स्मार्ट सिटी: तीसरी बार दौड़ लगा रहा गाजियाबाद
दो बार स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो चुका गाजियाबाद अब फिर से स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के लिए प्रयास कर रहा है। यह गाजियाबाद का तीसरा प्रयास है लेकिन यह प्रयास भी सफल हो पाएगा, इसमें भी संशय बना हुआ है।
असल में, एरिया बेस्ड डेवलपमेंट में गाजियाबाद स्मार्ट सिटी के मानकों खरा नहीं उतर पा रहा है।
दूसरे प्रयास में रहा था 53वां स्थान
दूसरे प्रयास में भी गाजियाबाद का नाम 63 शहरों में 50.86 फीसदी अंक हासिल कर 53वें स्थान पर रहा। स्मार्ट सिटी में एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के लिए क्षेत्र का चयन करना होगा।
स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन, ट्रैफिक कंट्रोलिंग सिस्टम की योजनाएं तैयार करनी होंगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार सफलता जरूर मिलेगी लेकिन हकीकत कुछ और ही बयान करती है।
इस बार शामिल किया है केवल टीएचए के इलाके को
स्मार्ट सिटी मिशन का तीसरा चरण शुरू हो चुका है। नगर निगम इस बार भी बीते साल की तरह 'एरिया बेस्ड डेवलपमेंट' के लिए टीएचए के दिल्ली से सटी कालोनियों को चिह्नित किया है।
कंसलटेंट फर्म संबंधित क्षेत्र के लिए डेवलपमेंट की योजनाएं बनाकर स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करना है, जिसके लिए जनता से सुझाव लेने का काम शुरू हो चुका है।
दूसरे चरण में नगर निगम ने स्मार्ट सिटी मिशन के लिए वैशाली, कौशांबी, आंशिक महाराजपुर व साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र का 10७८ एकड़ का क्षेत्र 'एरिया बेस्ड डेवलपमेंट' के लिए चिह्नित किया था।
कंसलटेंट फर्म और निगम अफसरों ने 1897 करोड़ रुपये से स्मार्ट सिटी में विभिन्न योजनाओं को लागू करने का खाका तैयार किया था। गाजियाबाद दूसरे चरण में भी स्मार्ट सिटी की लिस्ट में जगह नहीं बना सका। जिससे निराशा ही हाथ लगी।
विभाग से ज्यादा क्षेत्र की जनता को निराशा हुई, क्योंकि ट्रांस हिंडन को चुने जाने के पीछे प्लानंड डेवलपमेंट को वजह बताया जा रहा है लेकिन इस इलाके में मूलभूत सुविधाओं का आधारभूत ढांचा ध्वस्त हो चुका है।
सीवर, सड़क, पानी, बिजली की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बना बगैर स्मार्ट सिटी दौड़ में आगे निकल पाना थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन मुश्किल कतई नहीं।
ऐतिहासिक पहचान पर भी नहीं लग सकी मुहर
गाजियाबाद की ओर से तैयार किए गए स्मार्ट सिटी प्रपोजल में एतिहासिक पहचान रखने वाले क्षेत्र को दरकिनार कर दिया गया। पहले चरण में एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के लिए नंदग्राम, हिंडन विहार के क्षेत्र को चुना गया तो दूसरी बार में दिल्ली बार्डर से सटा कौशांबी और ब्रिज विहार का एरिया चयनित कर लिया गया।
दूसरे चरण का परिणाम घोषित होने के बाद विफल रहे गाजियाबाद नगर निगम के अधिकारियों ने कंसलटेंट फर्म के एक्सपर्ट को बुलाकर फेल होने के कारणों की समीक्षा की थी। इसमें सबसे बड़ा कारण शहर की एतिहासिक पहचान न होना बताया गया था।
ऐसे में तीसरे चरण में निगम अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी प्रपोजल में घंटाघर, अंग्रेजी शासन काल के रेलवे स्टेशन के आसपास का एरिया डेवपलमेंट के लिए चयनित करने की प्लानिंग की लेकिन इसे लखनऊ से मंजूरी नहीं मिली, जिसके बाद नए नगर क्षेत्र ट्रांस हिंडन को फिर से प्रपोजल में शामिल किया गया है