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दुर्गा पूजा पंडालों के बाहर माकपा के बुक स्टॉल पर विवाद: सीएम शुभेंदु ने दी रोक लगाने की सलाह, क्या है मामला?

Thu, 10 Sep 2026 05:43 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 10 Sep 2026 05:43 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल विधानसभा में दुर्गा पूजा के दौरान लगाए जाने वाले माकपा के बुक स्टॉल को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया। शुभेंदु अधिकारी ने पूजा समितियों से कहा कि यदि इन स्टॉल पर दुर्गा पूजा के बजाय 'शारदोत्सव' लिखा जाए तो उन्हें संचालित न होने दिया जाए। उन्होंने इसे त्योहार के धार्मिक स्वरूप को कम करने की कोशिश बताया।

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पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को दुर्गा पूजा समितियों से कहा कि अगर पूजा पंडालों के बाहर माकपा के बुक स्टॉल पर दुर्गा पूजा के बजाय 'शारदोत्सव' लिखा हो तो उन्हें वहां संचालित न होने दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 'शारदोत्सव' शब्द के इस्तेमाल से त्योहार के धार्मिक स्वरूप को कम करके दिखाने की कोशिश की जा रही है।
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राज्य विधानसभा में बोलते हुए अधिकारी ने वामपंथ के कुछ वर्गों पर 'सनातन धर्म' और भगवा रंग को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूजा समितियों से ऐसे बुक स्टॉल को रोकने का आग्रह किया।
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वामपंथी बुक स्टॉलों को लेकर क्या बोले सीएम शुभेंदु?
सीएम अधिकारी ने कहा, 'कुछ प्रोफेसर, जो खुद को वामपंथी कहते हैं, 'सनातनियों' पर हमला कर रहे हैं। वे चुनिंदा तरीके से भगवा रंग को निशाना बना रहे हैं। मैं सभी दुर्गा पूजा समितियों से कहूंगा कि अगर वामपंथी अपने लगाए बुक स्टॉल पर 'दुर्गा पूजा' के बजाय 'शारदोत्सव' लिखते हैं, तो उन्हें वहां संचालित होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।'
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वामपंथी दल क्यों लगाते हैं बुक स्टॉल?
  • माकपा और उससे जुड़े संगठन हर साल दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास बुक स्टॉल लगाते हैं। इन स्टॉल पर मार्क्सवादी साहित्य, पार्टी के प्रकाशन और अन्य किताबें बेची जाती हैं। पार्टी इन स्टॉल के जरिये लोगों तक भी पहुंच बनाती है। 1954 में दिग्गज कम्युनिस्ट नेता मुजफ्फर अहमद की पहल पर पार्क सर्कस में माकपा से जुड़ा पहला बुक स्टॉल लगाया गया था।
  • यह परंपरा उस समय खास तौर पर महत्वपूर्ण हो गई थी, जब पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को धार्मिक आयोजनों में सीधे भाग लेने से आम तौर पर हतोत्साहित किया जाता था। 2011 में वाम मोर्चे की हार के बाद ऐसे लाल कपड़े वाले बुक स्टॉल कम हो गए, हालांकि कुछ जगहों पर अब भी इनका आयोजन होता है।

वामपंथियों को सीएम ने दी क्या चेतावनी?
अधिकारी ने कहा कि त्योहार के दौरान किताबें बेचने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनकी आपत्ति 'शारदोत्सव' शब्द के इस्तेमाल से है, जिसे वह त्योहार के धार्मिक स्वरूप को नकारने या कम करके दिखाने की कोशिश मानते हैं। 'शारदोत्सव' का शाब्दिक अर्थ शरद ऋतु का उत्सव है। उन्होंने चेतावनी दी कि 'सनातन धर्म' या भगवा रंग के विरोध पर भविष्य में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारी ने कहा, 'यह सही समय है कि इस धरती में कम्युनिस्टों द्वारा बोए गए उन बीजों को उखाड़कर फेंक दिया जाए, जिसने नक्सलवाद जैसे विचारों को जन्म दिया।' मुख्यमंत्री ने कहा, 'उनके खिलाफ पूरी तरह से युद्ध होने दें, जो तीन महीने तक चल सकता है।' उन्होंने सदन में भाजपा विधायकों से पूछा कि क्या वे इस 'लड़ाई' के लिए तैयार हैं। भाजपा विधायकों ने जोरदार 'हां' में जवाब दिया।

माकपा ने सीएम के बयान पर दिया क्या जवाब?
माकपा के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने अधिकारी के बयान को 'फासीवादी हमला' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद का कथित दुरुपयोग कर 'धार्मिक जुनून भड़काने' की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पीटीआई से कहा, 'ये फासीवादी हमले हैं, जिनका मकसद उन बजरंगियों को उकसाना है, जो रात में पार्टी कार्यालयों में आग लगाते हैं और संस्थानों के परिसरों में तोड़फोड़ करते हैं।'

सलीम ने बुक स्टॉल के साइन बोर्ड को लेकर फैसला करने के मुख्यमंत्री के अधिकार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार, कारोबार, महंगाई और नागरिक सुविधाओं जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य ने कहा, 'उन्हें इतने लोगों से जुड़े मुद्दों पर बात करनी है। इसके बजाय वह अपने पूर्ववर्ती के नक्शेकदम पर चल रहे हैं, जिन्होंने सार्वजनिक पुस्तकालयों में कौन सी किताबें और पत्रिकाएं रखी जाएं, यह तय किया था।'

शारदोत्सव के बचाव में माकपा ने दी क्या दलील?
'शारदोत्सव' शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए सलीम ने कहा कि शरद ऋतु के त्योहार पूरे एशिया में मनाए जाते हैं और ऐतिहासिक रूप से इनका संबंध कृषि आधारित समाजों से रहा है। उन्होंने कहा, 'इसीलिए टैगोर ने बंगाल में 'पौष मेला', 'वर्षा वरण' और 'बसंत उत्सव' जैसे त्योहार शुरू किए थे।'
  • सलीम ने कहा कि दुर्गा पूजा रचनात्मक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के कई रूपों के लिए मंच भी उपलब्ध कराती है। इनमें नई किताबों का प्रकाशन, संगीत एल्बम, प्रदर्शनियां और पंडालों की सजावट शामिल हैं, जिनमें अक्सर स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल होता है।
  • उन्होंने कहा, 'वे इसे रोकना चाहते हैं। सभी कट्टरपंथी और तय नियमों वाली धार्मिक व्यवस्थाएं ऐसा करती हैं; वे क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी सूची बनाती हैं। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।' सलीम ने कहा कि माकपा ऐसे प्रतिबंध लगाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने बुक स्टॉल आयोजकों के लिए कोई केंद्रीय सलाह जारी नहीं करेगी।
  • उन्होंने आरोप लगाया, 'मुख्यमंत्री ने संवैधानिक पद की शपथ ली है और उन्हें कानून लागू करना है। कौन सा कानून ऐसी चीजों को लागू करने का निर्देश देता है? वह केवल धार्मिक जुनून भड़का रहे हैं, अपने पद के अधिकार और विधानसभा की गरिमा का दुरुपयोग कर रहे हैं।'
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