हें संघ विचारक के रूप में भी पहचाना जाता है। लेकिन इस दफे अग्रिवेश सीधे-सीधे संघ संगठन के आयोजन में शामिल होने पुणे जा रहे हैं। आयोजकों की मानें तो तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन के पहले दिन 10 जनवरी को अग्रिवेश सम्मेलन के उदघाटन सत्र में शामिल होंगे।

जानकारों की मानें तो संघ से अग्रिवेश की बढ़ रही करीबी आने वाले समय में कुछ नया गुल खिला सकती है। अग्रिवेश को एक जमाने में संघ का धुर विरोधी कहा जाता था। मगर उन्हें अब भगवा परिवार पसंद आने लगा है। संघ के कुछ शीर्ष पदाधिकारियों संग भी अग्रिवेश की समय-समय पर अलग से बैठकें होने की भी चर्चाएं हैं। 

पर्यावरण संकट संकट पर मंथन करेगा संघ 

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तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन के जरिए संघ परिवार विश्व के सामने मुंह बाए खड़ी सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण संकट पर मैराथन मंथन करेगा। संघ का मानना है कि विश्व के संकट का समाधान भारतीय ज्ञान तंत्र (वेद की पुरातन परंपरा) के जरिए ही संभव है। तमाम वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विकास के बावजूद भी समूचे विश्व को खतरनाक पर्यावरण, परिस्थितिकी और सैद्धांतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ये चुनौतियां ऐसी हैं कि यदि इसपर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया तो मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा। बल्कि कुछ वैज्ञानिकों ने इस बात का ऐलान भी कर दिया है कि यदि आलम यही रहे तो यह सदी मानवता की अंतिम सदी होगी। इसलिए विकास मॉडल में बदलाव की जरूरत है। संघ का कहना है कि यह बहुत आवश्यक है कि विश्व बिरादरी अपना नजरिया बदले। हमें मानव, मशीन और प्रकृति के बीच समन्वय बैठाते हुए आगे बढ़ना होगा। 

सम्मेलन में होगा वैज्ञानिकों और दार्शनिकों का जमावड़ा 
संघ के इस तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन में पर्यावरण से लेकर विकास के सिद्धांत पर मंथन के लिए पुणे में देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों और दार्शनिकों का जमावड़ा लगेगा। सम्मेलन की अध्यक्षता नालंदा विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर डा. विजय भटकर करेंगे। पहले दिन वैदिक और आधुनिक विज्ञान पर चर्चा के लिए जाने-माने वैज्ञानिकों के रूप में डा. अलेक्स हंके, अनिल राजवंशी, स्वामी आत्मप्रियानंद, बीएम हेगड़े, रामा जयसुंदर और वीके सारस्वत उपस्थित रहेंगे।

वहीं दार्शनिकों के रूप में स्वामी अग्रिवेश, गुरू मां आनंद मूर्ति, भद्रेश स्वामी, डेविड फ्रावले, हनीफ खां शास्त्री और किशन महाराज को आंमत्रित किया गया है। चार दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में वेद, भारतीय दर्शन, संस्कृति सूचना, योग, कृषि और विज्ञान, मानवता और सामाजिक विज्ञान, स्वास्थ्य और धन, और कला तथा विज्ञान सरीखे विषयों पर अलग-अलग 30 सत्र आयोजित होंगे।

कार्यक्रम के अंतिम दिन संघ के सह सरकार्यावाह सुरेश सोनी, केंद्रीय मंत्री डा. हर्ष वर्धन और सत्यपाल सिंह अपने विचार रखेंगे। इससे पहले तमाम चर्चा के सत्रों में देश-विदेश से आने वाले वैज्ञानिक और दर्शनशास्त्री भी अपने अपने विचार रखेंगे।

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